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IEA द्वारा प्रकाशित भारत की ऊर्जा नीति समीक्षा

India's Energy Policy Review published by IEA
  • पृष्ठभूमि
  • ‘न्यू इंडिया’ के निर्माण के लिए ऊर्जा की अपरिहार्यता (Necessity) निर्विवाद है। ‘न्यू इंडिया’ में ऐसे भारत के निर्माण का भाव भी निहित है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ऊर्जा स्रोतों को सुरक्षित रखे। उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हमें अपने ऊर्जा स्रोतों को विविधता (Diversity), धारणीयता (Sustainability) तथा तकनीकी सक्षमता (Technological Capability) भी प्रदान करनी होगी। इसी परिप्रेक्ष्य से भारत ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA :  International Energy Agency) के संबद्ध सदस्य (Associate Member) के रूप में 30 मार्च, 2017 को सदस्यता ग्रहण की थी।
  • अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी 
  • IEA ( International Energy Agency) भविष्य के लिए धारणीय और सुरक्षित ऊर्जा निर्माण के लिए प्रयत्नशील एक वैश्विक संगठन है।
  • IEA ने नीति आयोग के सहयोग से भारत के ऊर्जा क्षेत्र की नीतियों, प्रवृत्तियों, सुरक्षा तथा सामर्थ्य का विस्तृत लेखा-जोखा ‘India 2020 Energy Policy Review’ शीर्षक से यह रिपोर्ट 10 जनवरी, 2020 को प्रकाशित की। भारत के ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित इस प्रकार की यह प्रथम रिपोर्ट है।
  • गौरतलब है कि IEA की स्थापना वर्ष 1974 में OECD (Organisation of Economic Co-operation and Development) के अंतर्गत की गई थी।
  • India 2020 Energy Policy Review रिपोर्ट के महत्वपूर्ण निष्कर्ष
  • रिपोर्ट में इस बात को इंगित किया गया है कि भारत सरकार ने वर्ष 2000 से वर्ष 2019 की अवधि के दौरान 750 मिलियन नागरिकों को विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की है।
  • सरकार ने वर्ष 2015 में उजाला योजना (Ujala Scheme) के अंतर्गत 100 शहरों के 35 मिलियन उद्दीप्त विद्युत बल्बों को हटाकर उनके स्थान पर LED बल्बों के इस्तेमाल का लक्ष्य रखा था।
  • रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक 8.9 मिलियन उद्दीप्त विद्युत बल्बों को हटाया जा चुका है तथा उनके स्थान पर LED बल्बों का इस्तेमाल हो रहा है।
  • वर्ष 2016 में शुरू उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 80 मिलियन BPL (Below Poverty Line-गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों को LPG गैस कनेक्शन उपलब्ध करवाकर सरकार ने धुआं रहित ग्रामीण भारत की परिकल्पना को साकार किया है। इससे स्वास्थ्य विकार, वायु प्रदूषण तथा वनों की कटाई को कम करने में मदद मिली है।
  • तेल एवं गैस क्षेत्र
  • देश में तेल एवं गैस क्षेत्र के अन्वेषण एवं विकास को गति देते हुए सरकार ने वर्ष 2017 से HELP (Hydrocarbon Exploration and Licensing Policy) की शुरुआत की। इसके अंतर्गत तेल एवं गैस ब्लॉक के अन्वेषण एवं उत्पादन के लिए एकल आज्ञा प्राधिकरण का गठन किया गया है।
  • विदित हो कि HELP ने पुरानी NELP (New Exploration Licensing Policy) का स्थान लिया है, जो कि आलोचनाओं का शिकार रही थी।
  • कोयला क्षेत्र
  • कोयला खनन में निजी निवेश को अनुमति देने के साथ ही तेल एवं गैस (O & G) के खुदरा बाजार को भी खोलने की अनुमति दी है, ताकि इस क्षेत्र में भी उदारीकरण को अपनाया जा सके।
  • विद्युत उत्पादन के लिए प्रयुक्त हो रहे कोयले और गैस के प्लांट्स का उपयोग कम किया जाएगा, अतिरिक्त क्षमता आधिक्य (Surplus Capacity) सृजित की जाएगी तथा अधिक-से-अधिक नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 तक कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (Total Primary Energy Supply : TPES) में 44 प्रतिशत योगदान कोयले द्वारा उत्पादित ऊर्जा का है, जबकि कुल विद्युत उत्पादन में कोयले का योगदान 74 प्रतिशत है।
  • कुल TPES में गैस द्वारा उत्पादित ऊर्जा का योगदान 5.8 प्रतिशत है, जबकि कुल विद्युत उत्पादन में 4.6 प्रतिशत रहा है।
  • कुल TPES में नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान 23.4 प्रतिशत, जबकि कुल विद्युत उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान 17.2 प्रतिशत रहा है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र
  • भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2022 तक 175 GW की नवीकरणीय विद्युत उत्पादन क्षमता प्राप्त करना है।
  • इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर, 2019 को न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा द्वारा विद्युत उत्पादन का नया लक्ष्य वर्ष 2030 तक 450 GW निर्धारित किया है।
  • नवंबर, 2019 तक 84 GW (32 GW सौर, 37 GW वायु तथा 15 GW जल) नवीकरणीय विद्युत ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ दिया गया है।
  • रिफाइनरी क्षेत्र
  • भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता राष्ट्र है, जबकि रिफाइनिंग एवं रिफाइंड उत्पादों के उत्पादन में विश्व में चतुर्थ स्थान पर है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2020 तक भारत तेल के उपभोग में चीन को पीछे छोड़ देगा तथा भारत रिफाइनरी बाजार का एक आकर्षक गंतव्य होगा।
