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एबेल-370

Abell-370
  • वर्तमान परिदृश्य
  • ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (NASA) ने 19 जनवरी‚ 2021 को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर #Hubbleclassic कैप्शन के साथ विशाल आकाशगंगा क्लस्टर-एबेल-370 (Abell-370) की तस्वीर साझा की।

(i) नासा ने हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) के माध्यम से आकाशगंगाओं (Galaxies) के इस विशाल क्लस्टर/समूह की तस्वीर प्राप्त की है।
(ii) आकाशगंगाओं का यह समूह पृथ्वी से 4.9 बिलियन प्रकाश वर्ष (Light year) की दूरी पर स्थित है।

  • एबेल 370 आकाशगंगा समूह में कई सौ-आकाशगंगाएं मौजूद हैं।
  • पृष्ठभूमि
  • एबेल-370 आकाशगंगा समूह (क्लस्टर) को पहली बार वर्ष 2002 में ‘लेंसिंग प्रभाव का उपयोग करके खोजा गया था।
  • इस गैलेक्सी की खोज जॉर्ज एबेल (George Abell) ने की थी। इसलिए इसे Abell-370 नाम दिया गया।
  • नासा के वैज्ञानिकों द्वारा एबेल-370 आकाशगंगा समूह को द ड्रैगन नाम भी दिया गया है।
  • इसका कारण यह है कि वर्ष 2009 में‚ एबेल-370 पर एक अध्ययन में क्लस्टर की पृष्ठभूमि में ड्रैगन आकृति की आकाशगंगाओं के एक समूह का पता चला था।
  • ड्रैगन का सिर सर्पिल आकाशगंगा से बना था तथा ये आकाशगंगाएं एक-दूसरे से पांच अरब प्रकाश वर्ष दूर थीं।
  • आकाशगंगा समूह‚ संपूर्ण ब्रह्मांड में सबसे बड़े खगोलीय निकाय होते हैं‚ जो कि गुरुत्वाकर्षण के कारण एक साथ रहते हैं।
  • प्रत्येक आकाशगंगा में इतना अधिक द्रव्यमान होता है कि वह अपने चारों ओर के अंतरिक्ष को प्रभावित करता है‚ जो उसके पीछे स्थित ब्रह्मांडीय वस्तुओं से आने वाली रोशनी को बढ़ाता और झुकाता है।
  • आकाशगंगा समूह में ‘डार्क मैटर भी मौजूद होता है और यह डार्क मैटर‚ आकाशगंगा क्लस्टर को एक साथ बनाए रखने के लिए गुरुत्वाकर्षण बल प्रदान करता है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • नासा के अनुसार‚ चित्र में दिखने वाले अजीब आकृति उन आकाशगंगाओं के विकृत रूप हैं‚ जो क्लस्टर (समूह) का हिस्सा नहीं है‚ लेकिन इसके आगे स्थित हैं।
  • ये दूर की आकाशगंगाएं इस आकाशगंगा समूह के अपार गुरुत्वाकर्षण के कारण विकृत दिखती हैं।
  • अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत के अनुसार‚ गुरुत्वाकर्षण न केवल भौतिक वस्तुओं के रूप को ही‚ बल्कि प्रकाश के रूप को भी बदल सकता है।
  • इसके द्वारा‚ दूर की आकाशगंगा से जो प्रकाश एबेल-370 आकाशगंगा समूह के माध्यम से‚ हमारी ओर यात्रा करता है‚ तो ऐबल-370 समूह का गुरुत्वाकर्षण बल इस प्रकाश को झुकाता है और आकाशगंगा समूह का गुरुत्वाकर्षण लेंस की तरह दूर की इन आकाशगंगाओं की रोशनी को बढ़ाता है।
  • इस प्रभाव को गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग कहा जाता है।
  • एबेल-370 उन पहली आकाशगंगा समूहों में से एक है‚ जिसने गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग के प्रभावों को दिखाया है।
  • हबल टेलीस्कोप की तस्वीर एबेल-370 का अध्ययन डरहम विश्वविद्यालय के खगोलविद जोहान रिचर्ड द्वारा किया गया था।
  • रिचर्ड और उनकी टीम को 10 आकाशगंगाएं मिलीं‚ जो एबेल-370 क्लस्टर द्वारा लेंस की गई थी।
  • इन 10 में से 6 आकाशगंगाएं पहले नहीं देखी गई थीं।
  • इन आकाशगंगाओं की आकृति और कलस्टर में द्रव्यमान विविध है।
  • रिचर्ड और उनकी टीम ने एबेल-370 के कुल द्रव्यमान के बारे में अधिक जानने के लिए लेंसयुक्त आकाशगंगाओं का अध्ययन किया।
  • अध्ययन में पाया गया कि क्लस्टर में डार्क मैटर के दो बड़े‚ अलग-अलग गुच्छे हैं।
  • इससे पता चलता है कि एबेल-370 दो छोटी आकाशगंगाओं के विलय का परिणाम है।
  • हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope)
  • यह टेलीस्कोप ‘संयुक्त राज्य अमेरिका’ की है‚ जिसे अंतरिक्ष में पृथ्वी की ‘निम्न-भू-कक्षा’ (Low Earth Orbit) में वर्ष 1990 में स्थापित किया गया था।
  • इसका निर्माण अमेरिकी स्पेस एजेंसी ‘नासा’ (NASA) ने यूरोपियन स्पेस एजेंसी के सहयोग से किया था।
  • यह टेलीस्कोप पराबैंगनी दृश्य अनवरक्त किरणों का उपयोग कर खगोलीय पिंडों की जानकारी जुटाती है।
  • इस टेलीस्कोप के द्वारा ही ब्रह्मांड के ‘फैलाव की दर’ की गणना की गई है।
  • इस टेलीस्कोप ने ही आकाशगंगाओं के केंद्रों में ब्लैक-होल के अस्तित्व का प्रमाण दिया था।
  • आकाशगंगा (Galaxy) या निहारिका
  • आकाशगंगा करोड़ों तारों‚ बादलों तथा गैसों की एक प्रणाली है।
  • दूसरे शब्दों में‚ खुले आकाश में एक ओर से दूसरी ओर एक फैली चमकदार चौड़ी सफेद पट्टी आकाशगंगा होती है‚ जो लाखों तारों के समूह से मिलकर बनी होती है।
  • आकार के आधार पर ब्रह्मांड की आकाशगंगा (निहारिका) को दो समूहों में वर्गीकृत किया गया है-

(i) वृत्ताकार निहारिका (Circular Galaxy)
(ii) सर्पिलाकार निहारिका (Spiral Galaxy)

  • हमारा सौरमंडल जिस आकाशगंगा में उपस्थित है‚ उसका नाम ‘मिल्की वे’ (Milky way) (दुग्ध मेखला) है।
  • प्राचीन भारत में इसकी कल्पना आकाश में प्रकाश की बहती नदी से की गई थी।
  • इस गैलेक्सी को भारत में आकाशगंगा कहा जाता है।
  • मिल्की वे का आकार सार्पिलाकार (Spiral) है।
  • मिल्की वे की तरह की लाखों आकाशगंगाएं मिलकर ब्रह्मांड का निर्माण करती हैं।

सं.  शिशिर अशोक सिंह