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हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन (HCFC)-141बी

Hydrochlorofluorocarbon (HCFC) -141B
  • पृष्ठभूमि
  • भारत ने सबसे शक्तिशाली ओजोन-क्षयकारी रासायनिक पदार्थों में से एक हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन (Hydrochlorofluoro Carbon : HCFC)-141बी के प्रयोग को 1 जनवरी‚ 2020 तक चरणबद्ध तरीके से हटा लिया है।
  • हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन (HCFC)-141बी‚ क्लोरोफ्लोरो कार्बन (Chlorofluoro Carbon : CFCs) के बाद दूसरा सबसे ज्यादा ओजोन क्षयकारी पदार्थ है।
  • पर्यावरण वन एवं जलवायु मंत्रालय ने 31 दिसंबर‚ 2019 को 1 जनवरी‚ 2020 से हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन-141बी के लिए आयात लाइसेंस जारी करने पर रोक लगाने हेतु एक अधिसूचना जारी की थी।
  • ओजोन क्षयकारी पदार्थों के उत्सर्जन को रोकने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol) वर्ष 1987 में बनाया गया।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन परत को संरक्षित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से ओजोन क्षयकारी पदार्थों के उत्सर्जन को रोकने का प्रावधान करता है।
  • भारत मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल संधि का हस्ताक्षरकर्ता देश है‚ अत: यह ओजोन क्षयकारी पदार्थों के उत्सर्जन को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन (HCFCs)
  • ये फ्लोरीन आधारित गैसों की द्वितीय पीढ़ी की गैसें हैं‚ जिनका क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFCs) के विस्थापन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन (HCFCs) के मुख्य उत्पादों में HCFC-22, HCFC-123, HCFC-124, HCFC-141बी और HCFC-142बी हैं।
  • हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन गैसों का मुख्य प्रयोग प्रशीतन (Refrigeration), फोम (Foam)‚ विलायक (Soluents) और अग्नि शमन यंत्र बनाने वाले उद्योगों में किया जाता है।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का एक प्रमुख एजेंडा वर्ष 2030 तक हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन (HCFCs) के उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से बाहर करने का है।
  • हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन-141बी
  • इसका प्रमुख उपयोग फोम निर्माण के क्षेत्र में किया जाता है।
  • हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन-141बी मुख्य रूप से कठोर पॉलीयूरेथेन (Polyurethane) फोम के उत्पादन में एक धमन कर्मक (Blowing Agent) के रूप में कार्य करता है।
  • इसका उत्पादन भारत में नहीं किया जाता है‚ अत: सभी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसका आयात किया जाता है।
  • भारत में ओजोन-क्षयकारी रसायनों की कुल खपत का लगभग 50 प्रतिशत हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन-141बी रसायन के कारण होता है।
  • हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन-141बी के रासायनिक उपयोग को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए एक हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन फेज आउट मैनेजमेंट प्लान (HPMP) को अपनाया गया।
  • इस योजना के तहत फोम निर्माताओं में गैर-ओजोन क्षयकारी पदार्थ (Non-ODS) और निम्न वैश्विक तापन क्षमता (Global Warming Potential) वाली प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाया गया है।
  • 175 से अधिक फोम विनिर्माण उद्यमों को हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन फेज आउट योजना के तहत कवर किया गया है‚ जिसमें से 163 उद्यम एचपीएमपी (HPMP) के द्वितीय चरण के तहत आते हैं।
  • एचपीएमपी (HPMP) तथा प्रौद्योगिकी रूपांतरण परियोजनाओं के कार्यान्वयन से देश में वर्ष 2009 और 2010 तक बेसलाइन स्तर से हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन-141बी की लगभग 7800 मीट्रिक टन मात्रा को हटा दिया गया है।
  • महत्व
  • भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है‚ जो ऐसी प्रौद्योगिकी के विकास और उपयोग का समर्थक है‚ जो निम्न वैश्विक तापन क्षमता और गैर-ओजोन क्षयकारी प्रकृति की हैं।
  • विकासशील देशों में हाइड्रोक्लोरोफ्लोरो कार्बन-141बी का उपयोग पूरी तरह से समाप्त करने वाला भारत पहला देश है।
  • लाभ
  • यह योजना समतापमंडल में ओजोन परत के क्षरण को रोकने में सहायक होगी।
  • जलवायु परिवर्तन से लड़ने के प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा‚ क्योंकि सभी फोम विनिर्माण उद्यम निम्न वैश्विक तापन प्रौद्योगिकी की ओर रुख करेंगे।

संविजय सिंह