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राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता पर ग्रीनपीस की रिपोर्ट (Airpocalypse-IV)

Greenpeace report on national ambient air quality
  • पृष्ठभूमि
  • ग्रीनपीस द्वारा वर्ष 2017 से भारत के लिए राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता पर प्रतिवर्ष एक रिपोर्ट (Airpocalypse) जारी की जाती है।
  • वर्ष 2020 की रिपोर्ट अपने क्रम में चौथी रिपोर्ट है। इसमें भारत के 28 राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों के 287 शहरों को शामिल किया गया है।
  • जहां इस रिपोर्ट में झारखंड के झरिया शहर को सबसे प्रदूषित शहर (PM10 के मामले में) बताया गया है। वहीं सबसे स्वच्छ शहर (PM10 के मामले में) मिजोरम के लुंगलेई (Lunglei) शहर को बताया गया है।
  • संबंधित तथ्य
  • इस रिपोर्ट में शीर्ष 10 में उत्तर प्रदेश के 6 शहरों को शामिल किया गया है।
  • उत्तर प्रदेश के 6 शहरों में प्रथम स्थान पर नोएडा है और अन्य शहर क्रमशः गाजियाबाद, बरेली, इलाहाबाद, मुरादाबाद और फिरोजाबाद हैं।
  • कुल 287 शहरों में 231 शहर (80%) ऐसे हैं, जिनमें PM10 की निर्धारित सीमा (60 mg/m3-NAAQS-National Ambient Air Quality Standerd) से अधिक है।
  • 140 शहरों में PM10 की मात्रा 90mg/m3 से भी ऊपर है।
  • शीर्ष दस प्रदूषित शहर
क्र.सं. राज्य शहर PM10 की मात्रा mg/m3 में
1. झारखंड झरिया 322
2. झारखंड धनबाद 264
3. उत्तर प्रदेश नोएडा 264
4. उत्तर प्रदेश गाजियाबाद 245
5. गुजरात अहमदाबाद 236
6. उत्तर प्रदेश बरेली 233
7. उत्तर प्रदेश इलाहाबाद 231
8. उत्तर प्रदेश मुरादाबाद 227
9. उत्तर प्रदेश फिरोजाबाद 226
10. दिल्ली दिल्ली 225
  • राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (NAMP)
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ‘राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम’ (NAMP-National Ambient Air Quality Monitering Programme) वर्ष 2009 से भारत में चलाया जा रहा है।
  • NAMP की नोडल एजेंसी के रूप में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय कार्य कर रहे हैं।
  • NAMP के तहत 28 राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों के 344 शहरों में 793 निगरानी केंद्र वर्ष 2019 तक स्थापित किए जा चुके हैं।
  • NAMP के तहत वर्ष 2022 तक 3000 निगरानी केंद्र स्थापित     किए जाने का लक्ष्य है।
  • NAMP में दो श्रेणियों के निगरानी केंद्र स्थापित किए जाएंगे-

  (1) श्रेणी I -1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में;

  (2) श्रेणी II 50 हजार से 99 हजार तक जनसंख्या वाले शहरों में।

  • NAMP के तहत सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और निलंबित कणों (Particulate Matters) की निगरानी एवं विश्लेषण किया जाता है।
  • गैर-प्राप्ति क्षेत्र (Non-attainment Area)
  • संयुक्त राज्य अमेरिका के पर्यावरण कानून के अनुसार, ‘‘गैर-प्राप्ति क्षेत्र (Non-attainment Area) एक ऐसा क्षेत्र होता है, जहां की वायु की गुणवत्ता राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों से बदतर हो।’’
  • राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों (National Ambient Air Quality Standard : NAAQS) के अनुसार (भारत के संदर्भ में), ‘‘एक गैर-प्राप्ति क्षेत्र वह होता है, जहां की वायु में PM10 (Particulate Matters) की मात्रा 60 mg/m3 से अधिक हो।’’
  • वर्ष 2015 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, भारत में गैर-प्राप्ति क्षेत्र में 102 शहर शामिल थे।
  • वर्ष 2020 में 231 शहरों को गैर-प्राप्ति क्षेत्र में शामिल बताया गया है, जो वर्ष 2018 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में दाखिल रिपोर्ट  (115 शहर) से 116 ज्यादा है।
  • वर्ष 2018 के वार्षिक आंकड़ों के अनुसार, गैर-प्राप्ति क्षेत्र में शामिल भारत के शीर्ष शहर-
  • पश्चिम बंगाल – 38
  • पंजाब – 21
  • उत्तर प्रदेश- 20
  • ओडिशा – 15
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP)
  • जनवरी, 2019 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा NCAP की शुरुआत की गई।
  • NCAP के तहत वर्ष 2024 तक 20 से 30 प्रतिशत की प्रदूषण की दर से कटौती करना है।
  • NCAP को शुरू करने से पहले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा NAMP के तहत आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था।
  • वर्ष 2018 में 699 निगरानी केंद्रों की मदद से 287 शहरों में 52 या इससे अधिक दिनों का आंकड़ा (PM10 के बारे में) इकट्ठा किया गया।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की चुनौतियां
  • NCAP को जनवरी, 2020 तक किसी भी अधिनियम (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम या वायु अधिनियम) के तहत नहीं लाया गया है।
  • NCAP वर्तमान में केवल एक दस्तावेज की तरह है क्योंकि इसमें कोई बाध्यकारी कानून नहीं है।
  • NCAP के तहत वर्ष 2024 तक 20-30 प्रतिशत की कटौती की जानी है। अगर इस लक्ष्य को प्राप्त भी कर लिया गया तो भी NAAQS के तहत 30 प्रतिशत ज्यादा प्रदूषित वायु बनी रहेगी।
  • NCAP को WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के मानकों (PM10 की मात्रा 20 mg/m3) के अनुरूप नहीं तैयार किया गया है। 
  • निष्कर्ष
  • हालांकि भारत राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता कार्यक्रम (NAMP) का भागीदारी देश है फिर भी 10 वर्षों में भारत की वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं हो पाया है। वर्ष 2019 से शुरू किए गए NCAP से बहुत- सी उम्मीदें हैं। क्या यह कार्यक्रम भारत के आम जनमानस को शुद्ध वायु प्रदान करेगा? क्या यह अपनी उम्मीदों पर खरा उतरेगा? ये सब प्रश्न भविष्य में उत्तरित होंगे, जब कार्यक्रम वर्ष 2024 तक अपने लक्ष्यों को प्राप्त करेगा।

सं. विभव कृष्ण पाण्डेय