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सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज

social stock exchange

वर्तमान संदर्भ-

  • हाल ही में, ‘‘भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड’’ (SEBI) के तकनीकी समूह (Technical Group-TG) द्वारा ‘‘सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज ’’ (Social Stock Exchanges-SSE) पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है।
  • सितंबर, 2020 में नाबार्ड के पूर्व अध्यक्ष हर्ष भानवाला की अध्यक्षता में सेबी द्वारा सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज (SSE) पर एक तकनीकी समूह का गठन किया गया था।

महत्वपूर्ण बिंदु-

(1) तकनीकी समूह की प्रमुख सिफारिशें-

(i) पात्रता :

  • लाभकारी (For Profit-FP) तथा गैर-लाभकारी संगठनों (Not for Profit Organisations-NPO), दोनों के लिए ‘सोशल स्टॉक एक्सचेंजों’ (SSE) में संभावनाओं की तलाश करने की अनुमति दी जानी चाहिए, बशर्तें वे यह साबित करें कि सामाजिक उद्देश्य और सामाजिक प्रभाव उनका प्रमुख लक्ष्य है।
  • राजनीतिक और धार्मिक संगठनों, पेशेवर/व्यापार संगठनों और बुनियादी ढांचे और आवास कंपनियों (किफायती आवास को छोड़कर) को ‘सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज’ के माध्यम से धन जुटाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

(ii) पैनल ने अपनी सिफारिश में सामाजिक उद्यम (SE) के स्टॉक एक्‍सचेंज से जुड़ने के लिए- मोटे तौर पर 15 क्षेत्रों में काम की शर्तों की सिफारिश की है।

  • पैनल ने जिन 15 क्षेत्रों में काम की शर्त रखने की सिफारिश की है उसमें भुखमरी, गरीबी, कुपोषण और असमानता का उन्‍मूलन, स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना, शिक्षा, रोजगार और आजीविका का समर्थन करना, महिलाओं की लैंगिक समानता सशक्तीकरण और सामाजिक उद्यमों का समर्थन करना शामिल है।

(iii) अनुदान संचयन हेतु उपलब्ध प्रणालियां-

  • गैर-लाभकारी संगठनों (NPO) के लिए, इक्‍विटी, जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल बाॅण्ड (ZCZP),’ विकास प्रभाव इंपैक्‍ट बाॅण्ड सोशल वेंचर फंड (SVP) तथा म्यूचुअल फंड्स के माध्यम से निवेशकों द्वारा दान के माध्यम से ‘‘अनुदान संचयन’’ (Fundraising) की अनुमति है।
  • लाभकारी संगठन/उद्यम, इक्‍विटी, ऋण, विकास प्रभाव बाॅण्ड और सामाजिक उद्यम निधि के माध्यम से ‘‘अनुदान संचयन’’ कर सकते हैं।

(iv) फंड का आकार –

  • इस प्रकार के फंडों के लिए न्‍यूनतम राशि को 20 करोड़ से घटाकर 5 करोड़ रुपये और इनकी न्‍यूनतम सदस्यता राशि को 1 करोड़ रुपये से घटाकर 2 लाख रुपये की जानी चाहिए।

(v) ‘‘सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज’’ के लिए क्षमता निर्माण निधि-

  • इसके तहत 100 करोड़ रुपये का एक फंड नाबार्ड के अधीन बनाया जाना चाहिए।
  • एक्‍सचेंजों और सिडबी जैसी अन्‍य विकास एजेंसियों को इस फंड में योगदान करने के लिए कहा जाना चाहिए।

(vi) सतत विकास लक्ष्यों (SDGS) के तहत नीति आयोग द्वारा निम्नलिखित गतिविधियों को चिह्नित किया गया है, जिनमें ‘‘सोशल स्टॉक एक्सचेंज’’ (SSE) भाग ले सकते हैं:-

  • भुखमरी उन्मूलन (Eradicating Hunger)
  • गरीबी, कुपोषण और असमानता
  • LGBTQIA+ समुदायों और महिला सशक्तीकरण के माध्यम से लैंगिक समानता को बढ़ावा देना –
  • ग्रामीण खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण
  • स्लम एरिया डेवलपमेंट – किफायती आवास

(2) सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज (SSE) की पृष्ठभूमि-

  • वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट भाषण के दाैरान वित्तमंत्री ने सामाजिक उद्यम और स्वैच्‍छिक संगठनों (Voluntary Organisations) को सूचीबद्ध करने के लिए SEBI के विनियामक दायरे के तहत एक ‘‘सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज’’ गठित करने की दिशा में कदम उठाने का प्रस्ताव दिया था।
  • सेबी के द्वारा सितंबर, 2019 में इशरत हुसैन की अध्यक्षता में सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज पर एक कार्यकारी समूह का गठन किया गया।
  • इस कार्यकारी समूह ने देश में ‘‘सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज’’ के निर्माण के लिए निम्नलिखित सिफारिशें की-

