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विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक, 2021

वर्तमान संदर्भ

  • 20 अप्रैल, 2021 को मीडिया निगरानी समूह, ‘‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’’ (RSF) द्वारा ‘‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’’ (World Press Freedom Index, 2021) प्रकाशित की गई है।

महत्‍वपूर्ण बिंदु
विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक, 2021 से संबंधित मुख्य
निष्कर्ष-

(i) शीर्ष रैंकिंग वाले पांच देश

रैंकिंगदेश
  1नार्वे
  2फिनलैंड
  3स्वीडन
  4डेनमार्क
  5कोस्टरिका

(ii) सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले पांच देश

रैंकिंगदेश
  176जिबूती (Djibouti)
  177चीन
  178तुर्कमेनिस्तान
  179उत्तरी-कोरिया
  180इरीट्रिया

(iii) भारत का प्रदर्शन

  • भारत 180 देशों की सूची में 142वें स्थान पर है।
  • भारत वर्ष 2020 में भी 142वें स्थान पर था।

(iv) भारत के पड़ोसी देशों का प्रदर्शन

पड़ोसी देशरैंकिंग
भूटान65
नेपाल106
श्रीलंका127
म्यांमांर140
पाकिस्तान145
बांग्‍लादेश152
चीन177

Note- ब्रिक्‍स देश

देशरैंक
दक्षिण अफ्रीका32
     ब्राजील111
     भारत142
     रूस150
     चीन177
  

(v) कुछ अन्‍य महत्‍वपूर्ण तथ्य

  • नाॅर्वे लगातार पांच वर्षों से शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। Æ इस सूचकांक में विश्व के कुल 180 देशों को रैंकिंग प्रदान की गई है।
  • पत्रकारिता सूची में शामिल लगभग 73 प्रतिशत देश स्वतंत्र मीडिया से पूरी तरह से या आंशिक रूप से अवरुद्ध हैं।
  • सूचकांक के अनुसार, 180 देशों में से केवल 12 (7%)में पत्रकारिता के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने का दावा किया जा सकता है
  • रिपोर्ट में 132 देशों को ‘बहुत खराब’, ‘खराब’ या ‘समस्याग्रस्त’ के समूह में श्रेणीबद्ध किया गया है।
  • भारत को ब्राजील, मेक्‍सिको और रूस के साथ ‘खराब’ श्रेणी में रखा गया है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है, कि पत्रकारों को ‘अभिगम्यता’ (access) प्रदान करने से वंचित करने और कोविड-19 प्रकोप के बारे में सरकार द्वारा प्रयोजित अधिप्रचार को बढ़ावा देने के लिए, महामारी का उपयोग किया गया है।
  • रिपोर्ट में मुख्य रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बारे में चिंता व्यक्त की गई है।
  • क्‍योंकि प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के प्रयास में कई राष्ट्रों ने ‘‘राजद्रोह’’, ‘‘राष्ट्र की गोपनीयता’’ और ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा’’ पर कठोर कानून बनाए हैं।

(2) भारत के प्रदर्शन का विश्लेषण और खराब प्रदर्शन का कारण

  • वर्ष 2016 में भारत 133वें स्थान पर था, तब से लगातार फिसलते हुए वर्ष 2020 एवं वर्ष 2021 में 142वें स्थान पर पहुंच गया है।
  • भारत पत्रकारिता के लिए ‘‘खराब’’ वर्गीकृत देशों में से है और पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देशों में से एक के रूप में जाना जाता है।
  • जो अपना काम सही ढंग से करने का प्रयास कर रहे हैं।
  • रिपोर्ट में, ‘‘सरकार की आलाेचना करने का साहस करने वाले पत्रकारों के खिलाफ’’ ‘‘सोशल मीडिया पर बेहद हिंसक नफरत फैलाने वाले अभियान’’ चलाए जाने पर, भारत की कड़ी आलोचना की गई है।
  • रिपोर्ट ने चर्चित पत्रकारों के लिए राष्ट्रवादी सरकार द्वारा बनाए गए भयमुक्त वातावरण को जिम्मेदार ठहराया है, जो अक्‍सर उन्‍हें राज्‍य विरोधी या राष्ट्र विरोधी करार देता है।
  • कश्मीर की स्थिति चिंताजनक है,जहां पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों द्वारा पत्रकारों के उत्‍पीड़न की घटनाएं लगातार उजागर होती रहती हैं।

