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स्क्वायर किलोमीटर एरे (SKA) : विश्व का सबसे बड़ा टेलीस्कोप

Square Kilometer Array (SKA): World's Largest Telescope
  • वर्तमान संदर्भ
  • 4 फरवरी‚ 2021 को स्क्वायर किलोमीटर एरे ऑब्जर्वेटरी (SKAO : Square Kilometre Array Observatory) परिषद की पहली बैठक में विश्व के सबसे बड़े रेडियो टेलीस्किोप ‘स्क्वायर किलोमीटर एरे’ टेलीस्कोप की स्थापना को मंजूरी प्रदान की।
  • प्रमुख तथ्य

(1) स्क्वायर किलोमीटर एरे ऑब्जर्वेटरी (SKAO)

  • यह एक नया अंतरसरकारी संगठन है‚ जो रेडियो खगोल विज्ञान को समर्पित है।
  • मुख्यालय : ब्रिटेन (UK)
  • वर्तमान समय में SKAO में 10 देशों की संस्थाएं शामिल हैं।
  • सदस्य : ऑस्ट्रेलिया‚ कनाडा‚ चीन‚ भारत‚ इटली‚ न्यूजीलैंड‚ दक्षिण अफ्रीका‚ स्वीडन‚ नीदरलैंड्स और यूनाइटेड किंगडम (UK)।
  • नोट– संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस इसमें नहीं शामिल हैं।
  • पहली (वर्तमान) अध्यक्ष : डॉ. कैथरीन सीसारकी (Dr. Catherine Cesarsky)
  • प्रत्येक सदस्य देश अपनी संस्थाओं के माध्यम से इसमें भागीदारी करेगा।
  • भारत के 20 राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थान‚ जिनको ‘आणविक ऊर्जा विभाग’ (DAE) तथा ‘विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग’ का सहयोग प्राप्त है‚ पुणे के ‘National Centre for Radio Astrophysics’ (NCRA) के नेतृत्व में कार्य करेंगे।

(2) स्क्वायर किलोमीटर एरे टेलीस्कोप

  • इसे विश्व के सबसे बड़े रेडियो टेलीस्कोप के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
  • इसको अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में स्थापित किया जाएगा।
  • इसका संचालन‚ रख-रखाव और निर्माण SKAO द्वारा किया जाएगा।
  • इस पर लगभग 8 बिलियन पाउंड की लागत आएगी तथा एक दशक (10 वर्ष) का समय लगने की संभावना है।

(3) रेडियो टेलीस्कोप

  • ये ऑप्टिकल टेलीस्कोप से अलग होते हैं।
  • रेडियो टेलीस्कोप अदृश्य गैसों (Inivisible Gas) का पता लगाने में सक्षम होते हैं।
  • जिन अंतरिक्षीय सिग्नल का ऑप्टिकल टेलीस्कोप पता नहीं लगा सकता‚ उन सिग्नलों का रेडियो टेलीस्कोप से पता लगाया जा सकता है।
  • यही कारण है कि ये ब्रह्मांडीय धूल के कारण न दिखाई देने वाले अंतरिक्षीय क्षेत्रों की भी खोज कर सकते हैं।
  • 1930 के दशक में भौतिक विज्ञानी कार्ल जानस्की (Karl Jansky) द्वारा सबसे पहले रेडियो संकेतों का पता लगाया गया था।
  • नोट– तरंगर्दर्ध्य और तरंगदैर्ध्य
  • रेडियो टेलीस्कोप निम्न ऊर्जा (Low Energy) सिग्नल या उच्च तरंगदैर्ध्य सिग्नल का भी पता लगा लेता है‚ परंतु ऑप्टिकल टेलीस्कोप केवल अवरक्त तरंगों (IR)‚ गामा तरंगों और दृश्य तरंगों का ही पता लगा पाता है।
  • रेडियो तरंगों की उच्च तरंगदैर्ध्य की वजह से रेडियो टेलीस्कोप काफी बड़े होते हैं।

