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वैश्विक ई-कचरा निगरानी रिपोर्ट, 2020

Global e-waste monitoring report, 2020
  • पृष्ठभूमि
  • जुलाई, 2020 में संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय (United Nations University : UNU) द्वारा ‘वैश्विक ई-कचरा निगरानी रिपोर्ट, 2020’ का तीसरा संस्करण जारी किया गया।
  • यह रिपोर्ट वैश्विक ई-कचरा निगरानी आंकड़ों पर एक व्यापक अंतर्दृष्टि डालती है।
  • वैश्विक ई-कचरा निगरानी रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU), अंतरराष्ट्रीय ठोस अपशिष्ट संघ (ISWA) और संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय (UNU) के द्वारा मिलकर तैयार की जाती है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) एक सहयोगी है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और जर्मन आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय (BMZ) ने भी इस वर्ष महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदु
  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 में दुनिया ने 53.6 मिलियन मीट्रिक टन ई-कचरे का उत्पादन किया है। यह औसतन 7.3 किलोग्राम प्रति व्यक्ति है।
  • वर्ष 2014 से वर्ष 2019 तक वैश्विक कचरे में 9.2 मिलियन मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है और वर्ष 2030 तक बढ़कर इसके 74.7 मिलियन मीट्रिक टन होने का अनुमान है।
  • वैश्विक ई-कचरे में वर्ष 2014 के मुकाबले वर्ष 2030, मात्र 16 वर्ष में दोगुना होने का अनुमान है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट (Electrical and Electronic Equipment : EEE) की खपत प्रति वर्ष औसतन 2.5 मिलियन मीट्रिक टन बढ़ रही है।
  • औपचारिक दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2019 में ई-कचरे का संग्रह एवं पुनर्चक्रण 9.3 मिलियन मीट्रिक टन था, जो कि कुल ई-कचरे का 17.4 प्रतिशत था।
  • ई-कचरे के संग्रहण एवं पुनर्चक्रण में वर्ष 2014 के बाद से 1.8 मिलियन मीट्रिक टन की वार्षिक वृद्धि हुई, जो कि लगभग 0.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि है।
  • वर्ष 2014 के बाद से ई-कचरा प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नीति का निर्माण करने वाले देशों की संख्या 61 से बढ़कर 78 हो गई है।
  • वर्ष 2019 में उत्पन्न वैश्विक ई-कचरे में कच्चे माल का मूल्य लगभग 57 बिलियन डॉलर के बराबर है, जिसमें सबसे ज्यादा स्वर्ण, तांबा और लौह धातुएं योगदान करती हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 में ई-कचरा उत्पन्न करने में एशिया महाद्वीप (24.9 मी. टन) पहले स्थान पर है।
  • सबसे ज्यादा ई-कचरा उत्पादित करने वाले देशों में चीन (10.12 मी. टन), अमेरिका (6.918 मी. टन) और भारत (3.23 मी. टन) क्रमशः पहले, दूसरे एवं तीसरे स्थान पर हैं।\

महाद्वीपों का आंकड़ा

क्रमांक

महाद्वीप

कुल उत्पादित कचरा (मिलियन मीट्रिक टन में)

औसत (किलोग्राम/व्यक्ति)

1

एशिया

24.9

5.6

2

अमेरिका

13.1

13.3

3

यूरोप

12

16.2

4

अफ्रीका

2.9

2.5

5

ओशीनिया

0.7

16.1

  • अनुपयुक्त फ्रिज और एयर कंडीशनर से वातावरण में लगभग 98 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन-डाइऑक्साइड (CO2) उत्पन्न होती है।
  • यह कुल वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का लगभग 0.3 प्रतिशत है।

सबसे अधिक ईकचरा उत्पादन करने वाले पांच देश

क्रमांक

देश

कचरा 

(मिलियन मीट्रिक टन में)

औसत

(किलोग्राम/व्यक्ति)

1

चीन

10.129

7.2

2

संयुक्त राज्य अमेरिका

6.918

21

3

भारत

3.23

2.4

4

जापान

2.56

20.4

सबसे अधिक औसत (किलोग्राम/व्यक्ति) वाले पांच देश

क्रमांक

देश

औसत (किलोग्राम/व्यक्ति)

1

नॉर्वे

26.0

2

यूनाइटेड किंगडम के ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड

23.9

3

स्विट्जरलैंड

23.4

4

डेनमार्क

22.4

5

नीदरलैंड्स

21.6

  • ई-कचरा क्या है?
  • वह इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (EEE), जो अनुपयुक्त या बेकार हो जाते हैं, ई-कचरा कहलाते हैं। जैसे-पुराने कंप्यूटर, मोबाइल, माउस, रेडियो, टेलीविजन आदि।
  • इन उपकरणों में अनेक खतरनाक रसायन एवं भारी धातुएं जैसे-लेड, पारा, बेरिलियम, क्रोमियम, कैडमियम आदि पाए जाते हैं।
  • यह खतरनाक रसायन एवं भारी धातुएं मानव स्वास्थ के साथ-साथ पर्यावरण पर भी हानिकारक प्रभाव डालती हैं।
  • ई-कचरे का प्रभाव
  • ई-कचरे से मनुष्यों में जनन क्षमता में कमी आती है तथा बच्चों का पूर्ण मानसिक विकास नहीं हो पाता है।
  • ई-कचरे से निकली विभिन्न धातुएं मनुष्य के विभिन्न अंगों पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। जैसे-सीसा-किडनी को प्रभावित करता है।
  • ई-कचरे से उत्पन्न आर्सेनिक व पारा भूमिगत जल में मिलकर जल प्रदूषण का कारण बनते हैं।
  • ई-कचरे को जलाने पर वाष्पशील यौगिक वायु प्रदूषण को जन्म देते हैं।
  • ई-कचरे से मृदा की गुणवत्ता का भी क्षरण होता है।
  • ई-कचरे से निकली धातुएं जलीय पारितंत्र में संचित होकर मिनिमाता जैसी बीमारियों को जन्म देती हैं।
  • भारत में ई-कचरे से संबंधित अधिनियम
  • ई-कचरा प्रबंधन नियम, 2016
  • खतरनाक अपशिष्ट (प्रबंधन एवं संचालन) नियम, 2002
  • बायो मेडिकल अपशिष्ट (प्रबंधन एवं संचालन) नियम, 2002
  • राष्ट्रीय पर्यावरण अधिकरण अधिनियम, 1995

सं. विजय सिंह