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होंडुरास द्वारा संयुक्त राष्ट्र नाभिकीय हथियार प्रतिबंध संधि का अनुसमर्थन

Honduras ratifies UN nuclear weapons ban treaty
  • वर्तमान संदर्भ
  • 24 अक्टूबर‚ 2020 की होंडुरास ‘संयुक्त राष्ट्र नाभिकीय हथियार प्रतिबंध संधि’ (UN Treaty on the Prohibition of Nuclear Weapons : TPNW) का अनुसमर्थन करने वाला 50वां देश बना।
  • इसी के साथ इस संधि को लागू करने के लिए आवश्यक 50 देशों का अनुसमर्थन प्राप्त हो गया।
  • नाभिकीय हथियारों को प्रतिबंधित करने वाली यह पहली अंतरराष्ट्रीय संधि है‚ जो 22 जनवरी‚ 2021 से लागू की जाएगी।
  • संयुक्त राष्ट्र की इस नाभिकीय हथियार प्रतिबंध संधि पर अभी तक 84 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं।
  • ध्यातव्य है कि इस संधि पर 50वां अनुसमर्थन संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के 75वीं जयंती पर किया गया‚ जो कि एक ऐतिहासिक प्रसंग है।
  • संयुक्त राष्ट्र नाभिकीय हथियार प्रतिबंध संधि (TPNW)
  • ‘नाभिकीय हथियार प्रतिबंध संधि’ को 7 जुलाई‚ 2017 को संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा नाभिकीय हथियारों को प्रतिबंधित करने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी साधन के रूप में अपनाया गया था।
  • इस संधि को 20 सितंबर‚ 2017 से संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर के लिए खोल दिया गया था।
  • इस संधि के प्रथम अनुच्छेद के अनुसार : संधि में शामिल सभी देश नाभिकीय हथियारों का विकास‚ परीक्षण‚ विनिर्माण या अन्यथा इनकी प्राप्ति‚ अधिग्रहण या स्टॉक नहीं करेगा।
  • नाभिकीय हथियारों का प्रत्यक्ष या परोक्ष अंतरण या नियंत्रण नहीं करेगा।
  • किसी भी नाभिकीय विस्फोटकों के तैनात करने (Stationing), प्रतिष्ठापित करने या परिनियोजित करने (Deployment) से प्रतिबंधित करता है।
  • संधि का अनुच्छेद 5‚ संधि का अनुसमर्थन करने वाले देशों को इस संधि की वचनबद्धता (Obligation) को लागू करने के लिए आवश्यक सभी उपायों को अपनाएगा।
  • संधि के अनुच्छेद 6 के अनुसार‚ संधि का अनुसमर्थन करने वाले सभी देशों द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत शामिल व्यक्तियों‚ जो परमाणु परीक्षणों या उनके उपयोग से प्रभावित होते हैं :
  • उनकी मानवीय सहायता बिना किसी लैंगिक या अन्य प्रकार के भेदभाव के करनी होगी
  • उन्हें चिकित्सीय सहायता‚ पुनर्वास तथा मनोवैज्ञानिक सहायता के साथ ही साथ उनका सामाजिक-आर्थिक समावेशन भी करना होगा।
  • अनुच्छेद 10 के अनुसार‚ संधि के लागू होने के पश्चात कोई भी सदस्य देश संधि में संशोधन का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासचिव को कर सकेगा। महासचिव अन्य देशों को तत्संबंध में सूचित करेंगे।
  • सदस्य देशों के मध्य किसी विवाद के उत्पन्न होने पर उसका निस्तारण संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 33 के तहत किया जाएगा।
  • अनुच्छेद 15 के अनुसार‚ 50 देशों के अनुसमर्थन के बाद 90 दिनों के भीतर यह संधि प्रभाव में आ जाएगी।
  • अनुच्छेद 17 के अनुसार‚ इस संधि की अवधि सीमा असीमित होगी। कोई भी सदस्य देश जिसे यह महसूस हो कि संधि में शामिल रहने से उस देश के सर्वोच्च हित प्रभावित हो रहे हैं‚ एक नोटिस के माध्यम से अपनी सदस्यता को वापस ले सकता है।
  • TPNW के प्रति आशंकाएं
  • अमेरिका का इस संधि के प्रति विरोधी रवैया संधि के सार्वभौमिक रूप से लागू होने के प्रति आशंका व्यक्त करता है।
  • ज्ञातव्य हो कि अमेरिका की ट्रम्प सरकार ने अपनी सदस्यता को अनुसमर्थन को रद्द करने का आग्रह करते हुए हस्ताक्षरकर्ता राष्ट्रों को संबोधित करते हुए लिखा है कि ‘उन्होंने (अमेरिका) संधि का अनुसमर्थन करके एक रणनीतिक त्रुटि की है’।
  • अमेरिका का यह भी कहना है कि पांचों परमाणु शक्तियां – अमेरिका‚ रूस‚ चीन‚ फ्रांस‚ ब्रिटेन तथा अमेरिका के नाटो सहयोगी भी उसके इस विचार से सहमत हैं।
  • साथ ही TPNW के संबंध में उसका यह भी कहना है कि वैश्विक परमाणु अप्रसार प्रयासों की आधारशिला मानी जाने वाली ‘परमाणु अप्रसार संधि’ (NPT) के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए भी हानिकारक होगी।
  • इन सबके बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने TPNW संधि का समर्थन करते हुए इसे बहुत ही स्वागत योग्य पहल (Initiative) कहा है।

