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‘साराभाई क्रेटर’

'Sarabhai Crater'
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 12 अगस्त‚ 2020 को इसरो (ISRO) द्वारा चंद्रमा के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित ‘साराभाई क्रेटर’ (Sarabhai Crater) का चित्र जारी किया गया।
  • डॉ. विक्रम साराभाई के जन्म शताब्दी वर्ष के पूरा होने के अवसर पर इसरो ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ‘साराभाई क्रेटर’ की जानकारी दी है।
  • प्रमुख तथ्य
  • 30 जुलाई‚ 2020 को चंद्रयान-2 के टेरेन मैपिंग कैमरा-2 (TMC-2) के द्वारा साराभाई क्रेटर का 3D चित्र लिया गया था।
  • क्रेटर एक ऐसा गड्ढा होता है‚ जो उल्का पिंड‚ ज्वालामुखी गतिविधियों या विस्फोट के प्रभाव से उत्पन्न होता है।
  • यह चंद्रमा के उत्तर-पूर्वी भाग में मारे सेरेनिटैटिस (Mare Serenitatis) में स्थित है।
  • मारे सेरेनिटैटिस चंद्रमा पर स्थित एक गहरा और डार्क (Dark) क्षेत्र है‚ जिसमें विशाल समतल लावा का मैदान है।
  • इस क्रेटर की औसत गहराई लगभग 1.7 किमी. है तथा क्रेटर की दीवारों का औसत ढाल 25 से 30 डिग्री के बीच है।
  • इस क्रेटर के चित्र से चंद्रमा पर पाए गए लावा के अध्ययन में मदद मिलेगी।
  • इस क्रेटर से लगभग 250 से 300 किमी. पूर्व में नासा के अपोलो-17 और रूस के लूना-17 मिशन का लैंडिंग स्थल है।
  • ज्ञातव्य है कि वर्ष 1974 में सिडनी स्थित अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान संघ (International Astronomical Union) ने निर्णय लिया कि ‘मारे सेरेनिटैटिस’ (Mare Serenitatis) या ‘सी ऑफ सेरेनेटी’ (Sea of Serenitatis) पर स्थित क्रेटर अब ‘साराभाई क्रेटर’ के नाम से जाना जाएगा।
  • डॉ. विक्रम साराभाई :
  • डॉ. विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त‚ 1919 को हुआ था।
  • डॉ. विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक के रूप में जाना जाता है।
  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना (वर्ष 1969) उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
  • उन्होंने 11 नवंबर‚ 1947 को अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) की स्थापना की थी।
  • वर्ष 1963 में भारत के पहले रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन (Thumba Equatorial Rocket Launching Station : TERLS) थुम्बा‚ तिरुवनंतपुरम (केरल) को स्थापित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था।
  • डॉ. विक्रम साराभाई का भारत के पहले भारतीय उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ के निर्माण और प्रक्षेपण की परियोजना शुरू करने में महत्वपूर्ण योगदान था।
  • वर्ष 1966 में डॉ. विक्रम साराभाई को परमाणु ऊर्जा आयोग का अध्यक्ष बनाया गया।

सं. विजय सिंह

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