सम-सामयिक घटना चक्र | Railway Solved Paper Books | SSC Constable Solved Paper Books | Civil Services Solved Paper Books
Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन

Smart Anti Airfield Weapon
  • वर्तमान संदर्भ
  • हाल ही में‚ (21 जनवरी‚ 2021) ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ (DRDO) द्वारा विकसित ‘स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन’ (SAAW : Smart Anti Ari Field Weapon) का सफल ‘कैप्टिव एंड रिलीज’ उड़ान परीक्षण किया गया।
  • इसका परीक्षण ओडिशा तट से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के हॉक-आई (Hawk-I) विमान से किया गया।
  • DRDO द्वारा पिछले पांच वर्षों में किए गए परीक्षणों की शृंखला में SAAW का यह नौवां सफल परीक्षण था।
  • पृष्ठभूमि
  • SAAW ग्लाइड बम श्रेणी से संबंधित है और इसका विकास वर्ष 2013 से शुरू हुआ।
  • पहली बार इसका परीक्षण वर्ष 2016 में किया गया था।
  • नोट- ग्लाइड बम (Glide Bomb) – ग्लाइडिंग बम एक तरीके का गाइडेड हथियार होता है‚ जिसे लड़ाकू विमानों द्वारा निर्देशित प्रणाली यानी गाइडेंस मैकेनिज्म का प्रयोग कर वांछित लक्ष्य पर सटीकता से दागा जा सकता है।
  • यह मिसाइल या रॉकेट से सस्ता पड़ता है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • विनिर्माण : इसका विकास DRDO के हैदराबाद स्थित ‘रिसर्च सेंटर इमारत’ (Research Centre Imarat-RCI) द्वारा स्वदेशी रूप से किया गया है।
  • विशेषताएं
  • यह ऐसा पहला स्मार्ट हथियार है‚ जिसे Hawk-MK132 एयरक्राफ्ट से दागा गया है।
  • हॉक-आई प्लेटफॉर्म‚ HAL के स्वामित्व में है‚ जिसे CSIR प्रयोगशालाओं और DRDO द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों और प्रणालियों के प्रमाणन के लिए उपयोग किया जाता है।
  • SAAW को जमीनी लक्ष्यों विशेष रूप से प्रतिकूल एयरफील्ड बुनियादी ढांचों या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अन्य प्रतिष्ठानों पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • SAAW 125 किलोग्राम का ग्लाइडिंग बम है‚ जो कि बेहद अत्याधुनिक‚ सटीक और घातक है अर्थात स्मार्ट वेपेन है।
  • यह आसमान में उड़ रहे लड़ाकू विमान से दागा जा सकता है।
  • यह स्थल पर स्थित शत्रु की एयरफील्ड संपत्तियों जैसे- रडार‚ बंकर‚ टैक्सी‚ ट्रैक‚ रनवे को 100 किलोमीटर की दूरी से निशाना बना सकता है।
  • इस उच्च सटीकता वाले निर्देशित बम का वजन इस श्रेणी की अन्य हथियार प्रणालियों की तुलना में कम है।
  • यह किसी भी तरह के मौसम में उच्च सटीकता से दागा जा सकता है।
  • SAAW का जगुआर और सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकता है।
  • SAAW को इससे पहले जगुआर लड़ाकू विमान से भी दागा गया था।
  • भविष्य में SAAW को रॉफेल के साथ भी जोड़े जाने की योजना है।
  • निष्कर्ष
  • स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपेन (SAAW) का विकास भारतीय सेना की ताकत को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी‚ साथ ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर-भारत के लक्ष्य की ओर एक सकारात्मक कदम होगा।

सं. शिशिर अशोक सिंह