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व्योममित्र

Vyomitra
  • पृष्ठभूमि
  • हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) ने मानवयुक्त गगनयान मिशन हेतु एक अर्द्ध-मानवीय रोबोट को लांच किया है।
  • 22 जनवरी, 2020 को बंगलुरू में इसरो (ISRO), इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स (IAA) और एस्ट्रोनाटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ASI) के पहले सम्मेलन में इस अर्द्ध-मानवीय महिला रोबोट ने अपना परिचय दिया था।
  • इस अर्द्ध-मानवीय महिला रोबोट का नाम ‘व्योममित्र’ है।
  • दिसंबर, 2021 के अपने बहुप्रत्याशित कार्यक्रम ‘गगनयान मिशन’ से पहले इसरो (ISRO) दो मानवरहित मिशन अंतरिक्ष में भेजेगा।
  • इन मिशनों में चालक दल के सदस्यों के स्थान पर अर्द्ध-मानव रोबोट ‘व्योममित्र’ को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
  • व्योममित्र
  • ‘व्योममित्र’ शब्द संस्कृत भाषा के दो शब्दों ‘व्योम’ और ‘मित्र’ से मिलकर बना है।
  • यह एक अर्द्ध-मानवीय रोबोट है, जिसे महिला का रूप प्रदान किया गया है।
  • इसे अर्द्ध-मानवीय इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इस रोबोट के पैर नहीं हैं। यह सिर्फ आगे और अगल-बगल (Sides) में झुक सकती है।
  • यह रोबोट सेंसर और एक्चयूएटर्स (Actuators) से लैस है।
  • सेंसर रोबोट को वातावरण को समझने और बोलने में मदद करेंगे।
  • कैमरा, स्पीकर और माइक्रोफोन भी सेंसर की मदद से नियंत्रित होते हैं।
  • एक्चयूएटर्स (Actuators) एक तरह की मोटर होती है, जो रोबोट को झुकने, हाथ व उंगलियों को चलाने में मदद करती है।
  • व्योममित्र अंतरिक्ष यात्रियों की तरह काम कर सकेगी। यह बात कर सकती है और मानवीय गतिविधियों को पहचान सकती है।
  • इस रोबोट में असामान्य वातावरण (अधिक या कम ताप एवं दाब) में काम करने की क्षमता है।
  • अंतरिक्ष अभियान में व्योममित्र के कार्य
  • अंतरिक्ष अभियान में लगभग सभी कार्य क्रू-मॉड्यूल (Crew Module) के अंदर ही होते हैं, अधिकतर गतिविधियों में पैरों की आवश्यकता नहीं होती है। अतः इस रोबोट को अर्द्ध-मानव बनाया गया है।
  • अपने अंतरिक्ष अभियान के दौरान यह निम्न गतिविधियों का संचालन करेगी-
  • व्योममित्र अंतरिक्ष अभियान के दौरान गगनयान के यंत्रों की निगरानी करेगी और संबंधित जानकारी नियंत्रण केंद्र को प्रेषित करेगी।
  • अभियान के दौरान यह यान के स्विच पैनल, यान के जीवन रक्षक प्रणाली, क्रू-मॉड्यूल, पैरामीटर्स (Parameters), चेतावनी देना, पर्यावरण नियंत्रण तथा जीवन-रक्षक प्रणाली आदि से संबंधित गतिविधियों का संचालन करेगी।
  • व्योममित्र अंतरिक्ष में विकिरण के उच्च स्तर या असामान्य वातावरण में बिना थके लगातार अनुसंधान कर सकेगी।
  • यह वायुमंडलीय दबाव, ऑक्सीजन की जांच करना और कार्बन डाइऑक्साइड के सिलेंडर बदलना तथा आपातकालीन प्रक्रियाओं का पालन कर अभियान को सुरक्षित करने में मदद करेगी।

ह्यूमनॉयड रोबोट क्या हैं?

  • यह मनुष्य की तरह दिखने वाले रोबोट होते हैं, जिनमें इंसानों की तरह चलने-फिरने के साथ ही मानवीय हाव-भाव को समझने की क्षमता होती है।
  • ये रोबोट मानव चेहरे की सभी विशेषताओं से युक्त होते हैं, जैसे-आंखें और पलक झपकाना, सिर हिलाना और बोलना।
  • ये रोबोट कृत्रिम बुद्धिमत्ता, एल्गोरिद्म डिजाइन से लैस होते हैं।
  • ये रोबोट स्वयं निर्णय लेने में सक्षम नहीं होते हैं, परंतु निर्माता द्वारा प्रविष्ट की गई जानकारी के आधार पर ये सवाल-जवाब कर सकते हैं।

दुनिया के प्रसिद्ध ह्यूमनॉयड

  • अगस्त, 2019 में रूस ने मानवरहित रॉकेट के माध्यम से फेडोर नामक रोबोट को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजा था। फेडोर ने रूसी अंतरिक्ष यात्रियों की मदद की थी।
  • इसी प्रकार वर्ष 2018 में साइमन नामक एक रोबोट अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजा गया था। यह रोबोट अमेरिकी कंपनी एयर बस द्वारा बनाया गया था।
  • वर्ष 2011 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने रोबोनाट-2 को अंतरिक्ष में भेजा था।
  • वर्ष 2013 में जापान ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर किरोबो रोबोट को अंतरिक्ष यात्री कोचि वकाटा के साथ भेजा था।
  • जिया जिया एक चीनी ह्यूमनॉयड है, जो बातचीत करने में सक्षम है।
  • जापान की कोडोमोरॉयड टेलीविजन एंकर है। यह कई भाषाएं बोल सकती है तथा समाचार पढ़ने और मौसम की जानकारी देने में सक्षम है।
  • ज्ञात हो कि दुनिया की पहली ह्यूमनॉयड रोबोट नागरिक सोफिया है। जिसे सऊदी अरब ने नागरिकता प्रदान की है। सोफिया ने 11 अक्टूबर, 2017 को संयुक्त राष्ट्र में अपना परिचय दिया था।
  • निष्कर्ष
  • इसरो ने दिन-प्रतिदिन सफलता के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स में भी इसरो ने कई सफल परिणाम दिए हैं। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए व्योममित्र का निर्माण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। व्योममित्र अंतरिक्ष में मनुष्यों की तरह परिस्थितियों को समझने और कार्य करने की क्षमता मानवीय मिशन से पहले के प्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। गगनयान मिशन के दौरान यह अंतरिक्ष यात्रियों के सहयात्री के रूप में मददगार साबित होगी। इस प्रकार की तकनीक के सफल प्रयोग से भारत न सिर्फ शीर्ष देशों में शामिल हो जाएगा, बल्कि यह भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़त दिलाने में मददगार भी साबित होगा।

सं. विजय सिंह