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वैश्विक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट, 2021

Global Gender Gap Report, 2021

वर्तमान संदर्भ

  • हाल ही में, ‘‘विश्व आर्थिक मंच’’ (WEF) द्वारा 15वीं ‘‘वैश्विक लैगिंक अंतराल रिपोर्ट, 2021 ’’ जारी की है।

महत्‍वपूर्ण बिंदु
(1) रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • कुल 156 देशों के आंकड़ों का तुलनात्‍मक अध्ययन किया गया है।
  • लैगिंक समानता के मामले में शीर्ष 5 देश-

रैंक

देश

1

आइसलैंड

2

फिनलैंड

3

नाॅर्वे

4

न्‍यूजीलैंड

5

स्वीडन

  • लैंगिक समानता के मामले में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले तीन देश-

रैंक

देश

156

अफगानिस्तान

155

यमन

154

इराक

  • आइसलैंड को 12वीं बार विश्व में सर्वाधिक लैंगिक समता वाला देश घोषित िकया गया है।
  • सर्वाधिक लैंगिक समता वाले शीर्ष 10 देशों में अफ्रीकी देश रवांडा भी शामिल हैं।
  • आर्थिक प्रदर्शन के मामले में, कई देशों ने पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष की रैंकिंग में खराब प्रदर्शन किया है।
  • नवीनतम रिपोर्ट में, राजनीतिक सशक्तीकरण में लैंगिक अंतर सबसे अधिक रहा है।
  • संपूर्ण विश्व की 35,500 संसदीय सीटों में से मात्र 26.1 प्रतिशत पर महिलाओं का प्रतिनिधित्‍व रहा है।
  • कुल 3,400 मंत्रियों में से महिलाओं का प्रतिशत मात्र 22.6 प्रतिशत रहा है।
  • 15 जनवरी, 2021 तक, 81 देशों में कभी भी कोई महिला राष्ट्राध्यक्ष नहीं बनी हैं।
  • बांग्‍लादेश एकमात्र एेसा देश है, जहां पिछले 50 वर्षों के दौरान ‘‘राष्ट्राध्यक्ष’’ के रूप में पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने कार्य किया है
  • आर्थिक भागीदारी में सर्वाधिक लैंगिक अंतराल वाले देशों में ईरान, भारत, पाकिस्तान, सीरिया, यमन, इराक और अफगानिस्तान शामिल हैं।

(2) भारत संबंधी निष्कर्ष

(i) भारत वर्ष 2020की तुलना में 28 स्थानों की गिरावट के साथ 140वें स्थान पर पहुंच गया है।

  • वर्ष 2020 में 153 देशों की सूची में भारत 112वें स्थान पर था।

(ii) पड़ोसी देशों में स्थिति

  • भारत, दक्षिण एशिया में पाकिस्तान (153वें) और अफगानिस्तान (156वें) के बाद सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला देश है।
  • अपने पड़ोसी देशों बांग्‍लादेश (56वें), नेपाल (106वें), भूटान (130वें), श्रीलंका (116वें) और म्यांमार से नीचे स्थान पर है।

(iii) राजनीतिक सशक्तीकरण सूचकांक में भी, भारत के प्रदर्शन में 13.5 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई है।
(iv) शिक्षा प्राप्‍ति के सूचनांक में, भारत को 114वें स्थान पर रखा गया है।
(v) ‘‘स्वास्थ्य एवं जीवन रक्षा’ सूचनांक में भी भारत का प्रदर्शन खराब रहा है।
(vi) भारत में महिलाओं की अनुमानित उपार्जित आय, पुरुषों की आय के मात्र 5वें हिस्से के बराबर है, जिससे इस सूचकांक में भारत का स्थान, वैश्विक रूप से निचले 10 देशों के मध्य पहुंच गया है।

(3)‘‘वैश्विक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट’’

  • इस रिपोर्ट को पहली बार वर्ष 2006 में ‘विश्व आर्थिक मंच’ (WEF) द्वारा जारी किया गया था।
  • यह रिपोर्ट निम्नलिखित 4 आयामों के आधार पर विभिन्‍न देशों द्वारा लैंगिक समानता की दिशा में की गई प्रगति का मूल्‍यांकन किया जाता है-

(i) आर्थिक भागीदारी और अवसर
(ii) शिक्षा का अवसर
(iii) स्वास्थ्य एवं उत्तरजीविता
(iv) राजनीतिक सशक्तीकरण

  • सूचकांक में, उच्‍चतम स्कोर ‘1’ होता है, जो ‘‘समानता को प्रदर्शित करता है तथा निम्नतम स्कोर ‘0’ अर्थात ‘शून्‍य’ होता है, जो ‘‘असमानता’’ के स्तर को दर्शाता है।

(4) विश्व आर्थिक मंच (WEF)

  • इसकी स्थापना वर्ष 1971 में एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में हुई।
  • मुख्यालय : जेनेवा, स्विट्जरलैंड
  • यह सार्वजनिक-निजी सहयोग हेतु एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संगठन है।
  • WEF द्वारा प्रकाशित कुछ प्रमुख रिपोर्ट:-

(5) भारत के संदर्भ में लैंगिक विषमता के समांतर सवाल
(i) वर्ष 2006 में जब पहली बार यह रिपोर्ट जारी की गई थी, तब इस सूचकांक में भारत 98वें स्थान पर था।

