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राइनो के संरक्षण हेतु भारत के प्रयास

वर्तमान संदर्भ

  • मार्च, 2021 में असम में एक सींग गैंडा मुख्य राजनीतिक मुद्दा बन गया जिसके संरक्षण की बात बोकाखात और कालियाबोट विधानसभा के प्रत्याशी एवं राजनीतिक दल करने लगे।
  • यह मुद्दा असम विधानसभा चुनाव का एक गर्म मुद्दा (Hot Issue) भी बन गया है।

एक सींग वाले गैंडे

  • गैंडों की पांच विभिन्‍न प्रजातियां हैं। एक सींग वाला गैंडा उनमें से एक है।
  • मलेशिया की एक विलुप्‍त प्रजाति सुमावन राइनो है।
  • ब्लैक राइनो अफ्रीका की दो छोटी प्रजातियां हैं।
  • जावा राइनो आई.यू.सी.एन. की रेड लिस्ट में गंभीर रूप से संकटग्रस्त एक प्रजाति है।
  • व्हाइट राइनो की दो उप प्रजातियां है। उत्तरी एवं दक्षिणी जो अफ्रीका में पाई जाती हैं जिसमें उत्तरी व्हाइट राइनो गंभीर रूप से संकट ग्रस्त है।

भारत में गैंडा

  • भारत में केवल एक सींग वाला गैंडा पाया जाता है।
  • भारतीय गैंडा राइनो प्रजाति में सबसे बड़ा है।
  • भारतीय गैंडा एक काली सींग और त्‍वचा की सिलवटों के साथ भूरे रंग के होते हैं।

आवास

  • यह प्रजाति असम, उत्तरी पश्चिमी बंगाल और भारत-नेपाल तराई क्षेत्र तक सीमित है।
  • भारत में गैंडे मुख्य रूप से तीन राज्‍यों असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं।

असम में चार संरक्षित क्षेत्र :

  • पोबितोरा वन्‍यजीव अभयारण्य
  • राजीव गांधी ओरंग नेशनल पार्क
  • काजीरंगा नेशनल पार्क
  • मानस राष्ट्रीय उद्यान
  • इन चार संरक्षित क्षेत्रों में गैंडों की संख्या 2640 है, जिसमें लगभग 2400 गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व में हैं।

खतरा

  • पर्यावास की हानि
  • घटती अनुवांशिक विविधता
  • सींगों के लिए अवैध शिकार

सुरक्षा की स्थिति

  • ICUN रेड लिस्ट में सुभेद CITES के तहत परिशिष्ट-I में हैं जिसके तहत इस बार लुप्‍त होने का खतरा है। इसलिए इसका अंतराराष्ट्रीय व्यापार प्रतिबंधित है सिर्फ वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए इसका आयात संभव है।
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम,1972 की अनुसूची II में शामिल हैं।

भारत द्वारा संरक्षण के प्रयास

  • वर्ष 2019 में राइनो रेंज के पांच देशों (भारत, भूटान, नेपाल, इंडोनेशिया और मलेशिया) ने इन प्रजातियों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए ‘न्‍यू डेल्‍ही डिक्‍लेरेशन ऑन एशियन राइनोज’ के अंतर्गत हस्ताक्षर किए हैं।
  • वर्ष 2019 में बड़े सींग वाले गैंडों के संरक्षण के लिए ‘राष्ट्रीय राइनो संरक्षण नीति’ शुरू की गई।
  • वर्ष 2005 में शुरू की गई ‘भारतीय राइनो विजन 2020’ जिसके अंतर्गत असम के सात संरक्षित क्षेत्रों में इनकी संख्या 3,000 से अधिक करना था।
  • पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) ने देश में सभी गैंडो के डीएनए प्रोफाइल बनाने के लिए एक परियोजना शुरू की है।

निष्कर्ष

  • गैंडों के अवैध शिकार की रोकथाम के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता है। जिन्‍हें कुछ ऐसे अधिकार देने चाहिए जो वे गैंडों की अवैध तस्करी के विरुद्ध तत्‍काल प्रभाव से लागू कर सकें।
  • आधुनिक सूचना एवं सं‍चार तंत्र को सुदृढ़ कर उनके आवासीय स्थलों पर निगरानी रखी जाए।

सं. दीपक पांडेय

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