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वित्तीय समावेशन हेतु राष्ट्रीय कार्यनीति, 2019-2024

National Strategy for Financial Inclusion, 2019-2024
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 10 जनवरी, 2020 को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वित्तीय समावेशन हेतु राष्ट्रीय कार्यनीति पर दस्तावेज जारी किया गया।
  • इस राष्ट्रीय कार्यनीति को वित्तीय समावेशन सलाहकार समिति के तत्वावधान में वर्ष 2019-2024 की अवधि हेतु भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तैयार की गई है, जिसे वित्तीय स्थिरता विकास परिषद द्वारा अनुमोदित भी किया गया है।
  • यह कार्यनीति भारत में वित्तीय समावेशन नीतियों के दृष्टिकोण और प्रमुख उद्देश्यों को निर्धारित करता है, जिससे वित्तीय क्षेत्र में सभी हितधारकों को शामिल करते हुए कार्रवाई के व्यापक अभिसरण के माध्यम से प्रयासों के विस्तार और निरंतरता को बनाए रखा जा सके।
  • वित्तीय समावेशन हेतु राष्ट्रीय कार्यनीति बनाने में सेबी (SEBI), आईआरडीए (IRDA), पीएफआरडीए, नाबार्ड एवं अन्य वित्तीय संस्थाओं ने सहयोग प्रदान किया है।
  • विजन
  • (i) वित्तीय सेवाओं तक सबकी पहुंच (ii) वित्तीय सेवाओं से संबंधित बुनियादी सुविधाओं (iii) आजीविका और कौशल विकास (iv) वित्तीय साक्षरता और शिक्षा (v) शिकायत निवारण और ग्राहक संरक्षण एवं प्रभावी समन्वयन।
  • उपर्युक्त छः घटकों के माध्यम से हितधारकों के नेतृत्व वाले समावेशी और लचीले विकास को समर्थन देने के साथ सभी नागरिकों  को सुरक्षित एवं पारदर्शी तरीके से सुलभ और किफायती वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराना।
  • उद्देश्य एवं लक्ष्य
  • बुनियादी वित्तीय सेवाओं तक सबकी पहुंच सुनिश्चित करने के विजन को प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शक उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं।
  • मार्च, 2020 तक पर्वतीय क्षेत्रों में सभी गावों के 5 किमी. के दायरे में बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए वाणिज्यिक बैंकों/भुगतान बैंकों/लघु वित्त बैंकों की संख्या में वृद्धि करना।
  • नकदी के कम प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल वित्तीय सेवाओं के परितंत्र को मजबूत करना।
  • प्रत्येक वयस्क को मार्च, 2024 तक मोबाइल के माध्यम से वित्तीय सेवा तक पहुंच को विकसित करना।
  • ग्राहकों को बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंचाने के लिए डिजिटल और सहमति आधारित संरचना की ओर बढ़ाना।
  • प्रत्येक वयस्क व्यक्ति तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • इसके अनुसार प्रत्येक इच्छुक और पात्र वयस्क, जिसे प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत नामांकित किया गया है, को मार्च, 2020 तक बीमा योजना और पेंशन योजना के तहत नामांकित किया जाए।
  • मार्च, 2022 तक पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री को पूरी तरह प्रारंभ करने की योजना है, जिससे प्रत्येक नागरिक के साख प्रस्तावों का मूल्यांकन करके अधिकृत वित्तीय संस्थाएं लाभ उठा सकें।
  • पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री एक डिजिटल डेटा बेस होता है, जिसमें कि ऋण संबंधी सूचनाएं होती हैं, जो उधार और ऋण देने वाले सभी संस्थानों को उपलब्ध होता है।
  • सार्थक आर्थिक गतिविधि एवं आय सृजन के लिए वित्तीय प्रणाली में शामिल नए सदस्यों को सरकारी आजीविका और कौशल विकास के बारे में प्रासंगिक जानकारी दी जाए।
  • वर्ष 2021 तक राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा केंद्र के माध्यम से विशिष्ट लक्षित वर्गों को आसानी से समझ में आने वाली भाषा में वित्तीय साक्षरता और शिक्षा मॉड्यूल को आडियो, वीडियो या बुकलेट के रूप में उपलब्ध कराना।
  • ग्राहकों को उनकी शिकायतों के समाधान के लिए उपलब्ध साधनों से अवगत कराना।
  • साथ ही उनके डेटा तथा निजता के अधिकार की रक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करना।
  • सेवा प्रदाता, विनियामक और हितधारकों के बीच एक प्रभावी समन्वय मानक बनाना, जिससे सेवाओं का अनवरत उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
  • वित्तीय समावेशन क्या है?