  • तेल सुरक्षा
  • रिपोर्ट में बताया गया है कि तेल सुरक्षा (Oil Security) के लिए सरकार इसके आयात को घटाने का प्रयास कर रही है। साथ ही इसकी आपूर्ति के स्रोतों में भी विविधता लाई जा रही है।
  • विदित रहे कि मार्च, 2015 में केंद्र सरकार ने तेल के वर्तमान आयातित मात्रा को वर्ष 2022 तक 10 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा है।
  • आपूर्ति को बढ़ाने के लिए सरकार भारतीय निवेश को मध्य-पूर्व तथा अफ्रीका  के तेल क्षेत्र में बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
  • साथ ही सरकार समर्पित तेल स्टॉक (Dedicated Oil Stocks) को और मजबूत करने को भी प्रयासरत है।
  • भारत का रणनीतिक तेल भंडार 40 मिलियन बैरल है, जो कि वर्तमान उपभोग के हिसाब से केवल 10 दिन की आपूर्ति कर सकेंगे।
  • अतः सरकार का प्रयास अपने रणनीतिक तेल भंडारण को अतिरिक्त 50 मिलियन बैरल बढ़ाने का है।
  • गैसीय ऊर्जा क्षेत्र
  • रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सरकार का लक्ष्य राष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति में प्राकृतिक गैस का योगदान वर्तमान के 6 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 15 प्रतिशत करना है।
  • भारत में घरेलू तथा परिवहन क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की भूमिका बढ़ती जा रही है, जबकि विद्युत ऊर्जा उत्पादन में इसकी भूमिका घटती जा रही है।
  • धारणीय विकास लक्ष्य और भारत की ऊर्जा नीति
  • रिपोर्ट बताती है कि संयुक्त राष्ट्र का धारणीय विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goal : SDG) -7 जो कि ‘‘सभी तक ऊर्जा उपलब्धता की पहुंच’’ से संबंधित है, के प्रति भारत निरंतर प्रगतिशील है।
  • SDG-7 के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए भारत सरकार ने ग्रामीण विद्युत आपूर्ति के लिए ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना’ (DDUGJY) तथा सभी ग्रामीण परिवारों में विद्युत आपूर्ति के लिए ‘सौभाग्य योजना’ को सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है।
  • भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन 1.6 टन/प्रति व्यक्ति है, जो कि वैश्विक प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन 4.4 टन/प्रति व्यक्ति से काफी कम है, जबकि वैश्विक CO2 उत्सर्जन में भारत की भागीदारी मात्र 6.4 प्रतिशत है।
  • मई, 2017 में नीति आयोग ने परिवहन क्षेत्र में रूपांतरण के लिए एक विजन दस्तावेज जारी किया है। इसी क्रम में वर्ष 2018 में ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of Power : MoP) के अंतर्गत e-Mobility Programme को एनर्जी इफिसिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) ने लागू किया है, जिससे कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके।
  • सरकार ने SDG-3 जो कि ‘सभी के लिए स्वस्थ तथा सकारात्मक जीवन’ (Ensuring Healthy Lives and Promote Well Being) के प्रोत्साहन को सुनिश्चित करने से है, के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।
  • वर्ष 2015 के पेरिस समझौते के अंतर्गत नेशनली इंटेंडेड डेटरमाइंड कॉन्ट्रिब्यूशन (NIDC) को अपनाया है।
  • NIDC के अंतर्गत ऊर्जा सक्षमता को बढ़ाकर 15 प्रतिशत वार्षिक करना है।
  • CO2 उत्सर्जन को 300 मिलियन टन तक कम करना है।
  • मेक इन इंडिया के अंतर्गत अपनाई गई स्वच्छ ऊर्जा तकनीकें
  • ‘मेक इन इंडिया’ के अंतर्गत –
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ाने
  • फोटोवोल्टाइक (Pv) सेल के विकास  
  • लिथियम बैटरी के निर्माण
  • कूलिंग तकनीकी को बढ़ावा देने
  • सोलर चार्जिंग ढांचे को मजबूत बनाने
  • स्मार्ट ग्रिड तथा बायोफ्यूल्स को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है।
  • ऊर्जा आंकड़ों का महत्व
  • ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए आंकड़ों की समयबद्ध उपलब्धता, निगरानी, पुनरीक्षण तथा कार्यान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी क्रम में नीति आयोग ने National Energy Policy Draft (NEPD), 2017 तैयार किया है, ताकि सभी तक विद्युत की पहुंच (24 × 7) आधार पर तथा समयबद्ध आंकड़ों की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जा सके।
  • निष्कर्ष
  • IEA द्वारा प्रकाशित इस रिपोर्ट से भारत द्वारा ऊर्जा क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण प्रयासों एवं उपलब्धियों की गहरी समझ विकसित होती है।
  • भारत का लक्ष्य ऊर्जा उत्पादन में अधिक-से-अधिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (सौर, पवन, जल, जैव, तरंग आदि) पर निर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ अनवीकरणीय ऊर्जा (कोयला, गैस, तेल) स्रोतों की उपलब्धता भी बनाए रखना महत्वपूर्ण है। इस प्रकार हमारा प्रयास ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण को बढ़ावा देना है ताकि ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित इस प्रकार की रिपोर्ट से ऊर्जा की मांग एवं आपूर्ति के अंतराल को पाटने में भी सक्षमता का पता चलता है। अतएव IEA का यह सारगर्भित एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन हमें भविष्य की योजनाएं बनाने में मार्गदर्शन प्रदान करेगी।

सं. अमित त्रिपाठी