Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

आयरन डोम वायु रक्षा प्रणाली

वर्तमान संदर्भ

  • हाल ही में, इस्राइल और िफलिस्तीन ने एक-दूसरे पर हवाई हमले किए।
  • यह युद्ध इस्राइली पुलिस द्वारा दमिश्क गेट (Damascus Gate) पर एक बैरिकेड स्थापित करने के साथ शुरू हुआ।
  • बाद में इस्राइली पुलिस द्वारा ‘‘अल-अक्‍सा-मस्जिद’’ (Al – Aqsa-Mosque) पर धावा बोलने के बाद तनाव और बढ़ गया।
  • इसके लिए, गाजा के हमास समूह ने राॅकेटों के साथ जवाबी कार्रवाई की।
  • इन रॉकेटों को इस्राइली आयरन डोम ने इंटरसेप्‍ट कर उन्‍हें हवा में नष्ट कर दिया।

महत्‍वपूर्ण तथ्य –

1. आयरन डोम (Iron Dome)

  • यह एक कम दूरी की, जमीन से हवा में मार करने वाली, वायु रक्षा प्रणाली है। –
  • वर्ष 2006 में इस्राइल-लेबनान युद्ध के दौरान हिजबुल्‍लाह ने इस्राइल पर हजारों रॉकेट दागे थे।
  • इसके बाद इस्राइल ने नया एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम बनाने की घोषणा की थी, जो उसके लोगों और शहर की रक्षा करे।
  • इसी के तहत, मिसाइल रक्षा प्रणाली ‘‘आयरन डोम’’ को दो कंपनियों

(i) राॅफेल एडवांस िडफेंस सिस्टम और (ii) इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्री ने मिलकर बनाया।

  • इस प्रणाली को बनाने में अमेरिका ने इस्राइल को तकनीकी और आर्थिक मदद प्रदान की।
  • इस वायु रक्षा प्रणाली को वर्ष 2011 में तैनात किया गया।

2. आयरन डोम की विशेषताएं –

(i) इस अल्‍प दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली वायु रक्षा प्रणाली में रडार और तामिर इंटरसेप्‍टर मिसाइल लगाई गई हैं।

  • जो किसी भी रॉकेट या मिसाइल को खोजकर उसे रास्ते में ही ध्वस्त कर देती है।

(ii) इसमें मध्यम दूरी और सुदूरवर्ती हमलों के लिए दो अलग प्रणालियां हैं- (a) डेविड्स स्लिंग और (b) ऐरो
(iii) इससे रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार के साथ-साथ विमान, हेलिकाॅप्‍टर और मानव रहित हवाईयानों का मुकाबला किया जा सकता है।
(iv) राफेल के अनुसार, इसकी सफलता दर 90 प्रतिशत से अधिक है। इसमें 2000 से अधिक अवरोधनों (Interception) को शामिल किया गया है।

  • विश्व के कई विशेषज्ञ इस्राइली प्रणाली की सफलता दर 80 प्रतिशत मानते हैं।

(v) यह प्रणाली सुरक्षा के लिए तैनात एवं युद्धाभ्यासरत सैन्‍य बलों, शहरी क्षेत्र तथा फाॅरवर्ड ऑपरेटिंग बेस को हवाई हमलों से बचाने में सक्षम है।

  • यह दिन और रात सहित सभी मौसमों में कार्य कारने में सक्षम है।

3. आयरन डोम की कार्यप्रणाली –

  • जब दुश्मन रॉकेट दागता है, तो आयरन डोम की रडार प्रणाली सक्रिय होकर उसके रास्ते का विश्लेषण करती है।
  • जिससे रॉकेट की गतिविधियां ज्ञात हो जाती हैं।
  • अगर ऐसा होता है, तो किसी चलायमान या स्थिर इकाई से एक इंटरसेप्‍टर लाॅन्‍च होता है, जो रॉकेट को किसी रिहायशी इलाके या अहम इमारत पर गिरने से पूर्व ही उसे हवा में नष्ट कर देता है।
  • आयरन डोम की तीन मुख्य प्रणालियां हैं। सभी तीन प्रणालियां एक परिभाषित क्षेत्र पर एक शील्‍ड प्रदान करने के लिए एक साथ कार्य करती हैं। ये तीन प्रणालियां निम्न प्रकार से हैं:-

