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राष्ट्रीय गोकुल मिशन

भारत में 199 मिलियन पशु पाए जाते हैं जो पूरे विश्व की पशु जनसंख्या का लभगभ 14.5 प्रतिशत है। भारत में 166 मिलियन पशु देशी नस्ल के हैं परंतु भारत में पिछले वर्षों के दौरान बढ़ी क्रॉस-ब्रीडिंग से स्थानीय अथवा देशी नस्ल की गायों पर पहचान का संकट उत्पन्न हो गया है। इसलिए देशी नस्ल की गायों के संरक्षण और नस्ल सुधार को वैज्ञानिक ढ़ंग से बढ़ावा देने के उद्देश्य सेभारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत की गई है। इस मिशन के अंतर्गत गिर, साहिवाल, राठी, देवनी, थरपारकर, लाल सिंधी जैसी देशी नस्ल के पशुओं के आनुवांशिक स्वरूप को उन्नत करने और इनके वंश की वृद्धि के प्रबंध किए जाएंगे जिससे देशी नस्ल की गायों का दुग्ध उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाई जा सके और इसके द्वारा स्वस्थ और उच्च आनुवांशिक गुणवत्ता के बैल उपलब्ध हो सकें। इस मिशन के अंतर्गत ग्राम स्तरीय समन्वित पशु केंद्र भी बनाए जाने का प्रस्ताव है, जिसे गोकुल ग्राम कहा जाएगा।

28 जुलाई, 2014 को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने ‘राष्ट्रीय गोकुल  मिशन’ नाम से एक राष्ट्रीय योजना की घोषणा की।

  •  देशी नस्ल की गायों के संरक्षण और विकास के संदर्भ में शुरू की जा रही यह परियोजना, ‘राष्ट्रीय पशु प्रजनन एवं डेयरी विकास कार्यक्रम’ (NPBBDD: National Programme for Bovine Breeding and Dairy Development) का हिस्सा है।
  •  इस परियोजना के लिए वित्त वर्ष 2014-15 में सरकार द्वारा 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जबकि 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) के दौरान इस कार्यक्रम पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है।

 राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत धन का आवंटन इस प्रकार किया जाएगा-

  •  एकीकृत स्वदेशी पशु केंद्र जैसे ‘गोकुल ग्राम’ (Gokul Gram) की स्थापना हेतु।
  •  उच्च आनुवांशिक योग्यता वाले स्वदेशी नस्लों को संरक्षण देने के उद्देश्य से ‘बुल मदर फार्म्स’ (Bull Mother Farms) को मजबूत बनाने के लिए।
  •  प्रजनन प्रदेश (Breeding Tract) में क्षेत्र प्रदर्शन रिकॉर्डिंग (FPR : Field Performance Recording) की स्थापना हेतु।
  •  सर्वोत्तम रीति से जर्मप्लाज्म (Germplasm) को रखने वाले संस्थानों को सहायता प्रदान करने के लिए।
  •  बड़ी जनसंख्या वाली स्वदेशी नस्लों के लिए ‘वंशावली चुनाव कार्यक्रम’ (Pedigree Selection Programme) के कार्यान्वयन हेतु।
  •  ‘गो-पालन संघ’ नाम से प्रजनक समाज की स्थापना के लिए।
  •  प्राकृतिक सेवाओं के लिए उच्च आनुवंशिक योग्यता वाले रोगमुक्त सांड़ों (Bulls) के वितरण के लिए।
  •  स्वदेशी नस्लों के कुलीन पशुओं (Elite Animals) को रखने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के लिए।
  •  किसानों के लिए ‘गोपाल रत्न’ और प्रजनक समाज के लिए ‘कामधेनु’ नामक पुरस्कार की स्थापना हेतु।
  •  स्वदेशी नस्लों के लिए दुग्ध उत्पाद प्रतियोगिताओं (Milk Yield Competitions) का आयोजन कराना के लिए।
  •  स्वदेशी पशु विकास कार्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों में काम करने वाले तकनीकी और गैर-तकनीकी लोगों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन हेतु।
  •  राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना का कार्यान्वयन ‘राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों’ द्वारा पशुधन विकास बोर्डों के माध्यम से किया जाएगा।
  •  राज्य गौ सेवा आयोगों को पशुधन विकास बोर्ड के प्रस्तावों को प्रायोजित करने और  प्रायोजित प्रस्तावों के कार्यान्वयन की निगरानी (Monitoring) करने का आदेश दिया जाएगा।
  •  देशी नस्ल के पशुओं के विकास में भूमिका निभाने वाली सभी एजेंसियों जैसे सीएफएसपीटीआई (CFSPTI), सीसीबीएफ (CCBFs), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, गैर सरकारी संगठनों, सहकारी समितियों और सर्वश्रेष्ठ जर्मप्लाज्म वाली गौ-शालाओं को प्रतिभागी एजेंसी(Participating Agency) का दर्जा प्राप्त होगा।
  • गोकुल ग्राम
  •  राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत देशी नस्लों के प्रजनन प्रदेशों में ‘गोकुल ग्राम’ की स्थापना की जाएगी।
  •  गोकुल ग्राम की स्थापना देशी प्रजनन प्रदेशों तथा शहरी पशुओं के लिए महानगरों के निकट की जाएगी।
  •  गोकुल ग्राम की स्थापना पीपीपी मॉडल (Public Private Partnership  Model) के आधार पर करने का प्रस्ताव है।
  •  गोकुल ग्राम में 1000 जानवरों को रखने की क्षमता होगी जिसमें उत्पादक और अनुत्पादक पशुओं का अनुपात 60 : 40 का होगा।
  •  गोकुल ग्राम पशुओं के पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए चारा उत्पादन (Fodder Production) भी करेंगे।
  •  गोकुल ग्राम को बीमारियों से मुक्त रखने के लिए जानवरों की नियमित रूप से ब्रूसीलोसिस (Brucellosis), टीबी (TB) और जेडी (JD) जैसी बीमारियों के संदर्भ में जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त ग्राम में एक डिस्पेंसरी और एआई केंद्र भी खोले जाने का प्रस्ताव किया गया है।
  •  गोकुल ग्राम दूध, जैविक खाद, केंचुआ-खाद, यूरिन डिस्टिलेट, बायोगैस से विद्युत का उत्पादन तथा पशु उत्पादों की ब्रिकी के माध्यम से आर्थिक संसाधन पैदा करेगा।
  •  महानगरों के निकट स्थापित गोकुल ग्राम का केंद्र शहरी पशुओं के आनुवांशिक उन्नयन पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
  •   केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन को देश भर में सफलतापूर्वक लागू करने के उद्देश्य से 16 सितंबर, 2014 को राज्य पशुपालन मंत्रियों की एक बैठक बुलाई है।

2 thoughts on “राष्ट्रीय गोकुल मिशन”

  1. यह मै 7-9-2013 के कॅाम्पेक्ट पेपर मे पड़ा हुॅं की आवेदन निकला है पता जौनपुर का है यह सही है या फर्जी है rashtipashu@gmail.com
    password-jaunpur123
    यॅँहा से डाउनलोड करने को कहा है आवेदन पत्र

  2. UP National Animal Health Service mission.यह मै 7-9-2013 के कॅाम्पेक्ट पेपर मे पड़ा हुॅं की आवेदन निकला है पता जौनपुर का है यह सही है या फर्जी है

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