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भारत-मालदीव : खेल और युवा मामलों में सहयोग पर आपसी सहमति

India-Maldives: Mutual agreement on cooperation in sports and youth affairs

वर्तमान परिदृश्य

  • 16 मार्च, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और मालदीव के बीच खेल और युवा मामलों में सहयोग पर समझौता ज्ञापन (Mov) पर अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

पृष्ठभूमि

  • खेल और युवा मामलों मंे सहयोग पर समझौता-ज्ञापन पर नवंबर, 2020 में हस्ताक्षर किए गए थे। इसके लिए भारत के युवा मामलों और खेल मंत्रालय तथा मालदीव के युवा, खेल और सामुदायिक अधिकारिता मंत्रालय के बीच हस्ताक्षर किए गए थे।

उद्देश्य

  • इस समझौता-ज्ञापन से दोनों देशों के बीच खेल विज्ञान, खेल ओषधि, कोचिंग तकनीक, युवा महोत्‍सव तथा कैंपस में भागीदारी के क्षेत्र में ज्ञान और विशेषज्ञता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

लाभ

  • इससे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर होगा तथा द्विपक्षीय सहयोग का लाभ समान रूप से सभी खिलाड़ियों को मिलेगा, चाहे वे किसी भी जाति, संप्रदाय, क्षेत्र और लिंग के हों।

महत्‍वपूर्ण िंबंदु

  • वर्ष 1965 में मालदीव को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिलने के पश्चात भारत पहला ऐसा देश था, जिसने मालदीव की स्वतंत्रता को मान्‍यता दी थी।
  • इसी के पश्चात भारत और मालदीव के मध्य द्विपक्षीय (सांस्कृतिक, आर्थिक, रणनीतिक तथा सैन्‍य) संबंध स्थापित हुए।
  • भारत ने वर्ष 1972 में अपना राजनयिक मिशन मालदीव की राजधानी माले में स्थापित किया।
  • दोनों देशों के मध्य दिसंबर, 1976 में समुद्री सीमा संधि पर हस्ताक्षर तथा वर्ष 1982 में एक व्यापक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
  • भारत और मालदीव दोनों देश सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) के सदस्य तथा दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार समझौता के हस्ताक्षरकर्ता हैं।
  • ध्यातव्य है कि वैश्विक स्तर पर फैली महामारी के दौरान भारत ने मालदीव को मई माह में 580 टन खाद्य पदार्थ सहित अन्‍य आवश्यक खाद्य तथा निर्माण सामग्री की आपूर्ति की थी।

अन्‍य महत्‍वपूर्ण बिंदु

Note- मालदीव जनसंख्या और क्षेत्रफल दोनों ही दृष्टि से एशिया महाद्वीप का सबसे छोटा देश है।

निष्कर्ष-

  • भारत के लिए हाल के वर्षों में मालदीव की सामरिक अहमियत बढ़ी है, क्‍योंकि मालदीव में चीन का प्रभाव तीव्र गति से बढ़ रहा है। इस समझौते से भारत और मालदीव के द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। परिणामस्वरूप, मालदीव की धरती को भारत विरोधी गतिविधियों हेतु प्रयोग से रोका जा सकेगा।

सं. अरविन्‍द कुमार पांडेय

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