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6वीं द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य‚ 2019-20

6th bi-monthly monetary policy statement ‚2019-20
  • वर्तमान परिपे्रक्ष्य
  • 6 फरवरी‚ 2020 को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली ‘मौद्रिक नीति समिति’ (MPC) ने ‘6वीं द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य‚ 2019-20’ (Sixth Bi-Monthly Monetary Policy Statement, 2019-20) जारी किया।
  • मौद्रिक नीति समिति (MPC) का उद्देश्य‚ भारतीय अर्थव्यवस्था में सकारात्मक वृद्धि और मुद्रास्फीति की दर को उचित बनाए रखना है।
  • समिति द्वारा जारी इस मौद्रिक नीति वक्तव्य में ‘चलनिधि समायोजन सुविधा’ (LAF) के तहत नीतिगत दरों में कोई परिवर्तन नहीं करने का निर्णय लिया गया है।
  • यह दूसरा अवसर है जब रेपो रेट में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
  • आरबीआई द्वारा यह फैसला मुद्रास्फीति के लक्ष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है।
  • महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय
  • आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने मौजूदा वृहद आर्थिक हालातों को देखते हुए रेपो दर को 5.15 प्रतिशत पर ही स्थिर रखने को कहा है।
  • नतीजतन‚ ‘रिवर्स रेपो दर’ (Re-Repo Rate) भी अपने पूर्व के स्तर (4.90%) पर समायोजित हो गई।
  • इसके अलावा‚ सीमांत स्थायी सुविधा (MSF : Marginal Standing Facility) तथा बैंक दर भी 5.40 प्रतिशत पर अपरिवर्तित बनी हुई है।
  • आरबीआई ने हितधारकों को आश्वासन दिया है कि भविष्य हेतु उनके लिए नीति स्थान उपलब्ध रहेगा।
  • उपर्युक्त निर्णय‚ उपभोक्ता समर्थन सूचकांक (CPI) के लिए मध्यम अवधि के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से है‚ जो विकास का समर्थन करते हुए +/–2 प्रतिशत के एक बैंड के भीतर 4 प्रतिशत है।
  • मौद्रिक नीति समिति द्वारा यह निर्णय‚ भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि को पुनर्जीवित करने और लक्ष्य के भीतर मुद्रास्फीति की दर को बनाए रखने के लिए लिया गया है।
  • 6वीं द्वैमासिक मौद्रिक नीति‚ 2019-20 की मुख्य विशेषताएं
  • मुद्रास्फीति की स्थिति अत्यधिक अनिश्चित बनी हुई है‚ जिसके कारण महंगाई का रास्ता बढ़ा है।
  • प्याज के मूल्य में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति में बढ़ोत्तरी हुई। दालों और प्रोटीन की कीमतों में भी वृद्धि हुई है।
  • खुदरा मुद्रास्फीति में दिसंबर‚ 2019 में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई‚ जो नवंबर‚ 2019 में मात्र 5.5 प्रतिशत थी।
  • एमपीसी ने वर्ष 2019-20 की चतुर्थ तिमाही के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान 6.5 प्रतिशत लगाया था।
  • एमपीसी द्वारा मध्यम आकार के उद्यमों को रेपो रेट पर ऋण सुविधा दी जाएगी‚ इससे पहले यह सुविधा केवल सूक्ष्म और लघु उद्यमों को दी जाती थी।
  • एमपीसी द्वारा विलंबित रियल एस्टेट सेक्टर को पुन: एक वर्ष के भीतर वाणिज्यिक संचालन के लिए सक्रिय कर दिया जाएगा।
  • भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए वास्तविक जीडीपी को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दिया है।
  • आरबीआई ने उत्पादक क्षेत्रों और समर्थन वृद्धि के लिए‚ ऋण प्रवाह को बढ़ाने के लिए एक लंबी अवधि के रेपो ऑपरेशन (LTRO : Long Term Refinancing Operation) सुविधा का अनावरण किया है।
  • आरबीआई द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि एक और तीन साल की अवधि के लिए LTRO का संचालन करके उचित लागत पर केवल 1 लाख करोड़ रु. तक टिकाऊ तरलता को एकत्रित किया जा सकता है।
  • ध्यातव्य है कि वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में उत्पादक क्षेत्रों और समर्थन वृद्धि हेतु ऋण प्रवाह में 4.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
  • LTRO
  • लंबी अवधि के पुनर्वित्त संचलन (The Long Term Refinancing Operation : LTRO) यूरोपीय बैंकों की एक सस्ती ऋण योजना है।
  • इसका उद्देश्य बाजार में नकदी प्रवाह को बढ़ावा देना और गंभीर क्रेडिट संकट या बैंकिंग प्रणाली को पतन से बचाना है।
  • इसकी शुरुआत यूरोजोन संकट को कम करने के लिए‚ यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा वर्ष 2011 में की गई थी।
  • निष्कर्ष
  • भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति को आक्रामक रुख के साथ जारी किया है‚ जिससे यह संभावना बनती है कि आने वाले समय में जरूरत पड़ने पर ही नीतिगत दरों में कटौती हो सकती है।
  • बढ़ती विकास-मुद्रास्फीति की गतिशीलता को देखते हुए एमपीसी ने यथास्थिति बनाए रखना उचित समझा।

संअमित शुक्ला