    TPNW का अनुसमर्थन करने वाले राष्ट्र

    क्रम सं.देशअनुसमर्थन की तिथि
    1.एनटिगा और बरबूडा25 नवंबर‚ 2019
    2.ऑस्ट्रिया8 मई‚ 2018
    3.बांग्लादेश26 सितंबर‚ 2019
    4.बेलीज19 मई‚ 2020
    5.बोलिविया6 अगस्त‚ 2019
    6.बोत्सवाना15 जुलाई‚ 2020
    7.कुक द्वीपसमूह4 सितंबर‚ 2018
    8.कोस्टारिका5 जुलाई‚ 2018
    9.क्यूबा30 जनवरी‚ 2018
    10.डोमिनिका18 अक्टूबर‚ 2019
    11.इक्वाडोर25 सितंबर‚ 2019
    12.एल सल्वाडोर30 जनवरी‚ 2019
    13.फिजी7 जुलाई‚ 2020
    14.गाम्बिया26 सितंबर‚ 2018
    15.गुयाना20 सितंबर‚ 2017
    16.होली सी20 सितंबर‚ 2017
    17.होंडुरास24 अक्टूबर‚ 2020
    18.आयरलैंड6 अगस्त‚ 2020
    19.जमैका23 अक्टूबर‚ 2020
    20.कजाख्स्तान29 अगस्त‚ 2019
    21.किरीबाटी26 सितंबर‚ 2019
    22.पीपुल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक26 सितंबर‚ 2019
    23.लेसोथो6 जून‚ 2020
    24.मलेशिया30 सितंबर‚ 2020
    25.मालदीव26 सितंबर‚ 2019
    26.माल्टा21 सितंबर‚ 2020
    27.मेक्सिको16 जनवरी‚ 2018
    28.नामीबिया20 मार्च‚ 2020
    29.नौरू23 अक्टूबर‚ 2020
    30.न्यूजीलैंड31 जुलाई‚ 2018
    31.निकारागुआ19 जुलाई‚ 2018
    32.नाइजीरिया6 अगस्त‚ 2020
    33.नीव (Nive)6 अगस्त‚ 2020
    34.वेनेजुला27 मार्च‚ 2018
    35.पलाऊ3 मई‚ 2018
    36.पनामा11 अप्रैल‚ 2019
    37.पराग्वे23 जनवरी‚ 2020
    38.समोआ26 सितंबर‚ 2018
    39.सैनमैरिनो26 सितंबर‚ 2018
    40.वियतनाम17 मई‚ 2018
    41.दक्षिण अफ्रीका25 फरवरी‚ 2019
    42.सेंट किंट्‌स और नेविस9 अगस्त‚ 2020
    43.सेंट लुईसिया23 जनवरी‚ 2019
    44.सेंट विन्सेंट और ग्रेनेडाइन31 जुलाई‚ 2019
    45.फिलिस्तीन22 मार्च‚ 2018
    46.थाईलैंड20 सितंबर‚ 2017
    47.ट्रिनिडाड व टोबैगो26 सितंबर‚ 2019
    48.तुवालु12 अक्टूबर‚ 2020
    49.उरुग्वे25 जुलाई‚ 2018
    50.वनुवातु26 सितंबर‚ 2018
    • निष्कर्ष
    • संयुक्त राष्ट्र नाभिकीय हथियार प्रतिबंध संधि (TPNW) का लागू होना परमाणु अस्त्र विहीन विश्व की परिकल्पना को साकार करने का एक और द्वार मात्र है। आवश्यकता इस महत्वपूर्ण विषय पर संपूर्ण विश्व की सहमति और परमाणु हथियारों का समूल उन्मूलन करना है। किंतु पांच परमाणु महाशक्तियों में से किसी का भी इस संधि का अनुसमर्थन न करना‚ दुर्भाग्यपूर्ण है। वैसे भी संसार कितना भी परमाणु अस्त्रों को शक्ति संतुलन और ‘वेपन फॉर पीस’ (Weapon for Peace- शांति के लिए अस्त्र) की संज्ञा देकर अभिहित हो‚ किंतु सत्य यह है कि हथियार बने हैं‚ तो उनका प्रयोग होगा (इतिहास से इस कथन की पुष्टि होती है)। अत: इन हथियारों का नष्ट होना अनिवार्य है‚ अन्यथा मानवता को नष्ट होने के लिए तैयार रहना होगा। राष्ट्र द्वारा TPNW संधि को लागू किया जाना मानव संस्कृति को बचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

    सं.  अमित त्रिपाठी

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