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राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन को मंजूरी

  • वर्तमान संदर्भ
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संपन्न ‘आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति’ (CCEA) की 26 फरवरी, 2020 को हुई बैठक में ‘राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन’ (National Technical Textile Mission : NTTM) को मंजूरी प्रदान की गई।
  • NTTM का उद्देश्य देश को तकनीकी वस्त्रों के निर्माण में वैश्विक नेतृत्वकर्ता (Global Leader) की स्थिति प्रदान करना है। इसके लिए इसका कुल परिव्यय (Outlay) 1,480 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जिसे अगले 4 वर्षों (2020-21 से 2023-24) में व्यय किया जाएगा।
  • ध्यातव्य है कि NTTM को प्रारंभ करने का प्रस्ताव वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2020 को अपने बजट भाषण के दौरान रखा था। उसी क्रम में CCEA ने उपर्युक्त निर्णय लिया है।
  • तकनीकी वस्त्र : एक परिचय
  • तकनीकी वस्त्र (कपड़े) ऐसे वस्त्रीय उत्पाद होते हैं, जिसे विशिष्ट पदार्थों (Special Material) से, किसी विशेष कार्य को संपन्न करने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है।
  • तकनीकी वस्त्रों का मूल्य इनके सौंदर्यात्मक (Aesthetic) गुणों के आधार पर नहीं, बल्कि इनके तकनीकी प्रदर्शन तथा क्रियात्मक विशेषताओं के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
  • तकनीकी वस्त्रों को औद्योगिक वस्त्र, प्रकार्यात्मक (क्रियात्मक) वस्त्र, कार्यनिष्पादन वस्त्र, अभियांत्रिकी वस्त्र तथा उच्च तकनीकी वस्त्र आदि नामों की संज्ञा दी जाती है।
  • तकनीकी वस्त्रों का उत्पादन प्राकृतिक तथा मानव निर्मित तंतुओं (Fibres) जैसे-नोमेक्स (Nomex), केलवर (Kelver), स्पैन्डेक्स (Spandex), त्वारन (Twaran) आदि तुतुओं से किया जाता है।
  • इन तंतुओं में टिकाऊपन, उच्च अवरोधक क्षमता तथा उन्नत ताप प्रतिरोधी गुण विद्यमान होते हैं। इसी कारण इनका उपयोग विभिन्न उद्योगों तथा अनुप्रयोगों (Applications) जैसे – विमानिकी, जहाजरानी, खेल, कृषि, रक्षा, स्वास्थ्य तथा निर्माण बुलेटप्रूफ जैकेट, अग्निरोधक जैकेट, ऊंचाई वाले क्षेत्रों आदि में किया जाता है।
  • तकनीकी वस्त्रों को इनके इस्तेमाल के अनुसार 12 विभिन्न श्रेणियों एग्रोटेक, बिल्डटेक, जियोटेक, इंडिटेक, मोबाइलटेक, मेडिटेक, पैकटेक, क्लोयटेक, प्रोटेक, स्पोर्ट्सटेक, ओएकोटेक तथा होमटेक में बांटा गया है।
  • राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के घटक
  • इस मिशन के चार घटक (Component) होंगे –
  • NTTM के प्रथम घटक के अंतर्गत 1,000 करोड़ रुपये के परिव्यय से तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में अनुसंधान (Research), नवाचार (Innovation) तथा विकास (Development) को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • इसके लिए कार्बन फाइबर, अरामिड फाइबर (ताप प्रतिरोध), नाइलॉन फाइबर और कम्पोजिट फाइबर (दो या दो से अधिक पदार्थों से निर्मित) के बेहतर तकनीकी उत्पादों के उत्पादन के उद्देश्य से फाइबर स्तर पर मौलिक अनुसंधान तथा-:
  • भू-वस्त्र, कृषि-वस्त्र, मोबाइल-वस्त्र, खेल-वस्त्र एवं जैव- निम्नीकरणीय तकनीकी वस्त्र के विकास पर आधारित अनुसंधान एवं अनुप्रयोग (Research and Applications) दोनों को प्रोत्साहन देगा।
  • मौलिक अनुसंधान गतिविधियों के लिए संसाधनों का एकत्रीकरण (Resource pooling) सार्वजनिक आधार पर किया जाएगा, जिसे CSIR की प्रयोगशालाओं में, IIT संस्थानों में तथा अन्य लब्धप्रतिष्ठित वैज्ञानिक/औद्योगिक/अकादमिक प्रयोगशालाओं से संचालित  किया जाएगा।
  • अनुप्रयोग आधारित अनुसंधान (Application Based Research) CSIR, IIT, भारतीय रेलवे के RDSO (Research Design & Standard Organisations), ICAR, DRDO, NAL (National Aerospace laboratories), IRRI (Indian Road Research Institute) की प्रयोगशालाओं तथा अन्य लब्धप्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं में संचालित किए जाएंगे।
  • द्वितीय घटक में तकनीकी वस्त्रों के व्यापार, संवर्धन और विपणन विकास (Market Development) पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में बताया है कि भारत प्रतिवर्ष 16 बिलियन डॉलर के मूल्य का तकनीकी वस्त्र आयात करता है।
  • वर्ष 2015 में तकनीकी वस्त्रों पर किए गए अंतिम आधारभूत सर्वेक्षण (Baseline Survey) के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2017-18 में तकनीकी वस्त्रों के लिए भारतीय बाजार का आकार (Market Size) 1,16,217 करोड़ रुपये अनुमानित किया गया था।
  • जबकि प्रस्तुत अंतिम सर्वेक्षण में वर्ष 2020-21 के लिए कोई अनुमान नहीं घोषित किया गया था। किंतु वर्तमान वृद्धि दर के अनुमानों के आधार पर तथा सरकार द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों के आधार पर, भारत के तकनीकी वस्त्र बाजार का आकार वर्ष 2020-21 तक 2 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाने का अनुमान लगाया गया था।
  • भारत में तकनीकी वस्त्र की पहुंच काफी कम है, जो 5-10 प्रतिशत के दायरे में है, जबकि विकसित देशों में यह आंकड़ा 30-70 प्रतिशत है।
  • NTTM का उद्देश्य बाजार विकास, बाजार संवर्धन, अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग, निवेश प्रोत्साहन और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के माध्यम से वार्षिक 15-20 प्रतिशत की औसत वृद्धि के साथ घरेलू बाजार के आकार को वर्ष 2024 तक 40-50 अरब डॉलर करना है।
  • तृतीय घटक में निर्यात को बढ़ावा देने पर विचार किया गया है। इसके अंतर्गत तकनीकी वस्त्र के निर्यात को बढ़ाकर वर्ष 2021-22 तक 20,000 करोड़ रुपये करना है, जो वर्तमान में 14,000 करोड़ रुपये है।
  • साथ ही प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की औसत वृद्धि सुनिश्चित करना है।
  • इसके लिए एक ‘तकनीकी वस्त्र निर्यात संवर्धन परिषद’ की स्थापना की जाएगी।
  • चतुर्थ घटक के अंतर्गत देश में शिक्षा, कौशल विकास और मानव संसाधन विकास, तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण तथा तेजी से विकसित तकनीकी कपड़ा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
  • NTTM मिशन का दायरा इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृषि, जलीय कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों तक बढ़ाया जाएगा।
  • मिशन के अंतर्गत अत्यधिक कुशल मानव संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि अपेक्षाकृत परिष्कृत तकनीकी वस्त्र विनिर्माण इकाइयों की आवश्यकता पूरी की जा सके।
  • राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन की अन्य विशेषताएं
  • यह मिशन, रणनीतिक क्षेत्रों सहित (Including Strategic Areas) देश के विभिन्न मिशनों, कार्यक्रमों आदि में तकनीकी वस्त्रों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • कृषि, जल कृषि, डेयरी, मुर्गी पालन आदि में तकनीकी वस्त्रों का उपयोग किया जाएगा।
  • जल शक्ति मिशन, स्वच्छ भारत मिशन तथा आयुष्मान भारत से अर्थव्यवस्था में लागत, विनिर्माण और निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देने के अलावा –
  • एक एकड़ तक भूमि जोतने वाले किसानों की बेहतर आय, जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, बेहतर कृषि उत्पादकता और उच्च आय में समग्र सुधार आएगा।
  • राजमार्ग, बंदरगाहों और रेलवे में जियो-टेक्सटाइल के उपयोग से बुनियादी ढांचा बेहतर होगा रख-रखाव लागत में कमी आएगी तथा इनकी संपोषणीयता में भी वृद्धि होगी।
  • इस मिशन के तहत स्टार्टअप तथा संयुक्त उद्यम (Joint Venture) को प्रोत्साहन दिया जाएगा, साथ ही इन्क्यूबेशन केंद्रों की स्थापना की जाएगी।
  • नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा तथा इसके लिए युवा इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, विज्ञान मामलों एवं स्नातकों में नवाचार को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  • अनुसंधान का एक उपघटक जैव-अपघटनीय (Bio-Degradable) तकनीकी वस्त्र सामग्री विशेषकर कृषि-वस्त्र, जियो-वस्त्र तथा चिकित्सा-वस्त्रों के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • यह चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (Hygine) कचरे के सुरक्षित निपटान पर जोर देने के साथ, प्रयुक्त तकनीकी वस्त्रों के पर्यावरणीय स्थायी निपटान के लिए उपयुक्त उपकरण भी विकसित करेगा।
  • अनुसंधान गतिविधि का एक अन्य उपघटक भी होगा, जो तकनीकी वस्त्रों के लिए स्वदेशी मशीनरी और प्रक्रिया उपकरणों का विकास करेगा ताकि ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने और कम पूंजी लागत के माध्यम से उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बना सके।
  • इस मिशन के अंतर्गत एक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ की अध्यक्षता में ‘वस्त्र मंत्रालय’ में एक मिशन निदेशालय स्थापित किया जाएगा। निदेशालय को चार वर्ष पश्चात (मिशन के संपन्न होने पर) समाप्त कर दिया जाएगा।
  • टेक्नोटेक्स (TECHNOTEX), 2019
  • 29-31 अगस्त, 2019 के मध्य ‘8वीं अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी तथा तकनीकी वस्त्र गोष्ठी’ (8th International Exhibition & Conference on Technicle Textiles) TECHNOTEX, 2019 का आयोजन ‘बॉम्बे इग्जिबिसन सेंटर’ (Bombay Exhibition Centre), मुम्बई में किया गया।
  • TECHNOTEX, 2019 का उद्देश्य ‘नए भारत’ (New India) के निर्माण में अति महत्वपूर्ण तकनीकी वस्त्रों (Technical Textile) की भूमिका को स्थापित करना है, ताकि विभिन्न क्षेत्रकों (Sectors) में इनका उपयोग किया जा सके।
  • इस क्रम में भारत सरकार ने भारतीय उद्योगों द्वारा बहुप्रतीक्षित तकनीकी वस्त्रों के विभिन्न प्रकारों के लिए 207 HS कोड (Harmonised Commodity Description and Coding System) जनवरी, 2019 में अधिसूचित किया था।
  • HS कोड कारोबारी उत्पादों को वर्गीकृत करने के लिए नामों एवं संख्याओं की एक अंतरराष्ट्रीय मानकीकृत पद्धति है। यह वर्ष 1988 में अस्तित्व में आई।
  • तब से 183 सदस्य देशों के साथ ‘विश्व सीमा शुल्क संगठन’ (WCO), ब्रुसेल्स, बेल्जियम में स्थित एक स्वतंत्र अंतरसरकारी संगठन द्वारा HS कोड को विकसित और संरक्षित किया जाता है।
  • भारतीय तकनीकी वस्त्र-SWOT विश्लेषण
  • भारतीय तकनीकी वस्त्र बाजार का SWOT (Strength, Weaknesses, Opportunities and Threats) विश्लेषण निम्नलिखित है –
  • मजबूती (Strength)
  • सस्ते एवं युवा श्रम की उपलब्धता
  • मजबूत वस्त्र मूल्य शृंखला
  • सरकार का सक्रिय प्रोत्साहन
  • विनिर्माण ढांचे की उपलब्धता
  • कमजोरियां (Weaknesses)
  • मशीनरी के लिए आयात पर निर्भरता
  • उपयोगकर्ताओं में तकनीकी वस्त्रों के उपयोग के प्रति कम जागरूकता
  • मानकीकरण तथा विनियमन की कमी
  • विशेष तंतुओं (Speciality Fibres) का कम घरेलू विनिर्माण/उत्पादन
  • अवसर (Opportunities)
  • तकनीकी वस्त्रों के लिए आर्थिक वृद्धि के साथ तीव्र मांग
  • आपेक्षिक रूप से अप्रयुक्त (Untapped) घरेलू बाजार
  • वृहद रूप से अप्रयुक्त घरेलू उपभोक्ता संस्थान, जिनका उपयोग घरेलू तकनीकी वस्त्रों को खरीदने के लिए किया जा सकता है।
  • चुनौतियां (Threats)
  • वैश्विक स्तर पर अप्रतियोगी (Uncompetitive) घरेलू उत्पाद
  • उच्च तकनीकी सघन (Highly Technology Intensive) तकनीकी वस्त्रों की आसान आयात उपलब्धता
  • निष्कर्ष
  • तकनीकी वस्त्रों के बारे में उपर्युक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का ‘ग्रोथ इंजन’ साबित होगा। तकनीकी वस्त्र क्षेत्रक में वह क्षमता विद्यमान है, जिसके द्वारा माननीय प्रधानमंत्री के ‘5 Trillion Dollor Economy’ के सपने को साकार करने में मदद मिलेगी। वस्त्र मंत्रालय ने संबद्ध प्रयास के द्वारा कुशल श्रम शक्ति को तैयार करने के लिए ‘समर्थ’ (SAMARTH) कार्यक्रम चलाया है। निकट भविष्य में इसके सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे।

सं. अमित त्रिपाठी