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चौथा वैश्विक आयुर्वेद महोत्‍सव

Fourth Global Ayurveda Festival
  • चर्चा में क्‍यों ?
  • हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मार्च, 2021 को ‘चौथे वैश्विक आयुर्वेद महोत्‍सव’ को वर्चुअल प्रारूप में संबोिधत किया।
  • प्रमुख बिं‍दु-
  • आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्‍सा प्रणालियोें में से एक है। यह विज्ञान, कला और दर्शन का मिश्रण है। आयुर्वेद नाम का अर्थ है, ‘जीवन से संबंधित ज्ञान’।
  • आयुर्वेद का उद्देश्य व्यक्‍तियों के स्वास्थ्य की रक्षा करना तथा रोगी व्यक्‍तियों के विकारों को दूर कर उन्‍हें स्वस्थ बनाना है।
  • वर्तमान संदर्भ
  • चौथे वैश्विक आयुर्वेद महोत्‍सव का आयोजन कोच्‍चि (केरल) में 12-19 मार्च के मध्य वर्चुअल प्रारूप में आयोजित किया गया।
  • इस आयोजन के तहत, अंतराष्ट्रीय आयुर्वेद संगोष्ठी का आयोजन “Strengthening Host Defence System-Ayurveda A Potential Promise” थीम के तहत किया गया।
  • इस आयोजन में कई प्रकार के लाइव सत्र जैसे प्‍लेनेरी, समांतर सत्र, संगोष्ठी, आभासी प्रदर्शनी और वर्चुअल नेटवर्किंग शामिल थे।
  • इस महोत्‍सव ने आयुर्वेद के क्षेत्र से संस्थानों, संगठनों, व्यक्तियों और सांविधिक निकायों के लिए एक साथ मिलने, विचार साझा करने और जानने के लिए उपयुक्त मंच प्रदान किया।
  • आयुर्वेद के लाभ
  • आयुर्वेदिक चिकित्‍सा विधि सर्वांगीण चिकित्‍सा विधि है। आयुर्वेदिक चिकित्‍सा के उपरांत व्यक्ति की शारीरिक तथा मानसिक दोनों स्थितियों में सुधार होता हैै।
  • आयुर्वेदिक ओषधियों के अधिकांश घटक जड़ी-बूटियों, पौधों, फूलों एवं फलों आदि से प्राप्‍त की जाती है। अतः यह चिकित्‍सा प्रकृति के निकट है।
  • आयुर्वेद न केवल रोगों की चिकित्‍सा करता है, बल्‍कि रोगों को होने से रोकता भी है।
  • आयुर्वेद भोजन तथा जीवन शैली में सरल परिवर्तनों के द्वारा रोगों को दूर रखने के उपाय सुझाता है।
  • व्यावहारिक रूप से आयुर्वेदिक ओषधियों के कोई दुष्प्रभाव देखने को नहीं मिलते।
  • निष्कर्ष
  • कोविड-19 महामारी के दौरान आयुर्वेदिक उत्‍पादोें की लगातार बढ़ती मांग, आयुर्वेद के प्रति बढ़ती वैश्विक रुचि को रेखांकित करता है। अत: सरकार को आयुर्वेदिक और पारंपरिक चिकित्‍सा के रूझान को निरंतर बढ़ाने तथा स्वास्थ्य पर्यटन में इसकी हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है एवं आयुर्वेद को एक ऐसी शक्ति के रूप में सामने लाना होगा, जिससे विश्व को भारत की सॉफ्ट पावर को भी पहचाने में मदद मिल सके।

लेखक-विकास प्रताप सिंह