Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

झाड़ी मेंढ़क (Shrub Frog) की 5 नई प्रजातियां

5 New Species of Shrub Frog

वर्तमान संदर्भ

  • भारत और अमेरिका के शोधार्थियों ने मिलकर पश्चिम घाटों में झाड़ी मेढ़क (Shrub Frog) की पांच नई प्रजातियों की खोज की है।
  • पश्चिमी घाट वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त जैव-विविधता हॉटस्पॉट है।

पृष्ठभूमि

  • शोधार्थियों के शोध के निष्कर्ण को “An Integrative Approach to infer systematic Relationships and define Speices groups in Shrub frog, with description of five new species from the western Ghats, India” शीर्षक वाले लेख में प्रकाशित किया गया था।
  • यह शोध अध्ययन दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बीजू के नेतृत्व में किया गया था।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • खोजी गई मेढ़क की पांच नई प्रजातियां ‘Rhacophoridae’ परिवार से संबंधित है।
  • इन नवीन प्रजातियों की खोज केरल वन अनुसंधान‚ दिल्ली विश्वविद्यालय और मिनेसोटा विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने की है।
  • यह खोज पश्चिमी घाट में ‘जीनस राओर्चेस्टस के झाड़ी मेढ़कों पर लंबे व्यापक अध्ययन का हिस्सा है।
  • नई प्रजातियों की पहचान की गई है और कई मानदंडों के आधार पर अलग-अलग पाया गया है‚ जैसे कि उनके बाहरी आकरिकी‚ डिएनए‚ कॉलिंग पैटर्न‚ व्यवहार और अन्य प्राकृतिक इतिहास अवलोकन।

5 नई प्रजातियां

(i) रोर्चेस्टेस कक्कायमेंसिस (क्कयम झाड़ी मेढ़क)
(ii) रार्चेस्टेस दु्रतहु (तेजी से बोलने (टर्राने) वाला झाड़ी मेंढ़क)
(iii) रोर्चेस्टेस कीरासबीना (कीरा का झाड़ी मेंढ़क)
(iv) रोर्चेस्टेस संजप्पाई (संजप्पा की झाड़ी मेंढ़क)
(v) रोर्चेस्टेस (वेल्लिक्कन्नन (सिल्वर‚ आइड झाड़ी मेढ़क

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

(i) नर झाड़ी मेंढ़कों की 48 प्रजातियों की सहवास की बोलियों का अध्ययन पहली बार किया गया था।
(ii) ाfवश्व की 80% झाड़ी मेंढक प्रजातियां पश्चिमी घाट में पाई जाती है।
(iii) अनोखे आंखों के रंग और प्रतिरूप वाले ये झाड़ी मेंढ़क अचानक आबादी में गिरावट के खतरे में है। और उनकी आबादी में गिरावट के कारणों और काबू पाने के संभावित समाधानों की पहचान करने के लिए एक अध्ययन प्रस्तावित है।

नोट- मेढ़क का वैज्ञानिक नाम ‘अनुरा’ है।

नोट – पश्चिमी घाट –

  • प्रायद्वीपीय भारत के पश्चिमी भाग में फैली हुई श्रेणियों को पश्चिमी घाट कहा जाता है।
  • पश्चिमी घाट ताप्ती नदी से लेकर कन्याकुमारी तक भारत के 6 राज्यों – गुजरात‚ महाराष्ट्र‚ गोवा‚ कर्नाटक‚ केरल और तमिलनाडु में फैला है।
  • यह वास्तव में पर्वत नहीं है बल्कि भ्रंश कगार या पठारों का कागार है‚ इसे हसयाद्री श्रेणी के नाम से जाना जाता है।
  • सहयाद्री श्रेणी को महाराष्ट्र में ऊपरी सहयाद्री और कर्नाटक में निचली सहयाद्री कहा जाता है।
  • ऊपरी सहयाद्री की सबसे ऊंची चोटी ‘कालसुब्बई’ महाराष्ट्र में हरिश्चंद्र की श्रेणी पर स्थित है‚ निचली सहयाद्री की सबसे ऊंची चोटी‚ कुद्रेमुख (1892 मी.) कर्नाटक में स्थित है।
  • पश्चिमी घाट में दक्षिण में अपरदन के कारण कई छोटी-छोटी श्रेणियों में बंट गई है।
  • पश्चिमी घाट की सबसे ऊंची चोटी अन्नमुडी (2695 मी.)‚ अन्ना‚ मलाई श्रेणी पर केरल राज्य में स्थित है।
  • यह प्रायद्विपीय भारत या दक्षिण भारत की सबसे ऊंची चोटी है।
  • पश्चिमी घाट से गोदावरी‚ कृष्णा‚ कावेरी और पेरियार नदियों का उद्‌गम होता है‚ जो संपूर्ण दक्षिण भारत की सिंचाई की जीवनरेखा है।
  • प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश नदियों का उद्‌गम पश्चिमी घाट से ही होता है।
  • पश्चिमी घाट में चाय‚ कहवा‚ रबर और यूकेलिप्टिस जैसी वाणिज्यिकी कृषि की जाती है‚ जो अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

सं. शिशिर अशोक सिंह

Post a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: