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17+1 सहयोग मंच (17+1 Cooperation Forum)

17+1 Cooperation Forum

वर्तमान संदर्भ

  • लिथुआनिया ने 22 मई, 2021 को मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ चीन के ‘17+1 सहयोग मंच’ (17 + 1 Cooperation forum) को ‘विभाजनकारी’ करार देते हुए छोड़ दिया।
  • उक्त सहयोग मंच में यूरोपीय संघ (EU) के 12 सदस्य भी शामिल हैं।
  • लिथुआनिया (बाल्‍टिक देश) ने अन्‍य यूरोपीय संघ (EU) के सदस्यों से ‘चीन के साथ अधिक प्रभावी 27+1 दृष्टिकोण (27 + 1 Approach) अपनाने तथा संवाद जारी रखने’ का भी आग्रह किया है।

महत्‍वपूर्ण बिंदु

(1) पृष्ठभूमि

  • हाल के महीनों में, लिथुआनिया ने कई कदम उठाए जिससे बीजिंग ने नाराजगी जाहिर की है, जिसमें –
  • चीनी निवेश को रोकना तथा
  • ताइवान में एक व्यापारिक कार्यालय खोलने की घोषणा करना शामिल था।

(2) 17+1 पहल के बारे में

(i) गठन

  • ‘17+1 पहल, चीन के नेतृत्‍व में गठित (चीन और मध्य तथा पूर्वी यूरोपीय देश का) एक सहयोग मंच है, जिसकी स्थापना वर्ष 2012 में हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में की गई थी।

(ii) सदस्य

  • इस पहल में यूरोपीय संघ (EU) के बारह सदस्य देश तथा पांच बाल्‍कन राष्ट्र शामिल हैं- अल्‍बानिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, बुल्‍गारिया, क्रोएशिया, चेक गणराज्‍य, एस्टोनिया, ग्रीस, हंगरी, लातविया, लिथुआनिया, मैसेडोनिया, मोंटेनेग्रो, पोलैंड, रोमानिया, सर्बिया, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया।
  • इस पहल से लिथुआनिया के अलग होने के बाद इसे ‘16+1’ संगठन/मंच के रूप में जाना जाएगा।

(iii) उद्देश्य

(1) ‘मध्य एवं पूर्वी यूरोपीय’ (Central & Eastem European : CEE) क्षेत्र के विकास हेतु निवेश और व्यापार के लिए मध्य एवं पूर्वी यूरोप के सदस्य देशों तथा बीजिंग के मध्य सहयोग का विस्तार करना।
(2) यह फ्रेमवर्क सदस्य देशों में पुलों, मोटरमार्गों, रेलवे लाइनों और बंदरगाहों के आधुनिकीकरण जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
(3) इस मंच को व्यापक तौर पर चीन की महत्‍वाकांक्षी, ‘बेल्‍ट एंड रोड पहल’ (Belt and Road Initiative : BRI) परियोजना के विस्तार के रूप में देखा जाता है।

  • भारत लगातार ‘बेल्‍ट एंड रोड पहल’ (BRI) का विरोध करता है, क्‍योंकि इसका एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) से होकर गुजरता है।
  • चीन के अनुसार, ‘17+1 पहल’ पश्चिमी यूरोपीय देशों की तुलना में कम विकसित यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को सुधारने पर केंद्रित है।

(3) बाल्‍टिक देश

  • यह भौगोलिक शब्द तीन संप्रभु देशों – एस्टोनिया, लाटविया और लिथुआनिया (उत्तर से दक्षिण क्रम) के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • ये देश यूरोप के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और बाल्‍टिक सागर के पूर्वी किनारे पर स्थित हैं। (उत्तरी यूरोप)
  • बाल्‍टिक देश पश्चिम और उत्तर में बाल्‍टिक सागर से घिरे हैं, जिसके नाम पर इन देशों को बाल्‍टिक देश कहा जाता है।
  • यह क्षेत्र गैर-स्लाव और जातीय स्लावों का मूल निवास है।
  • बाल्‍टिक अर्थव्यवस्था में कृषि का अहम योगदान है।

नोट – बाल्‍कन देश

  • यह भौगोलिक शब्द निम्न 10 संप्रभु देशों के लिए प्रयुक्त किया जाता है- अल्‍बानिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, बुल्‍गारिया, क्रोएशिया, कोसोवो, उत्तरी मैसेडोनिया, मोंटेनेग्रो, रोमानिया, सर्विया और स्लोवेनिया।
  • यह दक्षिण-पूर्वी यूरोप का एक क्षेत्र है, जो बाल्‍कन पर्वत से घिरा है। (दक्षिणी यूरोप)
  • इस क्षेत्र की अधिकांश आबादी दक्षिण स्लावों की है तथा यह क्षेत्र जातीय एवं भाषायी विविधताओं से परिपूर्ण है।
  • यह क्षेत्र मुख्य रूप से नार्डिक लोगों का निवास स्थान है।
  • यह युरोप में नियोलिथिक युग में कृषि संस्कृतियों के आगमन का अनुभव करने वाला पहला क्षेत्र था।

संकलन – शिशिर अशोक सिंह

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