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राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन : कार्यदल की रिपोर्ट

National Infrastructure Pipeline
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 31 दिसंबर, 2019 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा ‘राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन’ (National Infrastructure Pipeline : NIP) हेतु गठित कार्यदल (Task Force) की रिपोर्ट जारी की गई।
  • इस कार्यदल (Task Force) का गठन सितंबर, 2019 में ‘सचिव’ आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार की अध्यक्षता में की गई थी, जिसमें 4 अन्य सदस्य तथा एक सदस्य सचिव भी शामिल थे।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-2025 तक की अवधि के दौरान देश में अवसंरचना के क्षेत्र (Infrastructure Sector) में कुल परियोजना पूंजीगत व्यय 102 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक रहने का अनुमान है।
  • वित्त वर्ष 2020-25 की अवधि में अवसंरचना पर होने वाले अनुमानित पूंजीगत व्यय का लगभग 70 प्रतिशत से अधिक पूंजी विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि ऊर्जा (24%), सड़कों (19%), शहरी (16%) तथा रेलवे (13%) के हिस्से में जाएगा।
  • केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के संदर्भ में बताया कि वर्ष 2024-25 तक 5 ट्रिलियन (लाख करोड़) अमेरिकी डॉलर की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) हासिल करने के लिए भारत को इस अवधि के दौरान अवसंरचना या बुनियादी ढांचागत सुविधाओं पर लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर (100 लाख करोड़ रुपये) खर्च करने होंगे।
  • पिछले दशक (वित्त वर्ष 2008-17) में भारत ने बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के विकास पर लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर निवेश किए। इस दिशा में मुख्य चुनौती बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के विकास पर किए जाने वाले वार्षिक निवेश में वृद्धि करना है, ताकि इन सुविधाओं का अभाव निश्चित तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में बाधक न बन जाए।
  • पृष्ठभूमि
  • भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त, 2019 को स्वतंत्रता दिवस के  अवसर पर यह घोषणा की गई थी कि अगले पांच वर्षों में सामाजिक एवं आर्थिक बुनियादी ढांचे पर 100 लाख करोड़ रुपये (1.4 ट्रिलियन डॉलर) का निवेश किया जाएगा।
  • लेकिन इतने बड़े स्तर पर एक बुनियादी ढांचे के कार्यक्रम को लागू करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि परियोजनाएं पर्याप्त रूप से तैयार की जाएं और समयबद्ध रूप से इनकी शुरुआत हो, जिससे वे आगे चलकर श्रेणीबद्ध वार्षिक बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित हो जाएं।
  • इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु वित्त वर्ष 2019-20 से वित्त वर्ष 2024-25 तक के प्रत्येक वर्ष हेतु ‘राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन’ (National Infrastructure Pipeline : NIP) तैयार करने के लिए एक ‘कार्यदल’ (Task force) का गठन किया गया था, जिसकी पहली बैठक सितंबर, 2019 में हुई थी।
  • इस कार्यबल को अपनी रिपोर्ट वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए पाइपलाइन परियोजनाओं पर 31 अक्टूबर, 2019 तक तथा वित्तीय वर्ष 2021-25 के लिए सांकेतिक पाइपलाइन परियोजनाओं पर 31 दिसंबर, 2019 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी, जिसे कार्यबल द्वारा प्रस्तुत कर दिया गया।
  • कार्यबल के संदर्भ की शर्तें
  • माननीय प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में कहा कि अगले पांच वर्षों में बुनियादी ढांचे पर 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल होंगी। इस स्तर पर एक बुनियादी ढांचे के कार्यक्रम को लागू करने के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि परियोजनाएं पर्याप्त रूप से तैयार की जाएं तथा इनका समयबद्ध रूप से शुभारंभ और क्रियान्वयन किया जाए। जिसके लिए एक वार्षिक बुनियादी ढांचे का प्रारूप विकसित किया जाएगा। इस कार्य को पूरा करने के लिए, वित्तीय वर्ष 2019-20 से वित्तीय वर्ष 2024-25 तक के प्रत्येक वर्ष के लिए एक राष्ट्रीय अवसंरचना कार्यदल बनाने हेतु केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा सचिव (डीईए) की अध्यक्षता में एक कार्यबल का गठन किया गया है। कार्यदल के संदर्भ की शर्तें इस प्रकार हैं-

1. वित्तीय वर्ष 2019-20 में शुरू हो वाली तकनीकी रूप से व्यवहार्य और वित्तीय/आर्थिक रूप से व्यवहार्य अवसंरचना परियोजनाओं की पहचान करना।