(i) आने वाले खतरों को पहचानने के लिए डिटेक्‍शन एंड ट्रैकिंग रडार
(ii) युद्ध प्रबंधन और हथियार नियंत्रण प्रणाली (Battle Management and Weapon Control System – BMC)
(iii) मिसाइल फायरिंग यूनिट

नोट – BMC मूल रूप से रडार और इंटरसेप्‍टर मिसाइल के बीच संपर्क स्थापित करता है।

  • नई दिल्‍ली स्थित ‘‘सेंटर फॉर एयर पाॅवर स्टडीज’’ (CAPS)के अनुसार, किसी भी वायु रक्षा प्रणाली में दो मुख्य तत्‍व हाेते हैं- (i) रडार और (ii) प्रोक्‍सिमिटी फ्यूज

(i) रडार – वस्तुओं की सटीक पहचान करने तथा उन्‍हें ट्रैक करने में सक्षम होता है।

  • भावी खतरों को पहचानने तथा उन्‍हें ट्रैक करने के लिए वायु रक्षा प्रणाली में सामान्‍यत: 2-3 रडारों का उपयोग िकया जाता है।
  • ट्रैकिंग रडार लक्ष्य की पहचान कर, उसे कुशलतापूर्वक भेदने में मिसाइल की मदद करता है।

(ii) प्रोक्‍सिमिटी फ्यूज, को ‘लेजर – नियंत्रित फ्यूज’ भी कहा जाता है।

  • चंूकि प्रत्‍येक बार लक्ष्य को भेदना संभव नहीं हो पाता है। अत: जब मिसाइल लक्ष्य के लगभग 10 मीटर करीब से गुजरती है, तो यह उपकरण मिसाइल को सक्रिय कर देता है और वारहेड में इस प्रकार से विस्फोट हाेता है कि मिसाइल तथा लक्ष्य पूर्णत: नष्ट हो जाते हैं।

4. भारत के पास उपलब्ध मिसाइल रक्षा प्रणालियां
(i) एस – 400 ट्रायम्फ –

  • भारत, रूस से एस 400 वायु रक्षा प्रणाली खरीद रहा है।
  • यह तीन खतरों –
  • रॉकेट, मिसाइल और क्रूज मिसाइल से निपटने में सक्षम है।
  • इसकी रेंज आयरन डोम से ज्‍यादा है।
  • एस – 400 प्रणाली, लगभग 300 से 400 िकमी. रेंज से दागी जाने वाली मिसाइलों, विमानों को मार गिराती है।
  • यह रूस द्वारा डिजाइन की गई सतह से हवा में मार करने वाली गतिशील मिसाइल प्रणाली है।

(ii) पृथ्वी एयर डिफेंस और एडवांस एयर डिफेंस

  • यह एक द्वि-स्तरीय प्रणाली है, जिसमें दो भूमि और समुद्र
  • आधारित इंटरसेप्‍टरर मिसाइल शामिल हैं। – अर्थात उच्‍च ऊंचाई अवरोधन के लिए ‘‘पृथ्वी एयर डिफेंस’’ मिसाइल और कम ऊंचाई अवरोधन हेतु ‘एडवांस एयर डिफेंस मिसाइल’।

(iii) अश्विन एडवांस एयर डिफेंस इंटरसेप्‍टर मिसाइल –

  • यह रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित एक स्वदेशी रूप से निर्मित एडवांस एयर डिफेंस (AAD) इंटरसेप्‍टर मिसाइल है।
  • यह कम ऊंचाई वाली सुपरसोनिक बैलिस्टिक इंटरसेप्‍टर मिसाइल का उन्‍नत संस्करण है।

(iv) पिकोरा (Pechora) –

  • रूसी रक्षा प्रणाली पिकोरा (Pechora) भी भारत के पास उपलब्ध है।

नोट –

(i) ‘बराक-8’ मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने में भारत तथा इस्राइल का सहयोग महत्‍वपूर्ण है।

  • भारत ने इस्राइल के सहयोग से ‘वायु रक्षा रडार’ के विकास में भी कार्य किया है।

(ii) भारत अमेरिका से दो अत्‍याधुनिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणालियां खरीदने की प्रक्रिया में है।

संकलन – शिशिर अशोक सिंह

%d bloggers like this: