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स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2021

Swachh Survekshan 2021
  • वर्तमान परिपे्रक्ष्य
  • स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2021 की शुरुआत केंद्रीय मंत्री (आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय) हरदीप सिंह पुरी के द्वारा 3 जुलाई‚ 2020 को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत की गई है।
  • पृष्ठभूमि
  • शहरी स्वच्छता में सुधार लाने हेतु शहरों को प्रोत्साहित करने के लिए एक प्रस्ताव के रूप में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने जनवरी‚ 2016 में 73 शहरों की रेटिंग के लिए ‘स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2016’ का आयोजन किया था।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2016 की सफलता को देखते हुए जनवरी-फरवरी‚ 2017 में 434 शहरों में स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2017 का आयोजन किया गया।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2018 दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छता सर्वेक्षण था‚ जिसमें 4203 शहरों को रैंकिंग में शामिल किया गया।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2019 में न केवल 4237 शहरों को शामिल किया गया‚ अपितु इसे 28 दिनों के रिकॉर्ड समय में पूरा भी कर लिया गया‚ जो कि अपनी तरह का पहला डिजिटल स्वच्छता सर्वेक्षण भी था।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2020 में भी स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2019 की गति को बनाए रखा गया और इसमें 1.87 करोड़ नागरिकों की अभूतपूर्व भागीदारी रही।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2021 अपने क्रम का 6वां संस्करण है। स्वच्छता सर्वेक्षण वार्षिक आधार पर किया जाता है।
  • इस वर्ष केंद्र सरकार द्वारा पुरस्कार की नई श्रेणी की घोषणा भी की गई है‚ जिसका नाम है ‘प्रेरक दौड़ सम्मान’। इस सम्मान के तहत पांच अतिरिक्त उप श्रेणी होंगी-

      1.   दिव्य — प्लैटिनम (प्लैटिनम)

      2.   अनुपम — गोल्ड (स्वर्ण)

      3.   उज्ज्वल — सिल्वर (रजत)

      4.   उदित — ब्रॉन्ज (कांस्य)

      5.   आरोही — एस्पायरिंग (आकांक्षी)

  • केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2021 के लिए टूलकिट लांच करते हुए कहा कि प्रत्येक वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण के नए मानकों को नवोन्मेषी तरीके से पुन: तैयार किया जाता है ताकि व्यवहारगत बदलाव पर केंद्रित होते हुए प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2021 के संकेतकों को मुख्य रूप से ‘अपशिष्ट जल उपचार’ एवं ‘मल-कीचड़ के पुर्नउपयोग’ पर केंद्रित बनाया गया है।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण‚ 2021 का उद्देश्य
  • विदित हो कि वर्तमान में भी बहुत से ऐसे शहर और कस्बे हैं‚ जहां साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाता है। वैश्विक महामारी कोविड-19 के प्रभावों को कम करने में स्वच्छता एक अहम भूमिका में है।
  • इस वर्ष के सर्वेक्षण के अंतर्गत गीले‚ शुष्क और खतरनाक अपशिष्ट को अलग करने‚ गीले अपशिष्ट की निपटान की प्रक्रिया‚ गीले और शुष्क अपशिष्ट का निपटान और पुनर्चक्रण‚ निर्माण मलबा निस्तारण‚ कचरा स्थल पर फेंके जाने वाले कचरा की मात्रा और शहरों की स्वच्छता की स्थिति पर ध्यान दिया जाएगा‚ जिससे देश को स्वच्छ रखा जा सके।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण के अंतर्गत शहर संकेतक का वर्गीकरण
  • यह सर्वेक्षण सूचक-वार प्रदर्शन मानदंडों के आधार पर शहरों को वर्गीकृत करेगा। इसके वर्गीकरण में निम्न सूचक शामिल होंगे-

1. कचरे को गीला‚ सूखा और खतरनाक श्रेणियों में विभाजित करना‚

2. उत्पन्न गीले कचरे के खिलाफ प्रसंस्करण क्षमता‚

3. गीले और सूखे कचरे का प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण‚

4. निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रसंस्करण‚

5. लैंडफिल (भूमि भराव) में जाने वाले कचरे का प्रतिशत तथा

6. शहरों की स्वच्छता स्थिति।

  • निष्कर्ष
  • यह स्वच्छ भारत सर्वेक्षण देशभर के सभी शहरों और कस्बों में किया जाएगा। इस वर्ष के सर्वेक्षण में कचरा मुक्त और खुले में शौच मुक्त शहरों पर ध्यान दिया जाएगा। पिछले वर्षों के सर्वेक्षणों में नागरिक भागीदारी पर अधिक जोर दिया गया था‚ जिसके बेहतर परिणाम आए थे। ध्यातव्य है कि संपूर्ण विश्व में जिस प्रकार कोविड-19 महामारी फैली है‚ इस स्थिति में भारत सरकार के द्वारा की गई इस पहल से आम भारतीय जनमानस पर गंदगी के दुष्प्रभाव और महामारी की प्रत्याशा को कम किया जा सकता है।

विभव कृष्ण पांडेय