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वरासत अभियान

varasat abhiyan
  • वर्तमान परिदृश्य
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 15 दिसंबर‚ 2020 को वरासत अभियान शुरू किया गया।
  • यह अभियान 15 दिसंबर‚ 2020 से 15 फरवरी‚ 2021 तक चालाया जाएगा।
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गांवों में उत्तराधिकार को लेकर उपजे भूमि विवादों को खत्म करने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है।
  • इस अभियान को तहसील और जिला स्तर पर संपत्ति से संबंधित मुकदमों पर अंकुश लगाने हेतु शुरू किया गया है।
  • इस अभियान से जमीन और संपत्ति को लेकर लंबे समय से चले आर रहे विवाद खत्म होंगे।
  • साथ ही विवादित संपत्तियों को निशाना बनाने वाले भू-माफिया द्वारा ग्रामीणों के शोषण पर रोक लगाई जाएगी।
  • इस अभियान के दौरान उत्तर प्रदेश के लगभग 108000 राजस्व गांवों में वर्षों से लंबित वरासत संबंधित मामलों का निस्तारण किया जाएगा।
  • ‘वरासत अभियान’ की प्रमुख विशेषताएं
  • इस अभियान के अंतर्गत यदि किसी कारणवश खतौनी के उत्तराधिकारी का नामांतरण नहीं होता है‚ तो वह ऑनलाइन नामांतरण कर सकता है।
  • ऑनलाइन नामांतरण राजस्व परिषद के लिंक पर जाकर अपना मोबाइल नंबर अंकित करके किया जा सकता है।
  • यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहा है‚ तो क्षेत्रीय लेखपाल को सूचित करने पर‚ लेखपाल द्वारा अपनी लॉग-इन आईडी से उत्तराधिकार व वरासत संबंधी विवरण भरा जाएगा।
  • दो माह तक चलने वाले इस अभियान को कई चरणों में बांटा गया है।
  • 15-30 दिसंबर‚ 2020 तक
  • राजस्व विभाग से संबंधित अधिकारियों द्वारा ग्रामों में प्रचार-प्रसार किया जाएगा‚
  • तथा खतौनियों को पढ़ा जाएगा और लेखपाल द्वारा ऑनलाइन वरासत प्रार्थना-पत्र भरा जाएगा।
  • 31 दिसंबर‚ 2020 से 15 जनवरी‚ 2021 तक लेखपाल द्वारा ऑनलाइन जांच की प्रक्रिया की जाएगी।
  • 16-31 जनवरी‚ 2021 तक राजस्व निरीक्षक द्वारा नामांतरण आदेश को संबंधित रजिस्टर में दर्ज करके खतौनी की प्रविष्टियों को अपडेट करेगा।
  • 1-15 फरवरी‚ 2021 तक यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शेष सभी विवादित उत्तराधिकार संबंधित मामलों का प्रकरण दर्ज कर लिया जाए।
  • वरासत अभियान की आवश्यकता क्यों?
  • राज्य के हर जिलों में तहसील दिवस पर सर्वाधिक ग्राम भू-विवाद संबंधित मामले आते हैं।
  • पुलिस के द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों में सर्वाधिक भूमि विवाद से जुड़े मामले दर्ज हैं।
  • अन्य तथ्य
  • ‘वरासत अभियान’ संबंधित शिकायत हेतु ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरह की सुविधाएं दी गई हैं।
  • इस अभियान के लिए सरकार द्वारा हेल्पलाइन नंबर 0522-2620477 जारी किया गया है।

सं. प्रशान्त सिंह