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कृत्रिम रेत

Artificial sand
  • वर्तमान संदर्भ
  • 25 जनवरी‚ 2021 को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान की नई ‘M-Sand Policy, 2020’ जारी की है।
  • पृष्ठभूमि
  • उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2017 में नदी तट पर होने वाले अवैध खनन पर रोक लगा दी गई थी।
  • प्रमुख तथ्य

(1) एम-सैंड पालिसी (M-Sand Policy) की विशेषताएं

  • नदियों से पारंपरिक रेत अर्थात बजरी (नदी तट की रेत) पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से ‘M-Sand Policy’ प्रारंभ की गई है।
  • इस नीति के जरिए राज्य में निर्मित रेत (Manufactured Sand) या M-Sand के उपयोग और उत्पादन को राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन (Incentives) प्रदान किए जाएंगे।
  • यह नीति पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगी और लोगों के बीच विनिर्माण कार्यों के लिए M-Sand के उपयोग को बढ़ावा देगी।
  • इस नीति से स्थानीय स्तर पर रोजगार के बड़े अवसर सृजित होंगे।
  • यह नीति खनन क्षेत्रों द्वारा उत्पन्न अवशिष्टों की भारी मात्रा संबंधी मुद्दे के समाधान में सहायक होगी।
  • कृत्रिम रेत का उत्पादन करने वाली इकाइयों को उद्योग का दर्जा प्रदान किया जाएगा।

(2) नीति की आवश्यकता

  • राजस्थान में रेत की उपलब्धता निर्माण कार्यों की आवश्यकतानुसार नहीं है।
  • विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए लगभग 70 मिलियन टन रेत की मांग है।
  • राज्य में केवल M-Sand इकाइयां ही संचालित हैं‚ जो कि प्रतिदिन 20,000 टन कृत्रिम रेत का उत्पादन करती हैं।
  • नई M-Sand नीति‚ कृत्रिम रेत को बजरी के दीर्घकालिक विकल्प के रूप में बढ़ावा देगी और नई इकाइयों की स्थापना में मददगार होगी।
  • एम-सैंड (M-Sand) क्या है?
  • कृत्रिम रेत (M-Sand)‚ कंक्रीट निर्माण कार्यों में प्रयुक्त होने वाली ‘नदी की रेत’ अर्थात बजरी का विकल्प है।
  • कृत्रिम रेत (M-Sand) को कठोर ग्रेनाइट पत्थरों को पीसकर बनाया जाता है।
  • पिसी हुई रेत खुरदरे किनारों के साथ घनाकार (Cubical Shape) होती है‚ जिसे एक निर्माण सामग्री के रूप में इस्तेमाल करने के लिए धोया जाता है और वर्गीकृत किया जाता है।
  • कृत्रिम रेत उन खनिजों से प्राप्त होती है‚ जो स्थानीय रूप से ग्रेनाइट‚ सिलिका‚ बेसाल्ट‚ बलुआ पत्थर के रूप में उपलब्ध हैं।
  • M-Sand (कृत्रिम रेत) ISO कोड 383 : 2016 के मानकों को पूरा करता है।
  • कृत्रिम रेत (M-Sand) का आकार 75 मिमी. (= 150 माइक्रोन) से कम होता है।
  • M-Sand का महत्व
  • M-Sand के उपयोग से नदी खनन पर रोक लगेगी‚ जिससे भूजल में कमी‚ पानी की कमी जैसी पर्यावरणीय आपदाओं से निपटने में सहायता होगी।
  • कृत्रिम रेत‚ आमतौर पर धूल मुक्त (Dust Free) होती है तथा निर्माण के लिए आवश्यकतानुसार इसके आकार को छोटा-बड़ा किया जा सकता है।
  • निर्माण के लिए वैकल्पिक सामग्री के रूप में कृत्रिम रेत के उपयोग से निर्माण की लागत को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • कृत्रिम रेत की उपलब्धता अधिक और परिवहन लागत कम होना‚ इसके उपयोग को बढ़ावा देता है।
  • इसमें मिट्टी‚ धूल और गाद जैसी अशुद्धियां नहीं होती हैं।
  • इसमें सीमेंट के गुणों तथा जमने के समय को प्रभावित करने वाले कार्बनिक और घुलनशील यौगिक नहीं होते हैं‚ जिससे कंक्रीट की जरूरी शक्ति को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।
  • निष्कर्ष
  • रेत और बजरी पानी के बाद भारी मात्रा में निकाले और व्यापार किए जाने वाले दूसरे सबसे बड़े प्राकृतिक संसाधन हैं‚ लेकिन कम-से-कम विनियमित हैं। उनके निष्कर्षण से अक्सर नदी और तटीय क्षरण होता है और मीठे पानी और समुद्री मत्स्य और जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के लिए खतरा उत्पन्न होता है‚ साथ ही नदी के किनारों की अस्थिरता बढ़ती है और भूजल स्तर कम होता जाता है। उक्त समस्याओं को कृत्रिम रेत (M-Sand) के उपयोग को बढ़ावा देकर काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
  • नोट- M-Sand नीति कई राज्यों द्वारा बनाई गई है। जैसे- तमिलनाडु (2019)

सं. शिशिर अशोक सिंह