  2.   वित्तीय वर्ष 2021-25 के बीच शेष पांच वर्षों में से प्रत्येक के लिए प्रगतिपूर्ण परियोजनाओं को सूचीबद्ध करना।

  3.   वार्षिक अवसंरचना निवेश/पूंजीगत लागत  का अनुमान लगाना।

  4.   वित्तपोषण के उपयुक्त स्रोतों की पहचान करने में मंत्रालयों का मार्गदर्शन करना।

  5.   परियोजनाओं की निगरानी के लिए उपाय सुझाना, ताकि लागत और समय में कमी लाई जा सके।

  6.   कार्यबल, इंडिया इनवेस्टमेंट ग्रिड (आईआईजी) और नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआई एफ), आदि के माध्यम से निजी निवेश की आवश्यकता वाली परियोजनाओं के मजबूत विपणन को भी सक्षम बनाएगा।

नोट : नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परियोजनाओं में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड परियोजनाएं भी शामिल होंगी, जिनमें प्रत्येक पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। चालू वर्ष के लिए प्रगतिशील योजनाओं के लिए डीपीआर की उपलब्धता, कार्यान्वयन की व्यवहार्यता, वित्तपोषण योजना में समावेश और प्रशासनिक स्वीकृति की तत्परता/उपलब्धता भी शामिल होगी। प्रत्येक मंत्रालय/विभाग  परियोजनाओं की निगरानी के लिए जिम्मेदार होगा, ताकि उनके कार्यान्वयन को समय पर और लागत के अनुरूप सुनिश्चित किया जा सके।

  • राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) देश में अवसंरचना क्षेत्र की वित्तीय समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने और वित्तपोषण सुनिश्चित करने हेतु एक कोष है।
  • इसकी स्थापना 40,000 करोड़ रुपये की मूल राशि के साथ की गई थी, जिसमें आंशिक वित्तपोषण निजी निवेशकों द्वारा किया गया था।
  • इसमें 49 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत सरकार की है तथा शेष हिस्सेदारी विदेशी और घरेलू निवेशकों की है।
  • केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आर्थिक समीक्षा 2019-20 में भारत के अवसंरचना क्षेत्र के रुझानों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
  • भारत को 2024-2025 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के जीडीपी तक पहुंचने के लिए, अवसंरचना पर इन वर्षों में लगभग 1.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (100 लाख करोड़ रुपये) व्यय करने की आवश्यकता है, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में अवसंरचना की कमी होना किसी प्रकार की रुकावट न बने।
  • एनआईपी से अवसंरचना संबंधी परियोजनाओं को अच्छी तरह तैयार किया जा सकता है, जिससे रोजगार का सृजन होगा, जीवन स्तर में सुधार होगा और सबके लिए अवसंरचना के क्षेत्र में समान पहुंच उपलब्ध होगी। इस प्रकार विकास को अधिक समावेशी बनाने में मदद मिलेगी।
  • एनआईपी के अनुसार, केंद्र सरकार (39%) और राज्य सरकारों (39%) से अपेक्षा है कि वे निजी क्षेत्र (22%) के बाद परियोजनाओं के वित्तपोषण में बराबर हिस्सेदारी करेंगी।
  • फिलहाल 42.7 लाख करोड़ रुपये (42%) लागत की परियोजनाएं क्रियान्वयन के अधीन हैं।
  • नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन का वित्तपोषण एक चुनौती होगी, लेकिन समीक्षा में आशा व्यक्त की गई है कि अच्छी तरह से तैयार की गई परियोजनाओं के बल पर केंद्र और राज्य सरकार, शहरी स्थानीय शासन, बैंक और वित्तीय संस्थान, पीई फंड और निजी निवेशक इनमें निवेश के लिए आकर्षित होंगे।
  • आर्थिक समीक्षा में रेल, सड़क परिवहन, नागर विमानन, शिपिंग, टेलीकॉम, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, बिजली, खनन, आवास और शहरी अवसंरचना से संबंधित क्षेत्रवार विकास का मूल्यांकन किया गया है, जो निम्न है-
  • आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि सड़क परिवहन सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में अपने योगदान के संदर्भ में परिवहन का महत्वपूर्ण साधन है। 2017-2018 में जीवीए में परिवहन क्षेत्र का हिस्सा लगभग 4.77 प्रतिशत था, जिसमें सड़क परिवहन का हिस्सा 3.06 प्रतिशत है, इसके बाद रेलवे (0.75%), हवाई परिवहन (0.15%) और जल परिवहन (0.06%) है।
  • 2014-15 से 2018-19 के पांच साल की अवधि में सड़कों और राजमार्ग क्षेत्र में कुल निवेश 3 गुना से अधिक हो गया है।
  • समीक्षा में बताया गया है कि वर्ष 2018-19 के दौरान, भारतीय रेलवे ने 120 करोड़ टन माल ढुलाई की और 840 करोड़ यात्रियों के बल पर यह दुनिया का सबसे बड़ा यात्री वाहक और चौथा सबसे बड़ा माल वाहक रेलवे बना।
  • हवाई अड्डों के संचालन, रख-रखाव और विकास के लिए भारत में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा 6 और सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) के तहत 136 व्यावसायिक रूप से प्रबंधित हवाई अड्डे हैं।
  • बिना लाइसेंस वाले हवाई अड्डों (उड़ान) के संचालन की योजना शुरू होने के बाद से कुल 43 हवाई अड्डों का परिचालन किया गया है।
  • विश्व आर्थिक मंच की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता रिपोर्ट, 2019 के अनुसार, भारत हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी के संदर्भ में 7 अन्य देशों की तुलना में पहले स्थान पर रहा।
  • मौजूदा हवाई अड्डे की क्षमता पर दबाव को कम करने के लिए, वित्त वर्ष 2023-24 तक 100 और हवाई अड्डों को चालू किया जाना है।
  • विकास की तीव्र गति जारी रखने के लिए सरकार एक स्थायी वातावरण उपलब्ध कराती रही है, ताकि भारतीय यात्री विमान कंपनियां 2019 के अंत में लगभग 680 विमानों के अपने बेड़े को वित्त वर्ष 2023-24 तक 1200 विमानों तक बढ़ाकर अपने बेड़े को दोगुना कर सकें।
  • शिपिंग के क्षेत्र में तेज विकास की चर्चा करते हुए आर्थिक समीक्षा में वर्णित है कि मात्रा के रूप में व्यापार के 95 प्रतिशत और मूल्य के रूप में व्यापार के 68 प्रतिशत व्यापार की ढुलाई समुद्र के रास्ते होती है। भारत के समुद्री बेड़े में 30 सितंबर, 2019 तक 1419 जहाज शामिल हैं।
  • देश के प्रमुख बंदरगाहों की 30 मार्च, 2019 तक स्थापित क्षमता 1514.09 एमटीपीए है और वर्ष 2018-19 के दौरान 699.09 मीट्रिक टन सामानों की ढुलाई हुई।
  • वर्ष 2018 में जहाज पर से माल उतारने और लादने की क्रिया में लगने वाले औसत समय में सुधार हुआ जो 59.51 घंटे रहा, जबकि वर्ष 2017-18 में यह 64.43 घंटे था।
  • भारत में आज दूरसंचार क्षेत्र में 4 प्रमुख कंपनियां कार्यरत हैं-इनमें तीन निजी क्षेत्र की और बीएसएनएल एवं एमटीएनएल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हैं।
  • भारत में डेटा मूल्य दुनियाभर के देशों में सबसे सस्ता है, जिससे डिजिटल इंडिया अभियान के हिस्से के रूप में ब्रॉडबैंड हाइवेज का विकास करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
  • केंद्र सरकार देश की सभी 2.5 लाख पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए चरणबद्ध तरीके से भारतनेट कार्यक्रम लागू कर रही है।
  • अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है।
  • समीक्षा में कहा गया है कि भारत में 249.4 एमएमटीपीए की शोधन क्षमता है और यह संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और रूस के बाद दुनिया में चौथा सबसे बड़ा देश है।
  • सरकार द्वारा बिजली क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप विश्व आर्थिक मंच द्वारा जारी ‘ऊर्जा संक्रमण सूचकांक’ में भारत की रैंकिंग सुधर कर 76वें स्थान पर आ गई है।
  • बिजली के उत्पादन और संचरण में भी सार्वभौमिक विद्युतीकरण प्रगति हुई है। मार्च, 2019 में 3,56,100 मेगावॉट की स्थापित क्षमता 31 अक्टूबर, 2019 को बढ़कर 3,64,960 मेगावॉट हो गई है।
  • 25 सितंबर, 2017 को 1,6,320 करोड़ की लागत से प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य 31 मार्च, 2019 तक सभी घरों का विद्युतीकरण करना था।
  • भारत 95 खनिजों का उत्पादन करता है, जिसमें 4 हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिज, 5 परमाणु खनिज, 10 धातुएं, 21 गैर-धातु और 55 लघु खनिज शामिल हैं। वर्ष 2018-19 के दौरान जीवीए में खनन और उत्खनन क्षेत्र का योगदान लगभग 2.38 प्रतिशत है। साथ ही वर्ष 2018-19 के दौरान मूल्य के रूप में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • निर्माण क्षेत्र के बारे में कहा गया है कि वह सकल घरेलू उत्पाद का 8.24 प्रतिशत है, जिसमें आवास शामिल है और कुल कार्यबल का लगभग 12 प्रतिशत इस क्षेत्र में कार्यरत है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) जून, 2015 में शुरू की गई थी।
  • यह योजना वर्ष 2020 तक सभी को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बढ़ रही है। अब तक 32 लाख घर बना कर वितरित कर दिए गए हैं।
  • 100 शहरों में स्मार्ट सिटी मिशन के शुभारंभ के बाद से 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की 5,151 परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। 22,569 करोड़ रुपये की कुल 1,290 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और कार्यरत हैं।
  • कार्यबल द्वारा जारी रिपोर्ट से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • बुनियादी ढांचा विजन 2025 (Infrastructure Vision 2025)
  • आकांक्षाओं को पूरा करना (Meeting Aspiration)
  • विकास को बढ़ावा देना (Propelling Growth) तथा
  • जीवन-यापन में सुगमता लाना (Facilitating ease of living) इनके अंतर्गत शामिल हैं-
  • सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा (Affordable and Clean Energy)
  • डिजिटल सेवाएं : सभी तक पहुंच (Digital Services : Access for All)
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education)
  • सुविधाजनक कुशल परिवहन तथा रसद (Convenient and Efficient Transportation and Logistics)
  • सबके लिए आवास और पानी की आपूर्ति (Housing and Water Suply for All)
  • आपदा-लोचशील मानक, सार्वजनिक सुविधाओं का अनुपालन (Disaster-Resilient Standards Compliant Public Infrastructure)
  • किसान की आय दोगुनी करना (Doubling Former Income)
  • अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण (Good Health and Well being)
  • विजन, मिशन और रणनीतिक लक्ष्य के द्वारा जीवन में सुगमता और प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन की भौतिक गुणवत्ता सुधार में वृद्धि होगी। यह लक्ष्य अंततः SDG 2030 के एजेंडे को आकार देने में योगदान करेंगे, जिसमें भारत एक हस्ताक्षरकर्ता है। बुनियादी ढांचे में निवेश का उद्देश्य उपर्युक्त आकांक्षात्मक मानकों के माध्यम से प्राप्त करना होगा।
  • कार्यबल द्वारा जारी रिपोर्ट से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • बुनियादी ढांचा विजन 2025 (Infrastructure Vision 2025)
  • आकांक्षाओं को पूरा करना (Meeting Aspiration)
  • विकास को बढ़ावा देना (Propelling Growth) तथा
  • जीवन-यापन में सुगमता लाना (Facilitating ease of living) इनके अंतर्गत शामिल हैं-
  • सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा (Affordable and Clean Energy)
  • डिजिटल सेवाएं : सभी तक पहुंच (Digital Services : Access for All)
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education)
  • सुविधाजनक कुशल परिवहन तथा रसद (Convenient and Efficient Transportation and Logistics)
  • सबके लिए आवास और पानी की आपूर्ति (Housing and Water Suply for All)
  • आपदा-लोचशील मानक, सार्वजनिक सुविधाओं का अनुपालन (Disaster-Resilient Standards Compliant Public Infrastructure)
  • किसान की आय दोगुनी करना (Doubling Former Income)
  • अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण (Good Health and Well being)
  • विजन, मिशन और रणनीतिक लक्ष्य के द्वारा जीवन में सुगमता और प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन की भौतिक गुणवत्ता सुधार में वृद्धि होगी। यह लक्ष्य अंततः SDG 2030 के एजेंडे को आकार देने में योगदान करेंगे, जिसमें भारत एक हस्ताक्षरकर्ता है। बुनियादी ढांचे में निवेश का उद्देश्य उपर्युक्त आकांक्षात्मक मानकों के माध्यम से प्राप्त करना होगा।

