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कर्नाटक के मांडया जिले में लिथियम निक्षेप

Lithium deposits in Mandya district of Karnataka
  • वर्तमान संदर्भ
  • हाल ही में परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy-DAE) के तहत कार्य करने वाले ‘परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय’ (Atomic Minerals Directorate for Exploration and Research – AMD) द्वारा पृथ्वी की सतह एवं इसकी उप-सतह पर किए गए प्रारंभिक सर्वेक्षणों में लिथियम संसाधनों की उपलब्धता के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
  • यह सर्वेक्षण कर्नाटक के मांडया जिले के मार्लगल्ला-अल्लापटना क्षेत्र में स्थित आग्नेय चट्टानों पर किए गए थे।
  • इस क्षेत्र की पेगमाटाइट चट्टानों में 1,600 टन लिथियम संसाधनों की मौजूदगीे के साक्ष्य मिले हैं।
  • पृष्ठभूमि
  • भारत में लिथियम की खोज के लिए अभी तक अधिक प्रयास नहीं हुए हैं‚ जिसका एक कारण रेडियो-एक्टिविटी से जुड़ी आशंकाएं हैं।
  • भारत में लिथियम संसाधनों के अन्य संभावित स्थल भी हैं-

(i) राजस्थान‚ बिहार और आंध्र प्रदेश में स्थित अभ्रक पेटी
(ii) ओडिशा एवं छत्तीसगढ़ में मौजूद पेगमाटाइट (आग्नेय चट्टानें) पेटी
(iii) राजस्थान में सांभर व पचपदरा के लवणीय जलकुंड
(iv) गुजरात में कच्छ का रण।

  • महत्वपूर्ण तथ्य

(1) लिथियम (Li)-

  • परमाणु क्रमांक : 3
  • मानक परिस्थितियों में‚ लिथियम प्रकृति की सबसे हल्की धातु और सबसे कम घनत्व वाला (अर्थात सबसे हल्का ठोस) ठोस पदार्थ है।
  • यह एक नरम (जिसे चाकू से काटा जा सकता है) तथा चांदी के समान सफेद रंग का एक क्षारीय और दुर्लभ धातु है।
  • यह अन्य क्षार धातुओं की भांति अत्यंत अभिक्रियाशील है।
  • यह हवा में मौजूद ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके जलने लगता है।
  • लिथियम की अत्यधिक प्रतिक्रियाशीलता और ज्वलनशीलता के कारण‚ इसे खनिज तेल में संगृहीत किया जाता है।
  • यह अपनी अत्यधिक अभिक्रियाशीलता की वजह से प्रकृति में शुद्ध रूप में नहीं मिलता है‚ बल्कि यौगिकों (Compound) के रूप में मिलता है।
  • यह हवा एवं पानी के संपर्क में आने पर विस्फोटित भी हो सकता है।
  • लिथियम में किसी भी ठोस तत्व की तुलना में उच्चतम विशिष्ट क्षमता होती है।
  • लिथियम का सिंगल बैलेंस इलेक्ट्रॉन इसे विद्युत का अच्छा संवाहक (अर्थात सुचालक) बनाता है।

(2) लिथियम के उपयोग

  • यह नवीन प्रौद्योगिकियों के निर्माण हेतु एक प्रमुख घटक है।
  • इस दुर्लभ धातु का उपयोग सिरेमिक‚ कांच‚ दूरसंचार और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों में किया जाता है।
  • इसके अतिरिक्त‚ इसका उपयोग लिथियम आयन बैटरियों में‚ लुब्रीकेटिंग ग्रीस‚ रॉकेट प्रणोदकों के लिए उच्च ऊर्जा योजकों के रूप में‚ मोबाइल फोन के लिए ऑप्टिकल मॉड्यूलेटर तथा ट्रिटियम के लिए कनवर्टर के रूप में (संलयन अभिक्रियाओं में प्रयुक्त) किया जाता है।

(3) घरेलू स्तर पर अन्वेषण के लाभ

  • वर्तमान समय में‚ भारत अपनी सभी लिथियम आवश्यकताओं की पूर्ति आयात के माध्यम से करता है।
  • यह भारत के आयात लागत को कम कर सकता है।
  • भारत लिथियम का अर्जेंटीना‚ बोलिविया और चिली से आयात करता है।
  • इससे इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन मिलेगा‚ क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयुक्त होने वाली लिथियम आयन बैटरी के उत्पादन हेतु भारत को लिथियम की आवश्यकता है।
  • लिथियम-आयन बैटरी बाजार पर चीन का एकाधिकार है।
  • भारतीय विनिर्माता चीन‚ जापान और दक्षिण कोरिया से लिथियम आयन बैटरी मंगाते हैं।