(4) प्यूर्टोरिको स्थित विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सिंगल-डिश रेडियो टेलीस्कोप ‘आर्सीबो टेलीस्कोप’ (Arecibo-Telescope) दिसंबर‚ 2020 में नष्ट हो गया।

  • इसका निर्माण वर्ष 1963 में किया गया था।

(5) भारत के कुछ प्रमुख टेलीस्कोप

(i) देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप-

  • आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) ने ‘देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप’ को वर्ष 2016 में उत्तराखंड के देवस्थल में स्थापित किया गया था।
  • यह 3.6 मीटर व्यास वाली ऑप्टिकल टेलीस्कोप है।
  • ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने के लिए इसे भारत-बेल्जियम के संयुक्त प्रयास द्वारा स्थापित किया गया था।
  • नोट– आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आता है।

(ii) ग्रोथ-इंडिया टेलीस्कोप

  • यह टेलीस्कोप भारत के हनले (लद्दाख) में स्थित ‘भारतीय खगोलीय वेधशाला’ (Indian Astronomical Orbservatory) में स्थापित की गई है।
  • ग्रोथ इंडिया टेलीस्कोप कई देशों- संयुक्त राज्य अमेरिका‚ जर्मनी‚ इस्राइल‚ जापान‚ यूनाइटेड किंगडम‚ आदि की संयुक्त पहल ‘ग्रोथ’ (GROWTH – Global Relay of Observatories Watching Transients Happen) का हिस्सा है।
  • ग्रोथ पहल के तीन प्रमुख लक्ष्य हैं-

(i) बाइनरी न्यूट्रॉन के विलय की पहचान करना
(ii) सुपरनोवा विस्फोट का अध्ययन
(iii) क्षुद्रग्रहों का अध्ययन

(iii) Major Atmospheric Cerenkov Experiment Telescope (MACE)

  • यह हनले (लद्दाख) में स्थित ‘भारतीय खगोलीय वेधशाला’ के परिसर में स्थापित की गई है।
  • यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा गामा किरण टेलीस्कोप (2nd largest ground based gamma ray telescope) है।
  • जिसका व्यास 21 मीटर है।
  • नोट – विश्व का सबसे बड़ा गामा किरण आधारित टेलीस्कोप : HESS (High Energy Stereoscopic System), नामीबिया में है‚ जिसका व्यास 28 मी. है।

(iv) जायंट मीटर-वेव रेडियो टेलीस्कोप(GMRT : Giant Meterwave Radio Telescope)

  • GMRT 25 किमी. के क्षेत्र में फैली हुई 30 परवलयाकार (Parabolic) रेडियो दूरबीनों की एक शृंखला (Array) है‚ जो सभी दिशाओं में घूम सकती है।
  • प्रत्येक दूरबीन का व्यास 45 मीटर है।
  • इसका संचालन ‘राष्ट्रीय खगोल भौतिकी केंद्र’ बंगलुरू के द्वारा किया जाता है।
  • यह पुणे शहर से 80 किलोमीटर उत्तर में रवोडाड नामक स्थान पर स्थित है।
  • यह विश्व की सबसे संवेदनशील दूरबीनों में से एक है।
  • निष्कर्ष
  • स्क्वायर किलोमीटर एरे‚ जो कि एक रेडियो टेलीस्कोप है‚ जिसकी वजह से यह ऑप्टिकल टेलीस्कोप से कहीं अधिक शक्तिशाली होगा‚ जो भविष्य में विभिन्न खगोलीय रहस्यों को सुलझाने में मील का पत्थर साबित होगा। चूंकि यह कई देशों का संयुक्त उपक्रम है‚ अत: देशों के संबंधों में भी प्रगाढ़ता आएगी और साथ ही विज्ञान के क्षेत्र में आपसी सामंजस्य को बढ़ावा मिलेगा।

सं. शिशिर अशोक सिंह