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‘‘बाल श्रम: वैश्विक अनुमान 2020’’ प्रवृत्तियां एवं भविष्य की दिशाएं

“Child Labour: Global Estimates 2020” Trends and Future Directions

वर्तमान संदर्भ-

  • 9 जून, 2021 को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और यूनिसेफ (UNICEF) द्वारा ‘‘बाल श्रम वैश्विक अनुमान 2020, रूझान और आगे की राह’’ (Child Labour:Global estimaties 2020, trends and the road forward) रिपोर्ट जारी की गई है।
  • इस रिपोर्ट में विश्व के दो तिहाई 5 से 17 वर्ष के बच्‍चों को शामिल किया गया है।
  • ध्यातव्य है कि सतत विकास लक्ष्य (SDG) 8.7 के तहत कई अन्य लक्ष्यों के साथ ही 2025 तक बाल श्रम के सभी रूपों को समाप्त करने का आह्वान भी किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु-

  • ‘‘वैश्विक अनुमान 2020’’ रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष :-
  • रिपोर्ट दर्शाती है कि दो दशकों में पहली बार बाल श्रमिकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।
  • वर्ष 2000 और 2016 के बीच बाल मजदूरों की संख्या में 94 मिलियन की कमी दर्ज की गई थी, परंतु गिरावट की इस प्रवृत्ति में परिवर्तन हुआ है।
  • 2020 की शुरूआत में दुनिया भर में बाल श्रमिकों की संख्या बढ़कर 160 मिलियन हो गई है।
  • जिसमें 63 मिलियन लड़किया तथा 97 मिलियन लड़के है। इनमें भी लगभग आधे खतरनाक कार्यों में लगे है।
  • पिछले चार वर्षो में बाल श्रमिकों की संख्या में 8 मिलियन से ज्यादा की वृद्धि हुई है।

कोविड-19 प्रभाव

  • वैश्विक स्तर पर, महामारी के परिणामस्वरूप उत्पन्न गरीबी से वर्ष 2022 के आखिरी तक 8.9 मिलियन अतिरिक्त बच्‍चों को बाल श्रम में धकेले जाने का खतरा है।
  • यदि समुचित सामाजिक सुरक्षा कवरेज नहीं प्रदान की गयी तो यह बढ़कर 46.2 मिलियन हो सकता है।
  • कृषि क्षेत्र में बाल मजदूरी करने वाले बच्‍चों की हिस्सेदारी 70% (112 मिलियन) है। जिनमें 75 % बाल मजदूर 5 से 11 वर्ष के है।
  • बाल श्रम का सर्वाधिक हिस्सा परिवार में है जो कुल बाल श्रम का लगभग 72 % है। जिसमें 83 % बाल श्रमिक 5 से 11 वर्ष के है।
  • इसके अतिरिक्त , सेवा क्षेत्र में 19.7% (31.4 मिलियन) और उद्योग क्षेत्र में 10 % (16.5 मिलियन) हिस्सेदारी बाल श्रम की है।
  • रिपोर्ट में , 5 से 11 वर्ष की आयु समूह के बच्‍चों की बालश्रम में उल्‍लेखनीय वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है।
  • यह आयु वर्ग कुल वैश्विक आंकड़े (180 मिलियन) के आधे से अधिक है।
  • 5 से 11 वर्ष के लगभग 28 % बच्‍चे और 12 से 14 वर्ष की आयु के 35 % बच्‍चे बाल श्रम की वजह से स्कूल से बाहर हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, 5-17 आयु वर्ग बच्‍चों की संख्या जो जोखिमपूर्ण स्थानों पर कार्यकर रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा या नैतिक कल्याण को नुकसान होने की संभावना है, वर्ष 2016 से 6.5 मिलियन बढ़कर 79 मिलियन हो गई है।
  • बाल श्रम के तौर पर हर उम्र की लड़कियों की तुलना में लड़कों की संख्या अधिक है।
  • यदि प्रति सप्ताह 21 घंटे घर पर किए गए कार्य को ध्यान में रखा जाए तो बाल श्रम का यह लैंगिंक अंतराल भी कम हो जाता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बाल-श्रम की व्यापकता 14% है जो शहरी क्षेत्रों में 5 % के आंकड़े से लगभग 3 गुना अधिक है।
  • विभिन्न कारणों से विश्व स्तर पर उपसहारा क्षेत्र में बाल श्रम में वृद्धि सर्वाधिक हुई है।
  • कोविड-19 महामारी की वजह से, एशिया प्रशान्त क्षेत्र लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्रों में हुई प्रगति संकट में पड़ गई है।
  • बाल श्रम की स्थिति में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें-
  • शिक्षा व्यवस्था में उन बच्‍चों को भी शामिल करना जो Covid-19 से पहले स्कूल से बाहर थे। (ii) व्यस्कों के लिए उचित काम को बढ़ावा देना, ताकि परिवारों को पारिवारिक आय बढ़ाने में मदद के लिए बच्‍चों का सहारा न लेना पड़े।
  • अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम उन्मूलन वर्ष 2021 (2021: International Year for the Eliminationof child Labour) यूनीसेफ और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की भागीदारी वाले वैश्विक साझेदारी गठबंधन के सदस्यों देशों, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों व अन्य पक्षकारों को बाल श्रम के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में ठोस संकल्प लेने और अपने प्रयासों को दोगुना करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
  • बाल श्रम क्या है ?
  • अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार बाल श्रम को ऐसे कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है जो बच्‍चों को उनके बचपन, उनकी क्षमता और गरिमापूर्ण जीवन से वंचित करता है और जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास हेतु हानिकारण है।
  • यदि बच्‍चे या किशोर ऐसे कार्यों में भागीदारी करते हैं जो उनके स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास को प्रभावित नहीं करते तथा उनकी स्कूली शिक्षा में हस्तक्षेप नहीं करता है बालश्रम नहीं है।
  • इस तरह के कार्यों में घरेलू कार्यों में माता-पिता की मदद करना, परिवार की सहायता करना या स्कूल के समय के पश्चात बाहर और छुट्टियों पर पॉकेट मनी कमाने जैसे क्रिया-कलाप शामिल हैं।
  • भारत में बाल श्रम की स्थिति-

