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14वीं एन्युअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर-2019) ‘अर्ली इयर्स’

14th Annual Status of Education Report (ASAR-2019) 'Early Years'
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 14 जनवरी, 2020 को प्राथमिक, पूर्व प्राथमिक एवं द्वितीयक शिक्षा की शीर्षस्थ गैर-व्यावसायिक संस्था (Non-Governmental Organisation : NGO) ‘प्रथम’ द्वारा 14वीं एन्युअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (Annual Status of Education Report : ASER) असर-2019 ‘अर्ली इयर्स’ जारी की गई।
  • असर रिपोर्ट, वर्ष 2005 से संचालित एक वार्षिक सर्वेक्षण है, जिसके माध्यम से प्रति वर्ष –
  • ग्रामीण भारत के 3-16 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के विद्यालय में नामांकन की स्थिति का सर्वेक्षण किया जाता है, तथा
  • 5-16 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों की आसान पाठ पढ़ने और बुनियादी गणित करने की सक्षमता का सर्वेक्षण किया जाता है।
  • असर-2019 ग्रामीण भारत के 4-8 वर्ष (जिसे ‘अर्ली इयर्स’ शब्द से संबोधित किया गया है; विश्व स्तर पर ‘अर्ली इयर्स’ 0-8 वर्ष माना जाता है) के बच्चों के पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक और कुछ महत्वपूर्ण विकास संकेतकों पर केंद्रित है।
  • असर-2019 ‘अर्ली इयर्स’ के तहत भारत के 24 राज्यों के 26 जिलों में कुल 1,514 गांवों का सर्वेक्षण किया गया।
  • इस सर्वेक्षण में 30,425 घरों और 4-8 वर्ष की आयु वर्ग के 36,930 बच्चों को शामिल किया गया।
  • उत्तर प्रदेश के लखनऊ तथा वाराणसी जिले को भी सर्वेक्षण में शामिल किया गया।
  • मुख्य निष्कर्ष
  • असर-2019 रिपोर्ट के सर्वेक्षण 4-8 वर्ष तक के बच्चों के –

(i) संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development)

 (ii) नामांकन की जानकारी

 (iii) प्रारंभिक भाषा और गणित एवं

(iv) सामाजिक और भावनात्मक विकास की गतिविधियों;

