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वैश्विक नवाचार साझेदारी

global innovation partnership

वर्तमान संदर्भ

  • 5 मई, 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और ब्रिटेन के बीच ‘‘वैश्विक नवाचार साझेदारी’’ (GIP) संबंधी सहमति-पत्र (MoU) को मंजूरी प्रदान कर दी, जो पूर्व रूप से प्रभावी होगी।
  • यह समझौता-ज्ञापन भारतीय विदेश मंत्रालय और ‘‘ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय’’ के बीच हुआ है।

महत्‍वपूर्ण बिंदु्‍
पृष्ठभूमि-

  • हाल ही में, भारत के प्रधानमंत्री और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के बीच एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।
  • इसे ‘‘भारत-यूनाइटेड किंगडम वर्चुअल शिखर सम्मेलन’’ (India-United Kingdom Virtual Summit) नाम दिया गया।

वर्चुअल शिखर सम्मेलन की मुख्य बातें
(i) रोडमैप 2030

  • एक महत्‍वाकांक्षी ‘‘रोडमैप 2030’’ को अपनाया गया, ताकि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाकर ‘‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’’ (Comprehensive Strategic Partnership) का रूप दिया जा सके।
  • यह रोडमैप स्वास्थ्य, जलवायु, व्यापार, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा रक्षा क्षेत्र में ब्रिटेन-भारत संबंधों के लिए एक रूपरेखा प्रदान करेगा।

(ii) दोनों देश मौजूदा वैक्‍सीन साझेदारी (Vaccines Partnership) को बढ़ाने पर सहमत हुए।

(iii) उन्‍नत व्यापार साझेदारी (ETP)

  • व्यापार की संभावनाओं को उन्‍मुक्त करने के साथ-साथ वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार (भारत-ब्रिटेन) को दोगुना से भी अधिक करने के महत्‍वाकांक्षी लक्ष्य के लिए ‘‘उन्‍नत व्यापार साझेदारी’’ (ETP) का शुभांरभ किया जाएगा।
  • भारत और ब्रिटेन के एक ‘‘अंतरिम व्यापार समझौते’’ पर विचार करने सहित एक व्यापक ‘‘मुक्त व्यापार समझौते’’ (Free Trade Agreement) पर बातचीत करने पर सहमति जताई है।

(iv) भारत और ब्रिटेन ने ‘‘प्रवासन एवं आवाजाही साझेदारी’’ (Migration and Mobility Partnership) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच विद्यार्थियों और कामगारों की आवाजाही के लिए और भी अधिक अवसर सुलभ कराना तथा अवैध आव्रजन को कम करना है।

(v) वैश्विक नवाचार साझेदारी (GIP)

  • इसका उद्देश्य चुनिंदा विकासशील देशों को समावेशी भारतीय नवाचारों का हस्तांतरण करने में आवश्यक सहयोग प्रदान करना है। इस दिशा में शुरुआत अफ्रीका से होगी।
  • ब्रिटेन, अनुसंधान और नवाचार सहयोग में भारत का दूसरा सबसे बड़ा भागीदार है।

(vi) अन्‍य क्षेत्रों में सहयोग

  • ब्रिटेन, भारत के स्वदेशी ‘‘लाइट काॅम्बैट एयरक्राफ्ट मार्क 2’’ (Light Combat Aircraft Mark 2) के विकास में सहायता करेगा।
  • समुद्री क्षेत्र में जागरूकता पर सहयोग
  • दोनों देशों ने अनुसंधान, क्षमता निर्माण, औद्योगिक सहयोग, रक्षा, अंतरिक्ष और साइबर जैसे क्षेत्रों में नए औद्योगिक सहयोग पर चर्चा की।

(2) वैश्विक नवाचार साझेदारी (GIP) का महत्‍व

(i) GIP भारतीय अन्‍वेषकों को अन्‍य देशों में अपने नवाचार का विकास करने में मदद करेगी।

  • इससे नए बाजार मिलेंगे और अन्‍वेषक आत्‍मनिर्भर बनेंगे।

(ii) बुनियादी वित्तपोषण, अनुदान, निवेश और तकनीकी सहयोग के जरिए यह साझेदारी भारतीय उद्यमियों और अन्‍वेषकों की सहायता करेगी।
(iii) GIP‍, नवाचार सतत विकास लक्ष्य संबं‍धी सेक्‍टरों पर फोकस करेगा, जिससे लाभार्थी देश अपने-अपने सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्‍त कर सकें।
(iv) GIP से खुला और समावेशी ई-बाजार भी विकसित होगा, जिससे बाजारों के बीच नवाचार का अंतरण होगा।

  • इससे इस दिशा में किए जाने वाले प्रयासों का लगातार आकलन करने में मदद मिलेगी तथा पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रोत्‍साहन मिलेगा।

(v) GIP के तहत चुने गए नवाचार सतत विकास लक्ष्य (SDG) प्राप्‍त करने में तेजी लाएंगे और निचले पायदान पर खड़ी आबादी को लाभ मिलेगा।

आगे की राह

(i) भारत वैश्विक दौड़ में महाशक्ति बनने के लिए नए भागीदारों की तलाश कर रहा है। ऐसे समय और स्थिति दोनों देशों के पास शिक्षा, अनुसंधान, नागरिक समाज और रचनात्‍मक क्षेत्र में सहयोग करके अपने रिश्तों को मजबूती प्रदान करने का उपयुक्त अवसर है।
(ii) ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग होने से हुए वाणिज्‍यिक नुकसान की भरपाई भारत के कुशल श्रम, तकनीकी सहायता और व्यवसायिक बाजार के माध्यम से कर सकता है।
(iii) कोविड-19 महामारी से निपटने में दाेनों देश एक-दूसरे की और साथ ही विश्व के अन्‍य देशों की सहायता में रणनीतिक भूमिका निभा सकते हैं।

Note- भारत-ब्रिटेन के मध्य सैन्‍य अभ्यास
(i) वायु सेना का अभ्यास : ‘इंद्रधनुष’’
(ii)    सैन्‍य अभ्यास : ‘अजेय वारियर’’
(iii)   नौसेना अभ्यास : ‘कोंकण’’

सं. शिशिर अशोक सिंह

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