(i) गैर-लाभकारी संगठन सीधे बॉण्ड जारी करने के माध्यम से (SSE) पर सूचीबद्ध हो सकते हैं।
(ii) वैकल्‍पिक निवेश कोष (Alternative Investment Funds) के तहत कुछ मौजूदा तंत्रों जैसे कि सामाजिक उद्यम निधि (Social Venture Funds-SVFs) समेत विभिन्‍न फंडिंग तंत्रों की सिफारिश की।
(iii) SSE के तहत धन एकत्रित करने वाले संगठनों के लिए एक नया न्‍यूनतम रिपोर्टिंग मानक प्रस्तावित किया गया है।
(iv) सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज (SSE) पर भागीदारी को प्रोत्‍साहन देने के लिए कुछ कर प्रोत्‍साहन देने की सिफारिश की।
(v) प्रतिभूति लेन-देन कर (Securities Transaction Tax-STT) और पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax-CGT) को समाप्‍त करने की सिफारिश की।
(vi) परोपकारी दानकर्ताओं (Philanthropic Donors) को 100 प्रतिशत कर छूट देने की सिफारिश की।
(vii) लाभ कमाने वाले सामाजिक संगठन भी सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज (SSE) पर सूचीबद्ध हो सकेंगे, किंतु उन्हें कुछ अधिक रिपोर्टिंग मानकों का पालन करना होगा।

(3) सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज की अवधारणा-

  • ‘‘सामाजिक स्टॉक एक्‍सचेंज’’ भारत में एक नवीन अवधारणा है।
  • इस स्टॉक एक्‍सचेंज पर सामाजिक उद्यमों और स्वैच्‍छिक संगठनों को सूचीबद्ध कराया जाएगा।
  • इसके माध्यम से सामाजिक उद्यमों में निवेश किया जा सकेगा।
  • इसके तहत सामाजिक संगठन इक्‍विटी और बॉण्ड और म्यूचुअल फंड की तरह यूनिट जारी कर कोष जुटा सकेंगे।
  • इसका उद्देश्य निजी एवं गैर-लाभकारी क्षेत्र को पूंजी की उपलब्धता में सुगमता प्रदान करने के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र का विकास करना है।
  • सामाजिक स्टॉक एक्‍सचेंज को पहले से स्थापित स्टॉक एक्‍सचेंज BSE अथवा NSE के अंतर्गत ही संचालित किया जाएगा।
  • जिससे सामाजिक स्टॉक एक्‍सचेंज मौजूदा स्टॉक एक्‍सचेंज की अवसंरचना के साथ-साथ इनके ग्राहक संबंध, निवेशक, परोपकारी, दानदाताओं तथा लाभकारी व गैर-लाभकारी संस्थाओं का लाभ प्राप्‍त हो सके।
  • ज्ञातव्य है कि सामाजिक स्टॉक एक्‍सचेंज ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, जमैका और केन्‍या में पहले से ही कार्य कर रहे हैं।
  • हालांकि सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज का उद्देश्य लाभ कमाना न होकर सामाजिक कल्‍याण करना होगा।

(4) सामाजिक स्टॉक एक्‍सचेंज का महत्‍व-

(i) भारत में एक संपन्‍न सामाजिक उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र है, परंतु फिर भी देश में अनेक संगठनों को स्वयं के लिए आवश्यक पंूजी को प्राप्‍त करने के लिए बहुत ही संघर्ष करना पड़ता है।

  • सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज एक ऐसा मंच प्रदान करने का प्रयास करेगा, जहां निवेशक स्टॉक एक्‍सचेंज द्वारा अधिकृत सामाजिक उद्यमों में निवेश करने में समर्थ हो सकेंगे।

(ii) इससे गैर-लाभकारी संस्थाएं तथा सामाजिक कल्‍याण संस्थाएं एक पारदर्शी इलेक्‍ट्रॉनिक प्‍लेटफाॅर्म पर सामाजिक पूंजी का लाभ प्राप्‍त कर सकेंगी।
(iii) सामाजिक स्टॉक एक्‍सचेंज के कार्यरत होने से गैर-लाभकारी क्षेत्र को एक अनुकूल वातावरण के साथ-साथ अपनी क्षमताओं का पूर्ण रूप से उपयोग करने का अवसर प्राप्‍त होगा।
(iv) इससे कोरोना-वायरस महामारी के कारण तबाह हुए रोजगार के साधनों का पुनर्निर्माण करने तथा कमजोर होती सामाजिक संरचना को मजबूत करने में सहायता प्राप्‍त हो सकेगी।
(v) भारत में सामाजिक पूंजी के निर्मित होने से लोग आत्‍मनिर्भर होंगे, जिससे सरकार पर रोजगार तथा अन्‍य सुविधाओं की उपलब्धता के लिए दबाव कम होगा।

(5) ‘‘सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज की आवश्यकता?

