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खनिज एवं खनन संबंधी संशोधन विधेयक

Amendment Bill on Minerals and Mining
  • वर्तमान संदर्भ
  • 19 मार्च, 2021 को लोक सभा ने खदान और खनिज (विकास तथा विनियमन) विधेयक, 2021 पारित कर दिया।
  • यह विधेयक खनिज (विकास और विनियमन)अधिनियम, 1957 को संशोधित करने तथा कैप्‍टिव व मर्चेंट खदानों के बीच अंतर दूर करने के लिए लाया गया है।
  • संधोधन के कुछ महत्‍वपूर्ण बिंदु
  • कुछ निजी कंपनियों को कैप्‍टिव माइनिंग की स्वीकृति हासिल थी, जिससे वे खुद के इस्तेमाल के लिए कोल माइनिंग कर सकती थीं। अब दूसरी प्राइवेट कंपनियांे व विदेशी कंपनियांे को भी खानों की नीलामी में हिस्सा लेने का अधिकार सरकार ने दे दिया है।
  • व्यापारिक गतिविधियों में पट्टे या बोली के माध्यम से खान को व्यापारियों को खरीदने का अवसर मिलता है। इसमें धातुएं, कच्‍चे माल इत्‍यादि शामिल होते हैं।
  • वाणिज्यिक एवं व्यापारिक गतिशीलता को बनाए रखने के लिए दोनों के बीच (कैप्‍टिव माइनिंग व मर्चेंट माइनिंग के बीच) अंतर को न्‍यून करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • 1957 के विधेयक के अंतर्गत निलामी प्रक्रिया के द्वारा किसी खान को लीज़ पर देते समय उसे किसी खास अंतिम उपयोग हेतु रिज़र्व किया जा सकता था। (उदाहारर्थि लौह अयस्क की खदान को स्टील प्‍लांट हेतु आरक्षित करना)। ऐसे खदानों की कैप्‍टिव माइन’ कहा जाता है। नया विधेयक ऐसे खदानों के किसी खास अंतिम उपयोग के आरक्षण को समाप्‍त करता है।
  • कैप्‍टिव खदानें अपनी जरूरत को पूरा करने के बाद अपने वार्षिक उत्‍पादन का 50% खुले बाजार में बेंच सकते हैं जिस पर उन्‍हें अतिरिक्‍त शुल्‍क चुकाना पड़ेगा।
  • यदि राज्य सरकारें समय पर निलामी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकें तो केंद्र सरकार निलामी कर सकती है।
  • नए पट्टेदार को खानों की लीज़ दो वर्ष हेतु दी जाती है। इसी समय में उन्‍हें नई मंजूरियां हासिल करनी होगी।
  • सरकारी कंपनियों की लीज़ की अवधि को अतिरिक्‍त शुल्‍क देकर बढ़ाया जा सकेगा।
  • संशोधन का औचित्‍य
  • देश में खनन क्षेत्र में सुधार करना।
  • खनिजों का उत्‍पादन बढ़ाना
  • देश के खनिजों के विशाल भंडारण का 45प्रतिशत ही उपयोग में है अत: शेष 55 प्रबशत को भी उपयोग में लाना।
  • लाभ
  • खदानों में खनन गतिविधियों के बढ़ने से रोजगार के अवसर को बढ़ावा मिलेगा।
  • राजस्व बढ़ेगा और उत्‍खनन तथा खनन गतिवििधयों में निजी भागीदारी सुनिश्चित होगी।
  • खदानों को बड़ी कंपनियों के लिए खोलने का प्रयास किया जाएगा।
  • औद्योगिक गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा।
  • खदानों की नीलामी एवं आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाकर कारोबार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना।
  • भ्रष्टाचार एवं घोटाले की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।
  • सारी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन एवं पारदर्शी बनाया जाएगा।
  • हानि की संभावनाएं-
  • विदेशी कंपनियों के भाग लेने से खनन के कार्यों में मशीनों का इस्तेमाल व्यापक स्तर पर यदि होगा तो अकुशल मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे।
  • विदेशी कंपनियां खनिजों को केवल बड़ी कंपनियों को उपलब्ध कराएंगी जिससे छोटे उद्यमों को कच्‍चा माल उपलब्ध होने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
  • NE RP (Non Exclusive Reconnaissance Pirmit)- यह अधिनियम कोयला, लिग्नाइट, परमाणु खनिजों के अतिरिक्‍त दूसरे खनिजों हेतु NEPR के प्रावधानों की आवश्यकता को समाप्‍त करता है। इसके अंतर्गत खनिजों के शुरुआती अनुमानित सर्वेक्षण आते थे।
  • निष्कर्ष-
  • यदि सरकार हानि-लाभ का समुचित प्रबंध कर समग्रता से यह विधेयक पास करती है तो निश्चित तौर पर यह विधेयक खनिजों के दोहन का लाभ देश को दिला सकेगा।

लेखक-दीपक पांडेय