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पी.एस.एल.वी.-सी.51/अमेजेनिया-1 (PSLV-C51/Amazonia-1)

PSLV-C51/Amazonia-1 (PSLV-C51/Amazonia-1)

वर्तमान संदर्भ

  • 28 फरवरी‚ 2021 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV-C51) के माध्यम से 19 उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया।
  • PSLV-C51 रॉकेट ‘ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान’ (PSLV) का 53वां मिशन है।
  • वर्ष 2021 में इसरो (ISRO) का यह पहला अंतरिक्ष अभियान है।
  • उल्लेखनीय है कि भारत की तरफ से प्रक्षेपित किए गए विदेशी उपग्रहों की कुल संख्या अब बढ़कर 342 (34 देशों की) हो गई है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • PSLV-C51 यान से मुख्य उपग्रह के रूप में अमेजोनिया-1 (ब्राजील) तथा 18 सह-यात्री (Co-passenger) उपग्रहों का प्रमोचन किया गया।
  • अंतरिक्ष विभाग के अधीन भारत सरकार की कंपनी ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ (NSIL) के लिए PSLV-C51 /अमेजोनिया-1 मिशन पहला समर्पित PSLV वाणिज्यि मिशन है।
  • अंतरिक्ष उड़ान आई.एन.सी.यू.एस.ए. (INC-USA) के साथ वाणिज्यिक व्यवस्था के तहत ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ (NSIL) इस मिशन का पूरा करेगा।
  • अमेजोनिया-1 ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान’ (INPE) ब्राजील का प्रकाशिक भू-प्रेक्षण उपग्रह (Optical Earth Observation Satellite) है।
  • यह पहला उपग्रह है‚ जिसकी डिजाइन‚ समेकन‚ जांच तथा प्रचालन संपूर्ण रूप से ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (INPE) द्वारा किया गया है।
  • अमेजोनिया-1‚ दक्षिण अमेरिका के अमेजन क्षेत्र में वनों की कटाई की निगरानी और ब्राजील की सीमा में विविध प्रकार की कृषि के विश्लेषण के लिए प्रयोक्ताओं (उपयोगकर्ताओं) को सुदूर संकेदन आंकड़ा मुहैया कराएगा तथा मौजूदा संरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।
  • अमेजोनिया-1 को पृथ्वी सतह से 758 किमी. की दूरी पर स्थित एक सूर्य तुल्यकाली कक्षा (Sun-Synchronous Polar orbit) में स्थापित किया गया है।
  • 18 सह-यात्री उपग्रहों में 5 उपग्रह भारत के और 13 उपग्रह संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के शामिल हैं।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के 13 उपग्रहों में निम्न शामिल हैं-

(i) 1 ‘साई-1 नैनो कनेक्ट-2’ : प्रौद्योगिकी प्रदर्शक
(ii) 12 ‘स्पेसवीज’ : दो तरफा उपग्रह संचार तथा आंकड़ा रिले

  • भारतीय सह-यात्री उपग्रहों में निम्न उपग्रह शामिल हैं-

(1) सतीश धवन सैट (S.D. SAT)

  • स्पेस किड्‌स द्वारा निर्मित S.D. SAT का सह-यात्री नीतभार के रूप में PSLV-C51 वहन करेगा।
  • S.D. SAT एक नैनो उपग्रह है‚ जिसका लक्ष्य विकिरण स्तरों/अंतरिक्ष मौसम का अध्ययन एवं दूर की रेंज वाली संचार प्रौद्योगिकीयां (Long Range Communication Technologies) का प्रदर्शन करना है।
  • स्पेस किड्‌स इंडिया ने सतीश धवन उपग्रह (SDSAT) के शीर्ष पैनल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर उकेरी है।
  • स्पेस किड्‌स इंडिया की वेबसाइट के मुताबिक‚ यह कदम प्रधानमंत्री की आत्मनिर्भर पहल और निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष की राह खोलने वाले निर्णय से एकजुटता दिखाने के लिए उठाया जा रहा है।

(2) यूनिटी सैट (UNITY – SAT)

  • यह 3 उपग्रहों का संयोजन (Combination) है‚ जिसका डिजाइन एवं निर्माण संयुक्त रूप से निम्न तीन भारतीय शैक्षणिक संस्थानों द्वारा किया गया है-

(i) जैप्पियार प्रौद्योगिकी संस्थान‚ श्रीपरेमवदुर – (J.IT-SAT)
(ii) G.H. रायसोनी अभियंत्रिकी महाविद्यालय‚ नागपुर – (G.H.R.C.E. – SAT)
(iii) श्री शक्ति अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी संस्थान‚ कोयम्बटूर – (श्री शक्ति SAT)

  • इस उपग्रह का लक्ष्य रेडियोरिले सेवाएं प्रदान करना है।

(3) सिंधुनेत्रा

  • ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ (DRDO) के युवा विज्ञानियों ने सिंधु नेत्रा उपग्रह को विकसित किया है।
  • यह उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में संचालित युद्ध पोत और व्यापारिक पोत की खुद से पहचान कर सकेगा।
  • इससे चीन से लगने वाले लद्दाख क्षेत्र और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों पर निगरानी की जा सकेगी।
  • इसके अलावा दक्षिण चीन सागर‚ अरब की खाड़ी और अफ्रीकी ग्रहों पर भी निगरानी की जा सकेगी।
  • एसडी-कार्ड के माध्यम से भगवद्‌गीता को भी अंतरिक्ष में भेजा गया है।
  • PSLV-C51‚ दो ठोस स्ट्रेप-ऑन बूस्टरों वाले PSLV के DL प्रकार का उपयोग किया।
  • ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (Polar Satellite Launch Vehicle : PSLV)
  • किसी भी तरह के उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित करने हेतु‚ जिस वाहन का उपयोग किया जाता है‚ उसे ही प्रक्षेपण यान या प्रक्षेपण वाहन कहते हैं।
  • धु्रवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) चार-स्तरीय रॉकेट प्रणाली है।
  • जिसके प्रथम व तृतीय चरण में ठोस प्रणोदकों तथा द्वितीय व चतुर्थ चरण में द्रव प्रणेदकों का उपयोग किया जाता है।
  • ठोस प्रणोदकों के अंतर्गत हाईड्रॉक्सिल टर्मिनेटेड पॉली ब्यूटाडाइन’ (Hydroxy-Terminated Poly-Butadiene : HTPB) का ईंधन के रूप में तथा अमोनिया परक्लोरेट का ऑक्सीकारक के रूप में प्रयोग होता है।
  • द्रव प्रणोदक के रूप में मुख्य रूप से अनसिमेट्रिकल डाइ-मिथाइल हाइड्राजाइन (Unsymmetrical D: Methyl Hydrazene : UDMH) का प्रयोग ईंधन के रूप में तथा नाइट्रोजन टेट्रॉक्साइड (N2O4) का प्रयोग ऑक्सीकारक के रूप में होता है।
  • नोट- N2O4 कमरे के ताप पर द्रवीभूत रहता है।
  • PSLV 1200 किग्रा. भारत वर्ग तक के दूरसंवेदी उपग्रहों को 900 किमी. ऊंचाई तक की ‘ध्रुवीय सूर्य तुल्यकालिक कक्षा’ (Sun- Synchronous Polar Orbit) जियो-सिक्रोनस ट्रांसफर आर्बिट’ और ‘लो-अर्थ आर्बिट’ में स्थापित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
  • PSLV के परिचालन से देश पृथ्वी अवलोकन‚ आपदा प्रबंधन दिशा सूचक और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता में आत्मनिर्भर बना है।

सं. शिशिर अशोक सिंह

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