(i) 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 5-14 आयु वर्ग के बच्‍चों की कुल संख्या 259.6 मिलियन है।

  • उनमें से 10.1 मिलियन से अधिक (कुल बाल आबादी का 3.9 % ) या तो मुख्य कार्यकर्त्ता या सीमांत कार्यकर्त्ता के रूप में काम कर रहें हैं।

(ii) 2001 से 2011 के दशक में भारत में बाल श्रम में 2.6 मिलियन की कमी आई है जो यह दर्शाता है कि नीति और कार्यक्रम संबंधी हस्तक्षेप का सही संयोजन एक सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
(iii) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और मध्यान्ह भोजन योजना जैसे नीतिगत हस्तक्षेपों ने ग्रामीण बच्‍चों के लिए स्कूलों में रहने का मार्ग प्रशस्त किया है।
(iv) इसके अतिरिक्त, शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक गिरावट आई है।

  • ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर प्रवासन में वृद्धि के कारण शहरी क्षेत्रों में बाल श्रमिकों की मांग में वृद्धि हो रही है।
  • साथ ही यह खतरनाक व्यवसाय में लगे लोगों एवं बाल श्रम के उन्मूलन की भी बात करता है।

(v) वर्ष 2017 में ILO कन्वेंशन संख्या 138 और 182 की पुष्टि करते हुए, भारत सरकार ने खतरनाक व्यवसायों में लगे लोगों सहित बाल श्रम के उन्मूलन के लिए अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया।

नोट- (i) कारखाना अधिनियम, 1948 किसी भी कारखाने में 14 वर्ष से कम आयु के बच्‍चों के नियोजन पर रोक लगाता है।
(ii) खान अधिनियम, 1952 एक खान में 18 वर्ष से कम आयु के बच्‍चों के नियोजन पर रोक लगता है।
(iii) अनुच्‍छेद-24 : मौलिक अधिकार के रूप में खतरनाक उद्योगों (लेकिन गैर-खतरनाक उद्योगों में नहीं) में बाल श्रम को प्रतिबंधित करता है।

  • बाल श्रम (निषेध और नियमन)संशोधन अधिनियम, 2016 को 01 सितंबर, 2016 से लागू किया गया था। यह संशोधन 14 वर्ष से कम आयु के बच्‍चों को काम पर रखने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के साथ ही 30 अगस्त 2017 को अधिसूचित खतरनाक कारोबार और व्यवसाय की अनुसूची के अनुसार खतरनाक कारोबार एवं व्यवसाय में किशोरों (14 से 18 आयु वर्ग के बच्‍चे) को रोजगार पर रखने पर भी प्रतिबंध लगाता है।
  • श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने उपर्युक्त को 2 जून 2017 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया है।
  • अत: अब भारत ने बाल श्रम पर दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ), अभिसमयों 138 और 182 को अंगीकार कर लिया है।
  • जो कहता है कि रोजगार के लिए न्यूनतम आयु अनिवार्य स्कूली शिक्षा को पूरी करने की आयु से कम नही होनी चाहिए। जो कि भारत के मामले में 14 वर्ष है।

(iv) बाल श्रम पर राष्ट्रीय नीति, 1987
(v) पेंसिल : संशोधित बाल श्रम (निषेध और विनियमन अधिनियमन) अधिनियम, 1986 आैर राष्ट्रीय बल श्रम परियोजना (एनसीएलपी) योजना के प्रावधानों का सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए में इनकी बेहतर निगरानी और रिपोर्टिंग प्रणाली स्थापित के लिए 26 सितंबर 2017 को एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया।

  • बाल एवं किशोर श्रमिकों के शैक्षणिक पुनर्वास के उद्देश्य से जारी एनसीएलपी योजना के बेहतर कार्यान्वयन के लिए एनसीएलपी की सभी चालू परियोजना को इस पोर्टल पर पंजीकृत किया जाता है।
  • विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून को मनाया जाता है।
  • 2021 मंे इसकी थीम थी एक्ट नाऊ इण्ड चाइल्ड लेबर (Act Now, End Child Labour).
  • संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य (SDG) 8.7 :- यह वर्ष 2025 तक बाल श्रम के सभी रूपों को समाप्त करने का आह्वान करता है।

संकलन-शिशिर अशोक

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