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नेट जीरो उत्‍पादक मंच

net zero producer platform

वर्तमान संदर्भ
हाल ही में, सऊदी अरब ने ‘‘नेट जीरो उत्‍पादक मंच’’ (Net Zero Producers Forum) में शामिल होने की घोषणा की।

महत्‍वपूर्ण बिंदु
(1) नेट जीरो उत्‍पदक मंच

  • अप्रैल, 2021, में विश्व के प्रमुख तेल और गैस उत्‍पादकों में से पांच देशों नाॅर्वे, कतर, सऊदी अरब, कनाडा और संयुक्त राज्‍य अमेरिका (USA) ने सम्मिलित रूप से तेल और गैस उत्‍पादकों के लिए उत्‍सर्जन संबंधित ‘‘शुद्ध शून्‍य उत्‍पादक फोेरम’’ नामक एक सहकारी मंच (कोआपरेटिव फोरम) की स्थापना की योजना बनाई है।

(2) उद्देश्य-

(i) जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के कार्यान्‍वयन के समर्थन के तौर-तरीकों पर चर्चा करना।
(ii) ‘‘नेट जीरो उत्‍सर्जन’’ हेतु व्यावहारिक रणनीतियों का विकास करना।
(iii) वर्ष 2050 तक ‘‘शुद्ध-शून्‍य उत्‍सर्जन’’ (Net Zero Emission) का लक्ष्य प्राप्‍त करने की कार्ययोजना पर कार्य करना।

  • कनाडा, नाॅर्वे, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त राज्‍य अमेरिका सामूहिक रूप से 40 प्रतिशत वैश्विक तेल और गैस उत्‍पादन के लिए जिम्मेदार हैं।
  • इससे वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन का जोखिम बढ़ा हुआ है।

(3) ‘‘नेट जीरो उत्‍पादक मंच’’ की भूमिका एवं कार्य-

  • नेट जीरो उत्‍पादक मंच’’ के तहत उक्त पांच देश जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को कम करने के लिए सामूहिक रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर कार्य करेंगे-

(i) मीथेन का न्‍यूनीकरण (Methane abatement)
(ii) स्वच्‍छ-ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा
(iii) सर्कुलर कार्बन इकोनॉमी दृष्टिकोण को बढ़ावा
(iv) हाइड्रोकार्बन राजस्व पर निर्भरता में विविधता
(v) वनों के क्षेत्र को बढ़ाना
(vi) कार्बन कैप्‍चर और भंडारण हेतु प्रौद्योगिकियों का विकास
(vii) क्षेत्रीय परिस्थितियों के हिसाब से पर्यावरण फ्रैंडली प्रथाओं को अपनाने हेतु प्रोत्‍साहन
(vii) जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना।

  • साथ ही प्रत्‍येक देश की राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप उपायों को शामिल करने वाली रणनीतियों और तकनीकों पर कार्य उक्त मंच के द्वारा किया जाएगा।

(4) नेट-जीरो (Net-Zero) शुद्ध शून्‍य/कार्बन तटस्थता-

  • ‘नेट जीरो’ जिसे कार्बन तटस्थता (Carbon Neutrality) भी कहा जाता है का तात्‍पर्य यह बिल्‍ुकल नहीं है कि कोई देश अपने सकल उत्‍सर्जन को शून्‍य कर लेगा।
  • इसका तात्‍पर्य एक ऐसी स्थिति से है, जिसमें किसी देश के उत्‍सर्जन को, ‘‘वायुमंडल से ग्रीन हाउस गैसों के अवशोषण तथा निराकरण’’ के द्वारा क्षतिपूर्ति (Compe nsated) किया जाता है।
  • साधारण शब्दों में कहें तो- ‘‘जितनी कार्बन डाइऑक्‍साइड उत्‍सर्जित की जाएगी, उतनी ही कार्बन डाडआॅक्‍साइड वातावरण से हटाई जाएगी।
  • नेट जीरो की स्थिति को प्राप्‍त करने के लिए अर्थव्यवस्था के प्रत्‍येक अहम सेक्‍टर को इको-फ्रेंडली बनाने की आवश्यकता होती है, िजसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं-

(i) पवन या सौर ऊर्जा फार्म जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों को अधिक सशक्त करना।
(ii) उत्‍सर्जन के अवशोषण में वृद्धि करने हेतु अधिक संख्या में कार्बन सिंक, जैसे- वनीकरण को बढ़ावा देना, तैयार करना।
(iii) वायुमंडल से गैसों का निराकरण करने अथवा निष्कासित करने के लिए कार्बन कैप्‍चर और भंडारण जैसी अत्‍याधुनिक तकनीकों का उपयोग करना।

(5) वर्तमान वैश्विक स्थिति-

(i) सऊदी अरब ने अपने कार्बन उत्‍सर्जन को कम करने के लिए वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा से देश की ऊर्जा का 50 प्रतिशत हिस्सा उत्‍पन्‍न करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
(ii) यूरोपीय संघ (EU) द्वारा वर्ष 2050 तक शून्‍य कार्बन उत्‍सर्जक बनने के लिए एक कानून बनाया गया है।
-यह यूरोपीय संघ के सभी सदस्यों पर कानूनी रूप से
बाध्यकारी है।
(iii) विश्व आर्थिक मंच (WEF) के मुताबिक, कार्बन उत्‍सर्जन के मामले में चीन सबसे ऊपर है और इसके बाद अमेरिका का नंबर आता है तथा तीसरे नंबर पर भारत है।
(iv) भारत ने अप्रैल, 2016 में औपचारिक रूप से पेरिस समझौतेे (CoP-21, 2015) पर हस्ताक्षर किए थे।

  • भारत का लक्ष्य वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में वर्ष 2030 तक उत्‍सर्जन को 33-35 प्रतिशत कम करना है।
  • इसके अलावा भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक अतिरिक्त वनों के माध्यम से 2.5-3 अरब टन CO2 के बराबर कार्बन उत्‍सर्जन में कमी लाना है।
  • भारत अपने लक्ष्यों की ओर तेजी से अग्रसर है।

(v) विकसित देशों द्वारा कार्बन तटस्थता की घोषणाओं के बाद भी कार्बन उत्‍सर्जन में अपेक्षाकृत कमी नहीं ला पा रहे हैं।

आगे की राह

  • वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्‍त करने के लिए, तेल और गैस उत्‍पादक राष्ट्रों सहित सभी प्रमुख उत्‍सर्जकों से सहयोग की आवश्यकता है, ताकि जीवाश्म ईंधन उत्‍सर्जन को चरणबद्ध रूप से हटाने के समाधान की पहचान की जा सके और संभव अधिकतम उत्‍सर्जन को कम किया जा सके।

सं. शिशिर अशोक सिंह

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