(4) लिथियम से संबंधित भारत की पहलें

  • बैटरी-ग्रेड सामग्री का उत्पादन करने के लिए भारत की प्रथम लिथियम रिफाइनरी (परिष्करणशाला) को गुजरात में स्थापित किया जाएगा।
  • संभावित लिथियम का संयुक्त रूप से अन्वेषण करने हेतु भारत ने अर्जेंटीना के साथ एक समझौता किया है।
  • ‘लिथियम-त्रिकोण’ (Lithium Triangle) दक्षिण अमेरिका में स्थित है।
  • इसमें अर्जेंटीना‚ बोलिविया और चिली शामिल हैं‚ जो लिथियम समृद्ध देश हैं।
  • इस क्षेत्र में लिथियम संसाधनों का लगभग 54% भंडार मौजूद है।
  • कुछ अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • भारत में‚ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) लिथियम-आयन बैटरी का विनिर्माण करता है‚ लेकिन इसकी मात्रा सीमित है और वे अंतरिक्ष अनुप्रयोग के लिए प्रतिबंधित हैं।
  • भारत ने वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या को 30 प्रतिशत तक बढ़ाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
  • चीन वैश्विक लिथियम का 51 प्रतिशत और कोबाल्ट का 62 प्रतिशत नियंत्रित करता है।
  • लिथियम और कोबाल्ट‚ लिथियम आयन बैटरी के मुख्य घटक हैं।
  • शीर्ष लिथियम उत्पादक देश : ऑस्ट्रेलिया‚ चिली‚ चीन‚ अर्जेंटीना‚ जिम्बाब्वे‚ पुर्तगाल।
  • शीर्ष लिथियम भंडार वाले देश : बोलिविया‚ अर्जेंटीना‚ चिली‚ यूएसए।
  • नियत पदार्थ (Prescribed Substance)
  • थर्मोन्यूक्लियर अनुप्रयोगों के कारण‚ लिथियम को परमाणु ऊर्जा अधिनियम‚ 1962 के तहत ‘नियत पदार्थ’ के रूप में घोषित किया गया है।
  • अधिनियम के अंतर्गत‚ देश के विभिन्न भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में लिथियम की खोज के लिए ‘परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय’ (AMD) को अनुमति प्रदान की गई है।
  • परमाणु ऊर्जा अधिनियम‚ 1962 के तहत‚ ‘नियत पदार्थ’ का तात्पर्य‚ केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित उन पदार्थों से होता है‚ जो परमाणु ऊर्जा के उत्पादन या उसके उपयोग अथवा इससे संबंधित पदार्थों जैसे कि- यूरेनियम‚ प्लूटोनियम‚ ड्यूटोरियम‚ थोरियम‚ बेरिलियम या उनके यौगिकों के अनुसंधान में उपयोग किए जा सकते हैं।
  • लिथियम-आयन बैटरी
  • ‘लिथियम-आयन बैटरी’ या ‘ली-आयन’ बैटरी एक प्रकार की रिचार्जेबल बैटरी है।
  • नोट– रसायन विज्ञान के लिए वर्ष 2019 का नोबेल पुरस्कार जॉन बी. गुडइनफ‚ एम. स्टैनले व्हिटिंगम एवं अकीरा योशिनो को लीथियम आयन बैटरी के विकास हेतु दिया गया।
  • उपयोग
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण‚ टेली-कम्युनिकेशन‚ एयरोस्पेस‚ औद्योगिक अनुप्रयोग।
  • लिथियम-आयन बैटरी प्रौद्योगिकी इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पसंदीदा ऊर्जा स्रोत है।
  • लिथियम-आयन बैटरी का रख-रखाव बहुत सरल व कम खर्चीला है।
  • कमियां
  • लंबी चार्जिंग अवधि
  • खर्चीली निर्माण प्रक्रिया
  • सुरक्षा संबंधी चिंताएं
  • समय के साथ क्षमता में कमी
  • निष्कर्ष
  • हालांकि‚ भारत में खोजा गया यह भंडार विश्व के अग्रणी लिथियम उत्पादक देशों की तुलना में बहुत कम है। फिर भी भारत जैसे देश जो कि लिथियम के लिए पूर्णत: आयात पर निर्भर हैं‚ के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। साथ ही लिथियम भंडार मिलने से देश को अपनी पर्यावरण हितैषी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी‚ जैसे- इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने में।

सं. शिशिर अशोक सिंह