(i) संयुक्त राष्ट्र जैसे विभिन्‍न वैश्विक निकायों द्वारा निर्धारित मानव विकास लक्ष्यों (SDGs) को पूर्ण करने हेतु आने वाले वर्षों में भारत को बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी और यह मात्र सरकारी व्यय अथवा निवेश के जरिए नहीं किया जा सकता है।
(ii) सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाले निजी उद्यमों को भी अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
(iii) वर्तमान समय में, भारत में अनेक सामाजिक उद्यम कार्यशील हैं।

  • हालांकि उन्‍हें धन जुटाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • इन चुनौतियों में सबसे बड़ी चुनौती आम निवेशकों में विश्वास की कमी है।

(6) सामाजिक उद्यम

  • सामाजिक उद्यम (Social Enterprise) राजस्व निर्माण करने वाले व्यवसाय होते हैं, जिनका प्राथमिक उद्देश्य सामाजिक कल्‍याण तथा समाज सेवा करना होता है, लाभ कमाना नहीं।

जैसे- स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना, शिक्षा प्रदान करना, अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में कार्य करना आदि।

  • इसका अर्थ नहीं है कि एक सामाजिक उद्यम, अत्‍यधिक लाभदायक नहीं हो सकता है।
  • वास्तव में, अधिकांश सामाजिक उद्यम पारंपरिक व्यवसायों की तरह दिखते और संचालित होते हैं।
  • इनमें एकमात्र अंतर यह होता है कि इन संस्थाओं द्वारा उत्‍पन्‍न लाभ का उपयोग आवश्यक रूप से हितधारकों के भुगतान के लिए नहीं किया जाता है, इसके स्थान पर उनके सामाजिक कार्यक्रमों में पुनर्निवेश किया जाता है।
  • आगे की राह-

(i) भारत में बड़ी संख्या में सामाजिक उपक्रम कार्यशील हैं, जो कि बड़े स्तर पर सामाजिक कल्‍याण के कार्य में अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, किंतु इन संस्थाओं में कुप्रबंधन तथा अपारदर्शिता एक बड़ी समस्या है।
(ii) समाजसेवी संस्थाओं द्वारा सामाजिक स्टॉक एक्‍सचेंज के साथ दस्तावेजों को साझा करने में पारदर्शिता के साथ-साथ उनकी जवाबदेही को सुनिश्चित करने का प्रावधान किया जाना आवश्यक है, ताकि निवेशकों के अधिकार और हितों को संरक्षित किया जा सके।
(iii) आंकड़ों के अनुसार, भारत में दो मिलियन से भी अधिक सामाजिक उद्यम हैं।

  • अत: सामाजिक उद्यमों हेतु ‘सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज’ का निर्माण करते समय काफी सावधानीपूर्वक योजना के निर्माण की आवश्यकता है।

(iv) इस संदर्भ में, विश्व के अन्‍य देशों द्वारा प्रयोग किए जा रहे मॉडल का भी अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है ताकि उसे भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप परिवर्तित किया जा सके।

नोट:- भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India:SEBI)
स्थापना: ‘‘भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992’’ के प्रावधानों के तहत 12 अप्रैल, 1992 को।
मुख्यालय: मुबंई
इसके मुख्य कार्य निवेशकों के हितों को संरक्षित करना, प्रतिभूति बाजार को विनियमित करना, स्टॉक एक्‍सचेंज तथा स्टॉक ब्रोकर्स का नियमन करना एवं भेदिया कारोबार (इनसाइडर ट्रेडिंग) पर रोक लगाना आदि है।
नोट: SEBI की स्थापना 12 अप्रैल, 1988 को हुई तथा 30 जनवरी, 1992 को एक अध्यादेश के माध्यम से सांविधिक दर्जा प्रदान किया गया।

मुख्य परीक्षा हेतु प्रश्न-
कोरोना-वायरस महामारी से उत्‍पन्‍न चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को अपनी अर्थव्यवस्था के आधारभूत कार्मिकों की आजीविका को सुधारने तथा पुनर्निर्माण करने हेतु अत्‍यधिक सामाजिक पूंजी की आवश्यकता होगी। चर्चा कीजिए।
प्रीलिम्स प्रश्न-
सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
(i) सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज की अवधारणा भारत की देन है।
(ii) सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज का प्राथमिक उद्देश्य सामाजिक कल्‍याण करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्‍य है/हैं?
(a) केवल (i)
(b) केवल (ii)
(c) (i) और (ii) दोनांे
(d) न तो (i) और न ही (ii)
स्पष्टीकरण-उत्तर (b) केवल (ii)

  • भारत में सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज की अवधारणा पहली बार वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट में आया।
  • हालांकि, सोशल स्टॉक एक्‍सचेंज ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, जमैका और केन्‍या में पहले से ही कार्य कर रहे हैं। 
  • सोशल स्टॉक एक्‍सयेंज (SSE) का उद्देश्य लाभ कमाना न होकर सामाजिक कल्याण करना होगा।

शिशिर अशोक सिंह

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