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22वें विधि आयोग का गठन

Ministry of Law and Justice
  • पृष्ठभूमि
  • भारतीय विधि आयोग एक गैर-वैधानिक कार्यकारी निकाय है‚ जिसका गठन सरकार द्वारा तीन वर्षों की निश्चित अवधि के लिए किया जाता है।
  • विधि आयोग मुख्य रूप से कानूनी और न्यायिक विशेषज्ञों का पैनल है‚ जो कानून और न्याय मंत्रालय (Ministry of Law and Justice) के लिए एक सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करता है।
  • हालांकि स्वतंत्र भारत में विधि आयोग का गठन मूल रूप से वर्ष 1955 में किया गया था।
  • वर्तमान परिपे्रक्ष्य
  • 19 फरवरी‚ 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 22वें विधि आयोग को मंजूरी दी गई।
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  • विधि आयोग तीन वर्ष के अंतराल पर पुनर्गठित किया जाता है।
  • विधि आयोग द्वारा अब तक कुल 277 रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है।
  • गौरतलब है कि भारत के 21वें विधि आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त‚ 2018 को समाप्त हो गया था।
  • 22वां विधि आयोग
  • सरकार को विधि संबंधी विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव देने के लिए आवश्यकतानुसार एक विधि आयोग की नियुक्ति की जाती है।
  • मुख्य रूप से 22वें विधि आयोग में निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे-

1. एक पूर्णकालिक अध्यक्ष

2. चार पूर्णकालिक सदस्य (सदस्य सचिव सहित)

3. पदेन सदस्य के रूप में कानूनी मामलों के विभागीय सचिव

4. पदेन सदस्य के रूप में सचिव‚ विधायी विभाग; तथा

5. अधिक-से-अधिक पांच अंशकालिक सदस्य

  • विधि आयोग के कार्य
  • विधि आयोग ऐसे कानूनों को चिह्नित करेगा‚ जो अप्रासंगिक हैं या जिनकी अब कोई आवश्यकता नहीं है।
  • राज्य नीति के परिपे्रक्ष्य में मौजूदा कानूनों की जांच करना तथा उनमें सुधार के तरीकों का सुझाव देना तथा संविधान की प्रस्तावना में निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करना।
  • कानून और न्याय से संबद्ध विषयों पर विचार करना और सरकार को अपने विचारों से अवगत कराना‚ जो इसे विधि एवं न्याय मंत्रालय के माध्यम से सरकार द्वारा विशेष रूप से अग्रेषित किया गया है।
  • विधि और न्याय मंत्रालय के माध्यम से सरकार द्वारा अग्रेषित किसी बाहरी देश को अनुसंधान उपलब्ध कराने के अनुरोध पर विचार करना।
  • गरीबों तथा उनकी सेवा में कानून एवं कानूनी प्रक्रिया का उपयोग करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करना।
  • सामान्य महत्व वाले केंद्रीय अधिनियमों को संशोधित करना ताकि उन्हें सरल बनाया जा सके।
  • विधि आयोग के लाभ
  • इससे सरकार को विचार योग्य विषयों के माध्यम से अध्ययन और सिफारिश के लिए आयोग को सौंपे गए कानून के विभिन्न पहलुओं के बारे में विशेषज्ञता प्राप्त निकाय से सिफारिशें मिलने का लाभ होगा।
  • विधि आयोग केंद्र सरकार द्वारा सौंपे गए कानून में अनुसंधान करने और उसके बारे में सुधार करने के लिए भारत के मौजूदा कानूनों की समीक्षा करने तथा नए कानून बनाने का कार्य करेगा।
  • यह कानूनी प्रक्रियाओं में हो रही देरी को समाप्त करने‚ मामलों को तेजी से निपटाने‚ अभियोग की लागत कम करने के लिए न्याय आपूर्ति प्रणालियों में सुधार लाने के लिए अध्ययन करेगा।
  • प्रथम विधि आयोग
  • भारत में प्रथम विधि आयोग लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में 1833 के चार्टर अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 1834 में स्थापित किया गया।
  • इसके उपरांत वर्ष 1853, 1861 तथा 1879 में क्रमश: द्वितीय‚ तृतीय एवं चतुर्थ विधि आयोगों का गठन किया गया।
  • स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार द्वारा वर्ष 1955 में अटॉर्नी जनरल एम.सी. सीतलवाड़ की अध्यक्षता में स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि आयोग की स्थापना की गई।
  • ध्यातव्य है कि वर्ष 1955 से अब तक कुल 21 विधि आयोगों का गठन किया जा चुका है।

संअभय पाण्डेय