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112 बहिर्ग्रहों का नामकरण

International Astronomical Union
  • वर्तमान परिपे्रक्ष्य
  • 17 दिसंबर‚ 2019 को ‘अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ’ (IAU) द्वारा पेरिस में 112 बहिर्ग्रहों एवं उनके मेजबान तारों के नामों की घोषणा की गई।
  • उल्लेखनीय है कि IAU के 100वें स्थापना दिवस समारोहों के अंग के रूप में आयोजित ‘नेमएक्सोवल्ड्‌र्स’ (NameExoWorlds) नामक एक वैश्विक प्रतियोगिता के माध्यम से इन बहिर्ग्रहों एवं उनके मेजबान तारों का चुनाव किया गया था।
  • इस प्रतियोगिता में विश्व के 112 देशों ने प्रतिभाग किया‚ जिसके तहत 780,000 से अधिक लोगों ने नामों का सुझाव दिया।
  • भारत में इस अभियान का संचालन ‘भारतीय ज्योतिर्विज्ञान परिषद’ (ASI : Astronomical Society of India) की ‘पब्लिक आउटरीच एंड एजुकेशन कमेटी’ द्वारा किया गया।
  • नेमएक्सोवल्ड्‌र्स प्रतियोगिता के तहत भारत को HD 86081 नामक तारे एवं उसकी परिक्रमा करने वाले बहिर्ग्रह HD 86081b के नाम सुझाने थे।
  • सेक्सटेंस तारामंडल (Sextans Constellation) में स्थित सफेद-पीले तारे HD 86081 को ‘बिभा’ (Bibha) नाम दिया गया है।
  • यह नाम प्रख्यात भारतीय महिला वैज्ञानिक बिभा चौधरी के सम्मान में रखा गया है‚ जिन्होंने अवपरमाणुक कण (Subatomic Particle) पाई-मेसॉन (Pi-meson) की खोज की थी।
  • ज्ञातव्य है कि बंगाली भाषा में बिभा का अर्थ होता है – ‘एक दीप्तिमान प्रकाश पुंज’ (A bright beam of light)।
  • जबकि HD 86081b बहिर्ग्रह का नाम संतमस (Santamasa) रखा गया है‚ जो इसके वायुमंडल की मेघयुक्त प्रकृति को प्रतिबिम्बित करता है।
  • ज्ञातव्य है कि ‘संतमस’‚ मेघमय (Clouded) के लिए संस्कृत शब्द है।
  • छात्रों द्वारा सुझाए गए नाम
  • बिभा नाम सूरत स्थित सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के 22 वर्षीय छात्र अनन्यो भट्टाचार्य ने सुझाया था।
  • जबकि बहिर्ग्रह के लिए संतमस नाम का सुझाव पुणे स्थित सिंहगढ़ स्प्रिंग डेल पब्लिक स्कूल के 13 वर्षीय छात्र विद्यासागर दाउद ने दिया था।
  • HD 86081 ग्रहीय प्रणाली
  • पृथ्वी से लगभग 340 प्रकाश वर्ष दूर HD 86081 तारा‚ सूर्य की तुलना में अधिक गर्म‚ बड़ा एवं पुराना है।
  • यह एक पीला-सफेद बौना तारा है‚ जो सेक्सटेंस तारामंडल में स्थित है।
  • यह हमारे सूर्य की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक विशाल है।
  • इसकी सतह का तापमान 6028 °k तक पहुंच जाता है‚ जो इसे पीला रंग प्रदान करता है।
  • HD 86081 b नामक बहिर्ग्रह की खोज 17 अप्रैल‚ 2006 को 10 मीटर श्रेणी के डब्ल्यू.एम. केक दूरबीन (W.M. Keck telescope) द्वारा की गई थी।
  • यह बहिर्ग्रह आकार एवं द्रव्यमान में बृहस्पति ग्रह के समान दिखाई पड़ता है‚ परंतु ठंडे ग्रह बृहस्पति के विपरीत यह बहुत गर्म है।
  • यह बहिर्ग्रह इतना गर्म है कि इस पर स्वर्ण (Gold) और यहां तक कि लोहा (Iron) तक पिघल सकता है।
  • यह बहुत निकट से अपने मेजबान तारे की परिक्रमा करता है तथा केवल दो पृथ्वी दिवसों (Earth Days) में ही अपने तारे के चारों ओर एक परिक्रमण पूरा कर लेता है।
  • यह विशाल बहिर्ग्रह पूरी तरह एक गैसीय ग्रह है।
  • बिभा चौधरी
  • वर्ष 1913 में जन्मीं बिभा चौधरी एक प्रसिद्ध भारतीय भौतिकविद थीं।
  • इन्होंने मूल कण भौतिकी (Elementary Particle Physics) तथा ब्रह्मण्डीय किरणों के क्षेत्र में अद्वितीय अनुसंधान संचालित किया।
  • दार्जिलिंग में अपने प्रतिपालक (Mentor) डी.एम. बोस के साथ अनुसंधान संचालित करने के दौरान इन्होंने एक नए अवपरमाणुक कण पाई-मेसॉन की खोज की और इसे ‘नेचर’ (Nature) नामक पत्रिका में प्रकाशित किया।
  • परंतु इन्हें इस खोज के लिए मान्यता नहीं प्राप्त हुई।
  • राजिंदर सिंह एवं सुप्रकाश सी. रॉय द्वारा लिखित पुस्तक ‘अ ज्वेल अनअर्थड्‌ : बिभा चौधरी’ (A Jewel Unearthed : Bibha Chowdhuri) में इनके जीवन का वर्णन किया गया है।
  • जून‚ 1991 में इनकी मृत्यु हो गई थी।
  • पंडित जसराज के नाम पर क्षुद्रग्रह
  • 23 सितंबर‚ 2019 को ‘अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ’ (IAU : International Astronomical Union) द्वारा जारी एक वक्तव्य के अनुसार‚ वर्ष 2006 में खोजे गए एक क्षुद्रग्रह (Asteroid) का नामकरण प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय गायक ‘पंडित जसराज’ के नाम पर किया गया है।
  • 2006 VP32 नामक इस क्षुद्रग्रह को अब ‘पंडित जसराज (300128)’ नाम से जाना जाएगा।
  • ज्ञातव्य है कि क्षुद्रग्रह का क्रमांक 300128, वास्तव में पंडित जसराज की जन्मतिथि (28-01-30) का विपरीत (Reverse) क्रम है।
  • मंगल एवं बृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के मध्य स्थित इस क्षुद्रग्रह की खोज 11 नवंबर‚ 2006 को ‘कैटेलीना स्काई सर्वेक्षण’ (Catalina Sky Survey) के माध्यम से की गई थी।
  • उल्लेखनीय है कि इस सर्वेक्षण में शामिल दोनों दूरबीन अमेरिका के एरिजोना में स्थित हैं।
  • प्द्म विभूषण की उपाधि से सम्मानित पंडित जसराज पहले भारतीय संगीतज्ञ हैं‚ जिनके नाम पर किसी ग्रह/क्षुद्रग्रह का नाम रखा गया है।