वर्ष 2050 में वैश्विक स्थिति

  • वर्ष 2018 तक, भारत की जीडीपी 2.6 ट्रिलियन डॉलर थी, जिसमें सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत, उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत तथा कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत थी।
  • लेकिन एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2030 तक इन क्षेत्रों यथा-सेवा एवं उद्योग क्षेत्र में वृद्धि होगी, जबकि कृषि क्षेत्र में गिरावट आएगी।
  • वर्ष 2030 तक जीडीपी में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 58 प्रतिशत, उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत तथा कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी कम होकर 8 प्रतिशत पर रह जाएगी।
  • एक अनुमान है कि भारत में कुल रोजगार में सेवाओं का हिस्सा वर्ष 2012 के 27 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2030 में 48 प्रतिशत हो जाएगा, जबकि कृषि में यह हिस्सा वर्ष 2012 के 49 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2030 में 29 प्रतिशत रह जाएगा।
  • कुल रोजगार में उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी 2012-30 की अवधि के दौरान लगभग 24 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह रुझान बताता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे कृषि अर्थव्यवस्था से सेवाकेंद्रित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित हो रही है।
  • राष्ट्रीय अवसंरचना विजन, मिशन और रणनीतिक लक्ष्य
  • वर्ष 2025 तक 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने तथा बदलते जनसांख्यिकी रूपरेखा की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए नया और मौजूदा बुनियादी ढांचे को उन्नत करना आवश्यक है।
  • विजन (Vission)
  • वैश्विक मानकों के आधार पर भारत में बुनियादी सेवाओं को बढ़ाना जो जीवन की गुणवत्ता तथा जीवन-यापन को सुगम बनाए।
  • मिशन (Mission)
  • भारत के लिए प्रमुख क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे  के विकास हेतु 5 वर्षीय योजना विकसित करना,
  • वैश्विक मानकों के अनुसार, सार्वजनिक अवसंरचना की डिजाइन, वितरण तथा रख-रखाव को सुविधाजनक बनाना।
  • सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं के आधार पर सार्वजनिक अवसंरचना सेवाओं के विनियमन तथा प्रशासन में सामान्य और क्षेत्रीय सुधारों की सुविधा को बढ़ाना।
  • सार्वजनिक अवसंरचना में भारत की वैश्विक रैंकिंग को बढ़ाना।
  • रणनीतिक लक्ष्य
  • सरकार को सभी तीनों स्तरों पर बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निजी निवेश हेतु एक सक्षम और सकारात्मक वातावरण प्रदान करना।
  • दक्षता (Efficiency), समता (Equity) और सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने हेतु सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के डिजाइन, वितरण तथा रख-रखाव को बेहतर करना।
  • आपदा लोच लक्ष्यों (Disaster Resilience Goals) को पूरा करने हेतु सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का डिजाइन, निर्माण और रख-रखाव करना।
  • बुनियादी ढांचे के लिए एक फास्ट ट्रैक संस्थागत, विनियामक और कार्यान्वयन ढांचा बनाना।
  • सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं एवं मानकों के आधार पर अवसंरचना प्रदर्शन को दर्ज कराना (Benchmark)।
  • लिवरेज तकनीकी (Leverage Technology) के माध्यम से सेवा मानक, दक्षता और सुरक्षा में वृद्धि करना।
  • ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स द्वारा प्रकाशित ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर आउटलुक, 2017 के अनुसार, 2016-2040 की अवधि के दौरान अनुमानित वैश्विक अवसंरचना निवेश की आवश्यकता 94 ट्रिलियन डॉलर की है।
  • इसमें से लगभग आधा केवल एशिया (मुख्य रूप से  चीन, भारत तथा जापान) में सड़कों और बिजली से संबद्ध क्षेत्रों में निवेश की जरूरतों का 67 प्रतिशत हिस्सा है। उसके बाद दूरसंचार, रेलवे तथा जलसंबद्ध क्षेत्रों का हिस्सा है।
  • एक अन्य अध्ययन के  अनुसार, बुनियादी ढांचे की मांग लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रही है, जबकि बुनियादी ढांचे की आपूर्ति मात्र 2.7 ट्रिलियन डॉलर की वार्षिक दर से बढ़ रही है, जिसके कारण वार्षिक आधार पर लगभग 1-1.5 ट्रिलियन डॉलर की कमी हो रही है।
  • यह अनुमान है कि भारत को अपनी विकास दर बनाए रखने हेतु वर्ष 2030 तक बुनियादी ढांचे पर 4.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने की आवश्यकता होगी।
  • अतः राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) का यह प्रयास रहेगा कि भारत में यह कार्य कुशल तरीके से हो।

सं. शिव शंकर कुमार तिवारी