(2) खराब प्रदर्शन का कारण-

(i) साेशल मीडिया प्‍लेटफार्मों के माध्यम से सरकार की आलोचना करने और कमियों को उजागर करने वाले पत्रकारों के विरुद्ध घृणा अभियान चलाया जाना।
(ii) पत्रकारों के विरुद्ध पुलिस हिंसा, राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा घात, और आपराधिक समूहों या भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों द्वारा उकसाए जाने वाले विद्रोह।
(iii) महिला पत्रकारों की स्थिति में घृणा अभियान और हमले अधिक गंभीर हो जाते हैं।

(3) ‘‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’’ के बारे में

  • यह सूचकांक वर्ष 2002 से प्रतिवर्ष ‘‘रिपोर्टर्स सं‍स फ्रंटियर्स’’ (RSF) या ‘‘रिपोर्टर्स विदाउट बाॅर्डर्स’’ द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
  • ‘‘रिपोर्टर्स विदाउट बाॅर्डर्स’’ पेरिस (फ्रांस) स्थित एक गैर-सरकारी (NGO), गैर-लाभकारी संगठन है, जो प्रेस की स्वतंत्रता की वकालत करता है, जिसकी स्थापना वर्ष 1985 में की गई थी।
  • यह सार्वजनिक हित में संयुक्त राष्ट्र, यूनेस्को, यूरोपीय परिषद, फ्रैंकोफोनी के अंतरराष्ट्रीय संगठन (OIF) और मानव अधिकारों पर अफ्रीकी आयोग के साथ सलाहकार की भूमिका निभाता है।
  • OIF 54 फ्रेंच भाषी राष्ट्रों का एक समूह है।
  • यह सूचकांक निम्नलिखित के आकलन के आधार पर तैयार किया जाता है-
  • मीडिया में बहुलवाद का स्तर
  • मीडिया के लिए वातावरण और स्वयं-सेंसरशिप
  • मीडिया को प्राप्‍त आजादी
  • पत्रकारों की सुरक्षा
  • कानूनी ढांचा
  • पारदर्शिता
  • समाचारों और सूचनाओं के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता
  • इत्‍यादि।
  • सूचकांक में, प्रत्‍येक क्षेत्र में मीडिया स्वतंत्रता के उल्‍लंघन स्तर संबंधी संकेतक भी शामिल होते हैं।
  • इस सूचकांक, को विश्व भर के विशेषज्ञों द्वारा 20 भाषाओं में तैयार की गई एक प्रश्नावली के माध्यम से संकलित किया जाता है।
  • इस गुणात्‍मक विश्लेषण को आकलन-अवधि के दौरान पत्रकारों के खिलाफ हुई हिंसा तथा दुर्व्यवहार संबंधी मात्रात्‍मक आंकड़ों के साथ संयोजित किया जाता है।
  • यह सूचकांक पत्रकारों के लिए उपलब्ध स्वतंत्रता के स्तर के अनुसार 180 देशों और क्षेत्रों को रैंक प्रदान करता है।
  • यह सार्वजनिक नीतियों की रैंकिंग नहीं करता है, भले ही सरकारें स्पष्ट रूप से अपने देश की रैंकिंग पर एक बड़ा प्रभाव डालती है।
  • हालांकि यह पत्रकारिता की गुणवत्ता का सूचक नहीं है।

प्रश्न:- ‘‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
(i) वर्ष 2016 से भारत के प्रदर्शन में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
(ii) यह पत्रकारिता की गुणवत्ता का सूचक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल (i) (b) केवल (ii)
(c) (i) और (ii) दोनों (d) न तो (i), न ही (ii)
स्पष्टीकरण- उत्तर- (a) केवल (i)
भारत वर्ष 2016 में 133वें स्थान पर था और तब से वह फिसल रहा है।

वर्ष  2017       :136वां
     वर्ष 2018   :138वां
     वर्ष 2019   :140वां
     वर्ष 2020 :142वां
     वर्ष 2021  :142वां
  
  • यह प्रेस की स्वतंत्रता का सूचक है न कि पत्रकारिता की गुणवत्ता का सूचक है।

सं. शिशिर अशोक सिंह

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