  • वित्तीय समावेशन एक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा समाज के अंतिम छोर पर खड़े आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को भी आर्थिक विकास प्रक्रिया में शामिल किया जाए, जिससे कोई भी व्यक्ति आर्थिक संवृद्धि से वंचित न रहे।
  • इसके द्वारा प्रत्येक व्यक्ति को वित्तीय उत्पादों एवं सेवाओं तक किफायती और आसान पहुंच सुनिश्चित कराई जाती है।
  • वैश्विक परिदृश्य
  • वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में वैश्विक समावेशन को सतत आर्थिक विकास तथा गरीबी उन्मूलन के प्रवर्तक के रूप में पहचाना जा रहा है।
  • विश्व के लगभग सभी देश औपचारिक वित्तीय सेवाओं की पहुंच और उपयोग बढ़ाने के लिए अपने-अपने अनुसार कार्यनीतियां विकसित कर रहे हैं।
  • पिछले एक दशक में राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन नीति अपनाने में तेजी आई है।
  • वर्ष 2018 के मध्य तक 35 से अधिक देशों ने राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन कार्यनीति शुरू की एवं 25 अन्य देशों ने कार्यनीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू की।
  • विश्व बैंक की वर्ष 2018 की रिपोर्ट के अनुसार कई देशों ने अपनी मूल राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन कार्यनीति का नवीनीकरण किया।
  • कुछ देशों की कार्यनीतियों में कुछ समानताएं देखी गई हैं-जैसे नेतृत्व, लक्ष्य आधारित दृष्टिकोण, विनियामक ढांचा, बाजार का विकास, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, अंतिम समय डिलिवरी, नवोन्मेष व प्रौद्योगिकी, वित्तीय साक्षरता तथा जागरूकता, उपभोक्ता संरक्षण और निगरानी एवं मूल्यांकन।
  • इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों में 7 लक्ष्य वित्तीय समावेशन की अवधारणा को सम्मिलित करते हैं।
  • इन सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की अवधि वर्ष 2030 तक निर्धारित की गई है।
  • इसके अतिरिक्त वर्ष 2020 तक वित्तीय सेवाओं तक सबकी पहुंच विश्व बैंक के प्रमुख विकास लक्ष्यों में से एक है।
  • विश्व बैंक अन्य देशों के साथ मिलकर वित्तीय समावेशन के अन्य प्रमुख घटकों को मजबूत करने के लिए कार्य करता है।
  • ये प्रमुख घटक हैं-सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की प्रतिबद्धता, कानूनी और विनियामक ढांचे को सक्षम करना, वित्तीय और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना तथा वैश्विक निकायों के जुड़ाव द्वारा उनकी सिफारिशें एवं दिशा-निर्देश प्राप्त करना।
  • भारत में वित्तीय समावेशन की स्थिति
  • किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का विकास देश के प्रत्येक नागरिक के विकास पर निर्भर होता है।
  • अर्थव्यवस्था के विकास एवं उन्नति हेतु नीतियां बनाने में ऐसी प्रणाली का अनुसरण करना चाहिए, जिससे विकास पथ में देश के प्रत्येक नागरिक को शामिल किया जाए।
  • वित्तीय समावेशन के तहत यही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है कि प्रत्येक नागरिक अर्थव्यवस्था के विकास पथ में भागीदार बने तथा स्वयं के आर्थिक विकास द्वारा देश के आर्थिक विकास में योगदान दे सके।
  • साथ ही देश के गरीब तबके के लोगों को बचत करने के साथ विभिन्न वित्तीय उत्पादों एवं सेवाओं में सुरक्षित निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
  • वर्ष 1956 में जीवन बीमा कंपनियों के राष्ट्रीयकरण के साथ भारत में वित्तीय समावेशन की शुरुआत हुई।
  • इसके बाद वर्ष 1969 और 1980 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया, साथ ही वर्ष 1972 में सामान्य  बीमा कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
  • भारत में वित्तीय समावेशन के लिए सरकारी कदम
  • समावेशी विकास के लिए सरकारी मिशन के रूप में भारत में 28 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री जन-धन योजना शुरू की गई।
  • यह योजना मौजूदा बैंकिंग नेटवर्क  और तकनीकी नवोन्मेष के माध्यम से हर घर को बुनियादी वित्तीय सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे बैंकिंग सुविधाओं के कवरेज में उत्पन्न हुए अंतर को कम किया जा सके।
