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मैरीटाइम इंडिया समिट, 2021

  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 2 मार्च, 2021 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्‍फ्रेंस माध्यम से मैरीटाइम इंडिया शिखर सम्मेलन, 2021 (Martime India Summit, 2021: MIS. 2021) का उद् घाटन किया।
  • 2 मार्च से 4 मार्च, 2021 तक यह सम्मेलन आयोजित किया गया।
  • इस सम्मेलन का आयोजन जहाजरानी मंत्रालय (Ministry of Ports, Shipping and Waterways) द्वारा किया गया।
  • मुख्य बिन्‍दु
  • फोकस क्षेत्र
  • लगभग 7516 किलो मीटर लंबी समुद्र तटरेखा के साथ बंदरगाह के विकास को आगे बढ़ाना।
  • वर्ष 2035 तक सागरमाला कार्यक्रम के तहत बंदरगाह परियोजनाओं में 82 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया जाएगा।
  • जलमार्गों को विकसित करने तथा प्रकाश-स्तंभोें के आस-पास पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • समुद्री क्षेत्र में स्वच्‍छ नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • बुनियादी ढांचे के उन्‍नयन तथा ईज ऑफ डूईंग बिजनेस को बढ़ावा देने जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत का लक्ष्य ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ के विजन को मजबूत करना है।
  • वर्ष 2030 तक 23 जलमार्गों का परिचालन करना है।
  • इस समिट में ‘‘मैरीटाइम इंडिया विजन, 2030 ’’ ई-बुक का लोकार्पण किया गया।
  • इस ई-बुक का उद्देश्य अगले 10 वर्षों मंे भारतीय मैरीटाइम उद्योग को विश्व के शीर्ष मानकों के समकक्ष लाना है।
  • वर्तमान में भारतीय बंदरगाहों की स्थिति एवं उनका उन्‍नयन
  • भारत के पश्चिम और पूर्वी तट पर 12 प्रमुख बंदरगाह और कई अन्‍य छोटे बंदरगाह स्थित हैं।
  • भारत के 12 प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता वर्ष 2014 में प्रतिवर्ष 870 मिलियन टन थी, जिसे वर्ष 2021 में बढ़ाकर अब प्रतिवर्ष 1550 मिलियन टन कर दिया गया है।
  • भारतीय बंदरगाहों मंे अब डाइरेक्‍ट पोर्ट डिलीवरी, डाइरेक्‍ट पोर्ट एंट्री और उन्‍नत (Upgraded) पोर्ट कम्युनिटी सिस्टम (Port Community System: PCS) जैसे उपाय किए गए हैं, जो बंदरगाहों पर मालवाहक जहाजों के प्रवेश तथा निकासी में लगने वाले समय को कम करने में सहायक है।
  • इसके अलावा, भारतीय बंदरगाहों में आने वाली और बाहर जाने वाली कार्गो के लिए प्रतीक्षा समय कम कर दिया गया है।
  • विश्वस्तरीय अवसंरचना के साथ वधावन, पारादीप और कांडला में दीनदयाल बंदरगाह मेगा बंदरगाह के रूप में विकसित किए जा रहे हैं।
  • नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) व बंदरगाह विकास के क्षेत्र में अन्‍य पहलें
  • घरेलू जलमार्ग माल ढुलाई के लिए सस्ते और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन साधन होते हैं।
  • भारत सरकार का वर्ष 2030 तक 23 जलमार्गों को चालू करने का लक्ष्य है।
  • इसके अतिरिक्‍त, सरकार द्वारा कोच्‍चि, मुंबई, गुजरात और गोवा जैसे प्रमुख राज्यों और शहरों मंे शहरी जल परिवहन प्रणालियां शुरू करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
  • मैरीटाइम इंडिया समिट, 2021 के अवसर पर मर्केंटाइल मैरीन डोमेन जागरूकता केंद्र की भी शुरुआत की गई।
  • यह समुद्री सुरक्षा, खोज और बचाव क्षमताओं तथा सुरक्षा व समुद्री पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु एक सूचना प्रणाली है।
  • वर्ष 2022 तक दोनों तटों (पश्चिम व पूर्वी) पर जहाजों की मरम्मत करने वाले कलस्टरों को विकसित किया जाएगा।
  • भारत सरकार के शिपिंग मंत्रालय ने 8 नवम्बर, 2020 को बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय का नया नाम देकर समुद्री क्षेत्र के दायरे का विस्तार किया है, ताकि इस क्षेत्र में समग्रता से विकास हो सके।
  • बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने लगभग 400 निवेश योग्य परियोजनाओं की एक सूची तैयार की है। इन परियोजनाओं में 31 बिलियन डॉलर या 2.25 लाख करोड़ रुपये की निवेश क्षमता है।
  • ‘वेल्‍थ फ्रॉम वेस्ट’ के सृजन हेतु घरेलू जहाज रिसाइक्‍लिंग उद्योग (Shipping Recycling Industry) को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
  • भारत ने जहाज रिसाइक्‍लिंग अधिनियम, 2019 को लागू किया है और हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय कन्‍वेंशन के बारे में सहमति व्यक्‍त की हैै।
  • भारत सरकार देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर सौर और पवन आधारित विद्युत प्रणाली स्थापित करने की प्रक्रिया में है।
  • सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सभी भारतीय बंदरगाहों पर तीन चरणों में कुल ऊर्जा में 60 प्रतिशत से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना है।
  • भारत द्वीपीय बुनियादी ढांचे और परितंत्र (ecosystem) के समग्र विकास पर ध्यान दे रहा है।
  • आगे की राह-
  • भारत द्वारा इस समिट के माध्यम से बंदरगाहों के सर्वांगीण विकास से लेकर नीली अर्थव्यवस्था के सभी आयामों पर ध्यान दिया गया है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत के विकास में तटीय राज्यों की भूमिका और व्यापक हो साथ ही, संसाधनों के स्थलीय और समुद्री दोनों रूपों का व्यापक उपयोग लिया जा सके।

लेखक-आदित्‍य भारद्वाज