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सुपोषित मां अभियान

Well-nourished mother campaign
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 1 मार्च, 2020 को महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी की उपस्थिति में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला द्वारा भामाशाह मंडी परिसर, कोटा (राजस्थान) से ‘सुपोषित मां अभियान’ प्रारंभ किया गया।
  • यह योजना कोटा के बूंदी संसदीय क्षेत्र से प्रारंभ की गई है, जो कि लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला का संसदीय क्षेत्र है।
  • योजना से संबंधित तथ्य
  • इस अभियान के पहले चरण में 12 महीनों के लिए 1000 गर्भवती माताओं को 17 किलोग्राम संतुलित आहार की किट प्रदान की जाएगी।
  • यह अभियान गर्भवती माताओं और किशोरियों के लिए पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराएगा।
  • इस अभियान के माध्यम से नवजात शिशु और गर्भवती माताओं दोनों को आच्छादित किया गया है।
  • इस अभियान के प्रथम चरण की शुरुआत पायलट योजना के तौर पर 1000 महिलाओं के साथ की गई है। बाद में इसे अन्य चरणों के तहत संपूर्ण भारत में लागू किया जाएगा।
  • सुपोषित मां अभियान किट में गेहूं, चना, मक्का, ज्वार और बाजरे का आटा, गुड़, दलिया, दाल, मूंगफली, देशी घी, भूने हुए दाने और अन्य पोषक आहार शामिल होंगे।
  • इस योजना में एक परिवार की एक गर्भवती माता शामिल होगी।
  • इस योजना का क्रियान्वयन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।
  • इस योजना को अन्य केंद्र प्रायोजित योजना (महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण से संबंधित) के साथ समानांतर रूप से संचालित किया जाएगा।
  • योजना का उद्देश्य
  • यह अभियान भारत में व्याप्त पोषण अल्पता को दूर करने के लिए शुरू किया गया है।
  • यह अभियान भावी पीढ़ियों को स्वास्थ्य और उचित पोषण लाभ प्रदान करने के लिए शुरू किया गया है।
  • इसका उद्देश्य गर्भवती माताओं, नवजात शिशुओं और किशोरियों का संपूर्ण विकास सुनिश्चित करना है।
  • अन्य योजनाएं (पोषण से संबंधित)
  • पोषण अभियान
  • पोषण अभियान (पूर्व नाम राष्ट्रीय पोषण मिशन) के द्वारा वर्ष 2022 तक कुपोषण मुक्त भारत की प्राप्ति सुनिश्चित करना है।
  • पोषण अभियान एक बहु-मंत्रालयी मिशन है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा संचालित किया जा रहा है।
  • एकीकृत योजनाओं की विद्यमान कमियों को दूर करने और समान लक्ष्य की प्राप्ति हेतु पोषण अभियान प्रारंभ किया गया है। इसमें सभी तंत्रों और घटकों को संपूर्णता में सम्मिलित किया गया है।
  • इसका प्रमुख उद्देश्य एकीकृत बाल विकास सेवाओं (ICDS) में सुधार करके भारत के चिह्नित जिलों में स्टंटिंग को कम करना है।
  • इस अभियान में स्टंटिंग के अतिरिक्त गर्भवती माताओं और सद्यःप्रसूताओं एवं उनके नवजात शिशुओं हेतु संपूर्ण विकास एवं पोषण लाभ सुनिश्चित करना है।
  • राष्ट्रीय पोषण मिशन
  • इस मिशन को वर्ष 2022 तक निम्नलिखित लक्ष्य प्राप्त करने हैं-

      1. 15-49 वर्ष की महिलाओं  तथा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में वर्तमान एनीमिया के स्तर में वर्ष 2017 से 2022 तक 3 प्रतिशत की वार्षिक कमी लाना।

      2. जन्म के समय शिशुओं के कम वजन में वर्ष 2017 से 2022 तक 2 प्रतिशत की कमी लाना।

      3.   बच्चों की उम्र के अनुपात से कम लंबाई (स्टंटिंग) को वर्ष 2022 तक कम करके 25 प्रतिशत के स्तर पर लाना।

  • सतत विकास लक्ष्य-2 और 3 (2030 तक पोषण लक्ष्य)
  • सतत विकास लक्ष्य-2, शून्य भुखमरी और सतत विकास लक्ष्य-3, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली से संबंधित है।
  • उपर्युक्त लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ जैसे वैश्विक संगठनों द्वारा निम्नलिखित उप-लक्ष्यों को शामिल किया गया है-

1. नवजात शिशुओं के कम वजन को वर्ष 2012 के स्तर से वर्ष 2030 तक 30 प्रतिशत कम करना।

  2.   बच्चों की लंबाई के अनुपात में कम वजन (Child Wasting) को वर्ष 2012 के स्तर से वर्ष 2030 तक 3 प्रतिशत कम करना।

  3.   बच्चों की उम्र के अनुपात में कम लंबाई (Child Stunting) को वर्ष 2012 के स्तर से वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत कम करना।

  4. 5-49 वर्ष तक की महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) को वर्ष 2012 के स्तर से वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत कम करना।

  • निष्कर्ष
  • गर्भधारण करने से लेकर शिशु के जन्म तक माताओं को पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है। भोजन में पोषक तत्वों की पूर्ण उपस्थिति माताओं को गर्भावस्था की कमजोरियों और तनाव से निपटने के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु को आवश्यक पोषण प्रदान करने हेतु जरूरी है।

सं. विभव कृष्ण पाण्डेय