     पर केंद्रित रहा।

  • पूर्व प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालय में नामांकन
  • असर-2019 के आंकड़े बताते हैं कि 4-8 वर्ष की आयु वर्ग के 90 प्रतिशत से अधिक बच्चे किसी-न-किसी प्रकार के शैक्षणिक संस्थान में नामांकित हैं।
  • नामांकन में बच्चों की उम्र के अनुसार बढ़ोत्तरी देखी गई है। सैम्पल जिलों में 4 वर्ष के 91.3 प्रतिशत बच्चे और 8 वर्ष के 99.5 प्रतिशत बच्चे नामांकित हैं।
  • एक ही उम्र के बच्चे विभिन्न प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों में नामांकित हैं।
  • यथा, 5 वर्ष के 70 प्रतिशत बच्चे आंगनबाड़ियों में या पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में हैं, लेकिन
  • इसी आयु वर्ग के 21.6 प्रतिशत बच्चे अभी से ही कक्षा 1 में नामांकित हैं।
  • लड़के तथा लड़कियों के नामांकन पैटर्न में भी भिन्नता है।
  • लड़के निजी और लड़कियां सरकारी संस्थानों में ज्यादा नामांकित हैं।
  • 4 और 5 वर्ष के बच्चों में 56.8 प्रतिशत लड़कियां और 50.4 प्रतिशत लड़के सरकारी पूर्व प्राथमिक या प्राथमिक विद्यालयों में नामांकित हैं।
  • जबकि 43.2 प्रतिशत लड़कियां और 49.6 प्रतिशत लड़के निजी पूर्व प्राथमिक या प्राथमिक विद्यालयों में नामांकित हैं।
  • समग्र रूप से लड़कियों में 61.1 प्रतिशत तथा लड़कों में से 52.1 प्रतिशत लड़के सरकारी पूर्व प्राथमिक या प्राथमिक विद्यालयों में नामांकित हैं।
  • पूर्व प्राथमिक विद्यालय जाने वाले बच्चे (4-5 आयु वर्ग)
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीतियां यह सिफारिश करती हैं कि 4 और 5 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में होना चाहिए।
  • 5 वर्ष की आयु में विभिन्न राज्यों में बच्चों के नामांकन प्रतिशत में भिन्नता है।
  • विशेषज्ञों की राय है कि 4-5 वर्ष में बच्चों में सभी कार्यों को करने की क्षमता में वृद्धि होती है।
  • 5 वर्ष के बच्चे संज्ञानात्मक विकास, प्रारंभिक गणित, प्रारंभिक भाषा और सामाजिक और संज्ञानात्मक विकास 4 वर्ष के बच्चों से बेहतर कर पाते हैं।
  • 4 वर्ष की उम्र के लगभग आधे बच्चे तथा 5 वर्ष के उम्र के एक- चौथाई बच्चे आंगनबाड़ियों में नामांकित हैं, किंतु
  • इन बच्चों में निजी विद्यालयों के LKG/UKG कक्षाओं के बच्चों की अपेक्षा संज्ञानात्मक कौशल और बुनियादी क्षमताएं कम विकसित हैं।
  • 4-5 वर्ष की आयु वर्ग के ऐसे बच्चे जिनकी माताओं ने 8 वर्षों की या उससे कम वर्षों की स्कूली शिक्षा ली है, के आंगनबाड़ियों या सरकारी पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में नामांकन की संभावना अधिक है।
  • ‘अर्ली’ प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे (कक्षा 1, 2, 3)
  • कक्षा 1 में प्रवेश के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE : Right to Education Act), 2009 द्वारा निर्धारित उम्र 6 वर्ष है, किंतु
  • कक्षा 1 में मात्र 41.7 प्रतिशत बच्चे ही उपर्युक्त अधिनियम द्वारा निर्धारित आयु के नामांकित हैं तथा 21.9 प्रतिशत बच्चे 4 या 5 वर्ष के हैं।
  • कक्षा 3 तक दोनों निजी एवं सरकारी संस्थानों में अधिकांश बच्चे 7 या 8 वर्ष के हैं।
  • कक्षा 1 के स्तर का पाठ पढ़ने की क्षमता कक्षा 1 से 3 तक विकसित होती रहती है।
  • कक्षा 1 में 41.1 प्रतिशत बच्चे 2 अंकों की संख्या पहचान सकते हैं, जबकि कक्षा 3 में 72.2 प्रतिशत बच्चे 2 अंकों की संख्या पहचान सकते हैं।
  • जबकि NCERT के विनिर्देश के अनुसार, कक्षा 1 में 99 तक की संख्याएं पहचानने में बच्चों को सक्षम होना चाहिए।
  • कक्षा 3 में जो बच्चे 3 संज्ञानात्मक (Cognitive) कार्यों को सही कर पाए, उनमें से 63.2 प्रतिशत बच्चे कक्षा 1 के स्तर का पाठ पढ़ने में सक्षम थे।
  • नीति निहितार्थ (Policy Implications)
  • असर-2019 ‘अर्ली इयर्स’ से तीन प्रमुख निहितार्थ निकलते हैं –
  • आंगनबाड़ियां बहुत बड़े अनुपात में छोटे बच्चों के लिए पूर्व प्राथमिक कक्षाओं से पहले उन्हें विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। इन्हें और सशक्त बनाने की आवश्यकता है।
  • संज्ञानात्मक विकास, प्रारंभिक भाषा व गणित एवं सामाजिक और भावनात्मक विकास में बच्चों के प्रदर्शन पर उनकी आयु का भी प्रभाव है।
  • असर-2019 के आंकड़ों से बच्चों के प्रारंभिक भाषा और गणित के प्रदर्शन पर उनके संज्ञानात्मक कौशल का प्रभाव दिखाई देता है।
  • अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
  • भारत की एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS : Integrated Child Development Service), 1975 से संचालित विश्व की सबसे पुरानी तथा विस्तृत योजना है, जो बच्चों के पूर्व बाल्यावस्था (Early Childhood) के देखभाल व विकास पर केंद्रित है।
  • वर्ष 2013 में भारत सरकार ने बच्चों के पूर्व बाल्यावस्था के विकास के लिए एक अन्य योजना राष्ट्रीय पूर्व-बाल्यावस्था शिक्षा एवं देखभाल अधिनियम (National Early Childhood Care and Education : NECCE), 2013 प्रारंभ किया।
  • वर्ष 2014 में भारत सरकार ने NECCE का ढांचा (Framework) तैयार किया। जिसके अंतर्गत पहली बार पूर्व प्राथमिक शिक्षा को समग्र शिक्षा ढांचे के अंतर्गत लाया गया।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2019 पूर्व-बाल्यावस्था शिक्षा के महत्व को रेखांकित करती है तथा पूर्व प्राथमिक शिक्षा के विकास के लिए दिशा-निर्देश (Guidelines) भी उपलब्ध करवाती है।

सं. अमित त्रिपाठी