  • इस योजना के तहत खाताधारकों को 10,000 रु. की ओवरड्रॉफ्ट सुविधा, आकस्मिक मृत्यु सह दिव्यांगता बीमा कवर, टर्म-लाइफ कवर और वृद्धावस्था पेंशन उपलब्ध कराई गई है।
  • इसके अतिरिक्त 9 मई, 2015 को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना तथा अटल पेंशन योजना जारी की गई।
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना द्वारा 12 रु. प्रति वर्ष के प्रीमियम पर 2 लाख रु. का आकस्मिक मृत्यु सह दिव्यांगता कवर प्रदान किया जा रहा है।
  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना द्वारा 300 रु. प्रति वर्ष के प्रीमियम पर 2 लाख रु. का एक-वर्षीय बीमा प्रदान किया जा रहा है।
  • अटल पेंशन योजना द्वारा 1000 रु. से 5000 रु. तक की वृद्धावस्था के लिए मासिक पेंशन प्रदान की जा रही है।
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र में क्रेडिट को बढ़ावा देने के लिए ‘एमएसएमई’ क्षेत्र के वित्तपोषण हेतु बैंकरों की क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएएमसीएबीएस) नामक कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।
  • क्रेडिट हेतु आसान पहुंच के लिए ‘उद्यमी मित्र’ और ‘पीएसबीलोनइन 59 मिनट्स’ जैसे वेब पोर्टल भी लांच किए गए हैं।
  • एमएसएमई क्षेत्र में विलंबित भुगतानों की समस्या के समाधान के लिए टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म की स्थापना की गई है।
  • लघु व्यवसाय उद्यमों के वित्तपोषण के लिए अप्रैल, 2015 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत की गई, जिसके तहत सूक्ष्म व्यवसाय उद्यमियों को 10 लाख रु. तक के वित्तपोषण की व्यवस्था की गई है।
  • कृषि क्षेत्र में अगस्त, 1998 में किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत की गई, जिसके द्वारा किसानों की खेती और संबद्ध आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बैंकिंग प्रणाली से ऋण सहायता की व्यवस्था की गई।
  • इसके अतिरिक्त जनवरी, 2018 में विकास के लिए अंतर-राज्य और अंतर-जिला विविधताओं में क्षेत्रीय असमानता को दूर करने के लिए ‘आकांक्षी जिलों का परिवर्तन’ कार्यक्रम प्रारंभ किया गया।
  • इसके साथ ही वित्तीय समावेशन बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को राष्ट्रव्यापी, विशेष रूप से पिछड़े क्षेत्रों में, शाखाएं खोलने के लिए कहा गया।
  • वर्ष 2015 में आरबीआई द्वारा लघु वित्त बैंक और विभिन्न भुगतान बैंक लाइसेंस जारी किए गए।
  • साथ ही वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के लिए वर्ष 2017 में आरबीआई ने शाखा प्राधिकरण दिशा-निर्देशों को आसान बनाया।
  • इसके साथ ही बीमा और पेंशन  के माध्यम से अनेक ऐसी योजनाओं और कार्यपद्धतियों को बढ़ावा दिया गया, जिससे वित्तीय समावेशन मजबूत हो।
  • बाजार के विकास के लिए 1 जनवरी, 2013 से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण लागू किया गया, जिससे लाभार्थियों को धोखाधड़ी और आर्थिक क्षति से बचाया जा सके।
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के तहत अनेक छात्रवृत्ति योजनाओं और मनरेगा को भी शामिल किया गया।
  • बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 लाया गया, जिसके तहत भुगतान प्रणाली से संबंधित किसी भी इकाई या उत्पाद की शुरुआत या संचालन हेतु आरबीआई से अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है।
  • सितंबर, 2018 में इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक की स्थापना की गई, जो वित्तीय समावेशन के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है।
  • देश वित्तीय शिक्षा के प्रसार के लिए आरबीआई द्वारा वित्तीय साक्षरता केंद्रों  और बैंकों की ग्रामीण शाखाओं में वित्तीय साक्षरता के दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
  • उपभोक्ता संरक्षण के लिए शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने हेतु आरबीआई, आईआरडीएआई और पीएफआरडीए द्वारा लोकपाल की व्यवस्था की गई है।
  • साथ ही सेबी द्वारा सेबी शिकायत निवारण प्रणाली (SCORES) की शुरुआत की गई है।

सं. राहुल त्रिपाठी

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