  • अर्थात, लैंगिक समानता के मामले में पिछले डेढ़ दशक में भारत की स्थिति लगातार खराब होती गई है।
  • राजनीतिक क्षेत्र में स्त्री-पुरुष समानता के मामले में भारत का स्थान 91वां है।
  • विश्व आर्थिक मंच (WEF) का कहना है कि राजनीतिक क्षेत्र में लैंगिक समानता स्थापित करने में भारत को अभी एक सदी से ज्‍यादा वक्त लगेगा।

(ii) विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लैंगिक असमानता भी 63 प्रतिशत से ज्‍या़दा है।

  • लैंगिक असमानता न केवल महिलाओं के विकास में बाधा पहुंचाती है, बल्‍कि राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी प्रभावित करती है।
  • आमतौर पर असंतुलित लिंगानुपात, पुरुषों के मुकाबले साक्षरता और स्वास्थ्य सुविधाओं का निम्न स्तर पारिश्रमिक में लैंगिक विषमता जैसे कारक समाज में स्त्रियों की कमतर स्थिति को दर्शाते हैं।
  • स्त्रियों को समाज में उचित स्थान न मिले तो एक देश पिछड़ेपन का शिकार हो सकता है।
  • यदि समाज में लैंगिक भेदभाव खत्‍म नहीं किया गया तो संयुक्त राष्ट्र के वर्ष 2030 के सतत विकास लक्ष्यों के मूल में निहित महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता के लक्ष्य की प्राप्‍ति में हम पिछड़ जाएंगे।

(iii) किसी भी समाज में लैंगिक असमानता लोगों की मानसिकता में बदलाव लाकर ही दूर की जा सकती है।

  • मिजोरम और मेघालय इसके उदाहरण हैं, जहां बिना किसी भेदभाव के महिलाओं को समान रूप से काम दिया जाता है।

(iv) लैंगिक भेदभाव खत्‍म करने के मामले में हम अपने पड़ोसी देशों जैसे बांग्‍लादेश, श्रीलंका, नेपाल और भूटान से पीछे हैं।

  • जबकि देश में लैंगिक विषमता खत्‍म करने के सरकारी स्तर पर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं।
  • सैनिक स्कूलों में लड़कियों के प्रवेश का फैसला भी ऐतिहासिक और क्रांतिकारी है।
  • केरल के कोझीकोड में चौबीस एकड़ परिसर में बना जेंडर पार्क में महिला सशक्तीकरण से संबंधित नीतियां, योजनाएं और कार्यक्रम बनाए जाएंगे।
  • राजस्थान में जयपुर जिला प्रशासन ने ‘‘घूंघट मुक्त जयपुर’ नामक जागरूकता अभियान शुरू किया।

(v) विश्व बैंक के ‘महिला कारोबार और कानून, 2021’ रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में केवल 10 देशों में ही महिलाओं को पूर्ण अधिकार मिला है।

  • भारत सहित सर्वेक्षण में शामिल बाकी 180 देशों में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार और कानूनी सुरक्षा पूर्ण रूप से अभी तक नहीं मिल पाए हैं।
  • इस रिपोर्ट में भारत 190 देशों की सूची में 123वें स्थान पर है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत कुछ मामलों में महिलाओं को पूर्ण अधिकार तो देता है, लेकिन समान वेतन, मातृत्‍व, उद्यमिता,संपत्ति और पेंशन जैसे मामलों में लैंगिक भेदभाव को खत्‍म करने के लिए कड़े प्रयत्‍न करने होंगे।
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का एक अध्ययन बताता है कि अगर भारत में महिलाओं को श्रमबल में बराबरी हो जाए, तो सकल घरेलू उत्‍पाद (GDP) में 27 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है।

(vi) ‘‘लिक्‍डन अपार्च्युनिटी सर्वे-2021 के अनुसार भारत में 73 प्रतिशत मानती हैं कि उन्‍हें पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलता है, जबकि 22 प्रतिशत महिलाओं का कहना है कि उन्‍हें पुरुषों की तुलना में वरीयता नहीं दी जाती है।

  • महिला सशक्तीकरण के लिए इस तरह के आर्थिक भेदभाव मिटाने होंगे।

(vii) आइसलैंड की सरकार ने कानून बना कर एक ही काम के लिए किसी महिला को कम और पुरुष को ज्‍यादा वेतन देने की प्रथा को अवैध घोषित कर दिया है।

  • भारत सहित अन्‍य देशों को आइसलैंड से सीखना चाहिए।
  • रवांडा दुनिया का पहला ऐसा देश है, जिसकी संसद में 64 प्रतिशत महिलाएं हैं।
  • भारतीय संसद में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी केवल 14.4 प्रतिशत है।
  • संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का बिल अभी भी अधर में लटका हुआ है।
  • भारत को इस दिशा में अभी लंबा सफर तय करना होगा।

आगे की राह-
लिंग असमानता को कम करने के लिए निम्नलिखित कुछ कदमों पर अमल करने की आवश्यकता है-

(i) समान वेतन पर वास्तविक प्रगति करना और कार्यस्थल में लिंग अंतर को कम करना।
(ii) कार्यस्थल में हिंसा और यौन-उत्‍पीड़न को रोकना।
(iii) लड़कियों और महिलाओं को चुनौतियों को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित करना।
(iv) सटीक ऑनलाइन यौन-शिक्षा और यौन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार।
(v) लोगों की महिलाओं के प्रति रूढ़िवादी और अतिवादी विचारधाराओं में परिवर्तन के लिए जागरूकता अभियान चलाना।
(vi) महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना।

सं. शिशिर अशेक सिंह

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