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जुगनू पक्षी डायवर्स

Firefly bird divers
  • वर्तमान पृष्ठभूमि
  • 24 दिसंबर‚ 2020 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT : National Green Tribunal) ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को आदेश दिया कि जब तक विद्युत की लाइनों को भूमिगत नहीं किया जाता है‚ तब तक कोई नई विद्युत परियोजना स्वीकृत नहीं होगी।
  • NGT के इस आदेश के पश्चात‚ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण हेतु‚ भारतीय वन्यजीव संरक्षण सोसाइटी (WCS)‚ पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) ने पोखरण में एक अनोखी पहल की है।
  • WCS और MOEFCC ने ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ की आबादी वाले क्षेत्रों में ऊपर से गुजरने वाली विद्युत की लाइनों का संकेत करने के लिए ‘जुगनू पक्षी डायवर्ट’ का प्रयोग किया है।
  • इससे पूर्व वर्ष 2019 में भी राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश पर ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ की सुरक्षा के लिए अनुशंसाएं की गई थीं-

(i) बस्टर्ड पर्यावास क्षेत्र में सभी विद्युत लाइनों को कम करके भूमिगत बिछाना।
(ii) ज्ञात प्रजनन स्थलों में शिकारियों से सुरक्षित बाड़ों को विकसित करना।
(iii) राजस्थान और गुजरात में बस्टर्ड पर्यावासों के 13000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नए पवन टर्बाइन एवं सौर फॉर्मों को स्वीकृति न देना।

  • आवश्यकता क्यों?
  • राजस्थान के थार-क्षेत्र में‚ हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनें‚ वर्तमान में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
  • हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों की समस्या ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ की लगभग 15 प्रतिशत आबादी में उच्च मृत्यु दर का कारण बन रही है।
  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ संबंधी परिदृश्य में विद्युत लाइनों को भूमिगत रखे जाने का निर्देश दिया गया था।
  • ‘जुगनू पक्षी डायवर्टर’ क्या है?
  • रात के अंधेरों में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ पक्षी खुले तारों की चपेट में आकर हाई-वोल्टेज विद्युत का शिकार हो जाते हैं।
  • इन तारों की लाइनों पर चमकते हुए दूर से जुगनू की तरह दिखने वाला बोर्ड होगा‚ जो इन पक्षियों के मार्ग-परिवर्तन में सहायक होगा।
  • यह जुगनू संकेतक राजस्थान के पोखरण तहसील में लगाया गया है।
  • इस मॉडल का अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) प्रजाति उत्तरजीविता आयोग के बस्टर्ड स्पेशलिस्ट ग्रुप के विशेषज्ञों द्वारा समर्थन किया गया है।
  • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के बारे में
  • यह पक्षी मध्य और पश्चिम भारत और पूर्वी पाकिस्तान में पाया जाता है।
  • यह पक्षी भारतीय उप-महाद्वीप का एक स्थानिक जीव है।
  • IUCN की सूची में एक गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी है।
  • इस पक्षी का पर्यावास स्थल-मरुस्थलीय राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य (राजस्थान)‚ नालिया (गुजरात)‚ वेल्लारी (कर्नाटक) तथा बरोरा (महाराष्ट्र) है।
  • यह पक्षी कंटीली झाड़ियों वाले खुले क्षेत्रों तथा खेतों के समीप लंबी घास वाले स्थानों में अत्यधिक पाए जाते हैं।
  • ये पक्षी सिंचित क्षेत्रों से बचते हैं।

सं. प्रशांत सिंह