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राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक, 2019

state energy efficiency index 2019
  • भूमिका
  • वर्तमान में भारत ऊर्जा संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। यह जीवाश्म ईंधन को प्रतिस्थापित करके विकेंद्रीकृत ऊर्जा संसाधनों पर अपना ध्यान केंद्रित करने की ओर अग्रसर है। ऊर्जा संक्रमण की इस प्रक्रिया में ऊर्जा दक्षता केंद्रीय तत्व होगी, क्योंकि यह संक्रमण की प्रक्रिया को तेज करने तथा अधिक किफायती बनाने में सहायक होगी। भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु सुरक्षा में ऊर्जा दक्षता के महत्व को पहचानते हुए ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के लागू होने के बाद से पिछले 18 वर्षों में इस दिशा में काफी प्रगति की है। भारत की ऊर्जा दक्षता नीतियों के कार्यान्वयन और सतत विकास के संदर्भ में राज्य विशिष्ट लक्ष्यों को ऊर्जा कुशल तरीके से पूरा करने में राज्यों का महत्वपूर्ण योगदान है। ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में पूरे देश में विभिन्न राज्यों के योगदान का मापन करने के लिए ‘राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक’ (State Energy Efficiency Index) जारी किया जाता है। गौरतलब है कि भारत के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) में ऊर्जा दक्षता को केंद्रीय स्थान प्राप्त है, जैसे-एस.डी.जी. लक्ष्य 7 (किफायती और स्वच्छ ऊर्जा), 12 (संवहनीय उपभोग और उत्पादन) तथा 13 (जलवायु कार्रवाई)।
  • राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक
  • राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency-BEE) के नेतृत्व और मार्गदर्शन में ‘ऊर्जा कुशल अर्थव्यवस्था के लिए गठबंधन’ (Alliance for an Energy Efficient Economy-AEEE) के द्वारा विकसित किया गया है।
  • यह सूचकांक निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करेगा-
  • राज्य और स्थानीय स्तर पर ऊर्जा कुशल नीतियों और कार्यक्रम के कार्यान्वयन में मदद करना।
  • ऊर्जा कुशल संबंधी सर्वोत्तम अभ्यासों को प्रकाश में लाना और राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित करना।
  • राज्यों के प्रबंधन और भारत के ऊर्जा पदचिह्न में प्रगति पर नजर रखना।
  • ऊर्जा सुरक्षा प्रयासों के लिए एक आधार रेखा निर्धारित करना तथा राज्य विशिष्ट ऊर्जा दक्षता लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए आधार प्रदान करना।
  • राज्यों, विशेषकर राज्य नामित एजेंसी द्वारा ऊर्जा कुशल गतिविधियों की डेटा कैप्चरिंग और निगरानी को संस्थागत बनाना।
  • ऊर्जा दक्षता संबंधी इस तरह का पहला सूचकांक ‘राज्य ऊर्जा दक्षता तैयारी सूचकांक, 2018′ (State Energy Preparedness Index, 2018) के नाम से 1 अगस्त, 2018 को जारी किया गया था। इसी क्रम में दूसरा सूचकांक ‘राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक, 2019’ शीर्षक से जारी किया गया।

राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक, 2019 के संकेतक

  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 10 जनवरी, 2020 को विद्युत मंत्रालय ने ‘राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक, 2019’ जारी किया।
  • यह सूचकांक सभी मांग क्षेत्र को कवर करने वाले 97 संकेतकों पर आधारित है।
  • इस सूचकांक में संकेतक ढांचे का विस्तार करते हुए ‘ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (Energy Conservation Building Code), 2017’ ई मोबिलिटी को अपनाने, एम.एस.एम.ई. क्लस्टर में ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा बचत और संस्थागत सुधार जैसे नए संकेतकों को शामिल किया गया है।
  • यह सूचकांक 36 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में ऊर्जा दक्षता पहल की प्रगति पर नजर बनाए रखता है।
  • सूचकांक के महत्वपूर्ण बिंदु
  • सूचकांक में प्रदर्शन के आधार पर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को क्रमिक रूप से चार श्रेणियों, जैसे-फ्रंट रनर (Front Runner), अचीवर (Achiever), कंटेंडर (Contender) और एस्पिरेंट (Aspirant) में रखा गया है।
  • सूचकांक में कोई भी राज्य फ्रंट रनर श्रेणी में स्थान नहीं बना सका है।
  • सूचकांक में हरियाणा, कर्नाटक और केरल को ‘अचीवर श्रेणी’ में रखा गया है।
  • सूचकांक में ‘एस्पिरेंट  श्रेणी’ में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य मणिपुर तथा जम्मू और कश्मीर हैं।
  • तर्कसंगत तुलना करने के लिए राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (Total Primary Energy Supply : TPES) पर आधारित चार समूहों में बांटा गया है, जो पूरे राज्य की वास्तविक ऊर्जा मांग (बिजली, कोयला तेल, गैस आदि) को पूरा करने के लिए आवश्यक है।
  • टी.पी.ई.एस. ग्रुपिंग राज्यों को प्रदर्शन की तुलना करने और अपने सहकर्मी समूह (Peergroup) के भीतर सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने में मदद करेगा।
  • राज्यों द्वारा की गई प्रमुख पहलें
  • ‘राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक, 2019’ यह दर्शाता है कि राज्यों द्वारा की गई अधिकांश पहलें नीतियों और विनियम से संबंधित हैं।
  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा मानकों और लेबलिंग, ई.सी.बी.सी., परफॉर्म अचीव एंड ट्रेड (पी.ए.टी.) आदि के कार्यक्रमों के तहत तैयार की गई पहली पीढ़ी की ऊर्जा दक्षता नीतियों में से अधिकांश को राज्यों ने अच्छी तरह से अपनाया है और अगले चरण में उन्हें ऊर्जा बचत पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
  • इस वर्ष राज्य द्वारा भेजी गई प्रतिक्रियाओं के विश्लेषण के आधार पर राज्य की एजेंसियों के लिए तीन बिंदुओं वाले एजेंडे का सुझाव दिया गया है –
  • नीति-निर्माण और कार्यान्वयन में राज्यों की सक्रिय भूमिका। नीति-निर्माण से ज्यादा नीतियों के कार्यान्वयन पर जोर देना।
  • डेटा संकलन तथा सार्वजनिक रूप से उसकी उपलब्धता की व्यवस्था को मजबूत बनाना : वर्ष 2019 का सूचकांक तैयार करते समय राज्य की एजेंसियों ने विभिन्न विभागों से डेटा प्राप्त करने में सक्रियता दिखाई। हालांकि, उन्हें इस दिशा में और अच्छे तरीके से काम करने के लिए विभिन्न विभागों और निजी क्षेत्रों के साथ बेहतर तालमेल बैठाना होगा।
  • ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों की विश्वसनीयता बढ़ाने के उपाय करना : ऊर्जा दक्षता बाजार में सुधार करने के लिए आम उपभोक्ताओं के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जुड़ाव वाले कार्यक्रमों को सुनिश्चित करना अति आवश्यक है। इसके लिए राज्यों को ऊर्जा बचत के उपायों के अनुपालन के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से इन पर निगरानी रखने की भी व्यवस्था करनी होगी, जो कि ऊर्जा दक्षता नीतियों और कार्यक्रमों का अहम हिस्सा हैं।
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE)
भारत सरकार ने ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के अंतर्गत 1 मार्च, 2002 को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency) की स्थापना की। u  ब्यूरो का उद्देश्य ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के समग्र ढांचे के भीतर स्व-विनियमन और बाजार सिद्धांतों पर जोर देकर भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊर्जा तीव्रता को कम करने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ नीतियों और रणनीतियों को विकसित करने में सहायता करना है।
ऊर्जा दक्ष अर्थव्यवस्था हेतु गठबंधन (AEEE)  
यह ऊर्जा दक्षता संबंधी नीति की वकालत करने तथा ऊर्जा दक्षता बाजार में काम करने वाला एक गैर-लाभकारी संगठन है। u  यह भारत का एकमात्र संगठन है, जो एक संसाधन के रूप में ऊर्जा दक्षता के बारे में जागरूकता पैदा करने पर काम करता है। u  यह डेटा संचालित और साक्ष्य-आधारित ऊर्जा दक्षता नीतियों की वकालत करता है, जो ऊर्जा कुशल अर्थव्यवस्था बनाने के लिए देश के भीतर नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देगा। u  इस गठबंधन का उद्देश्य एक ऊर्जा कुशल भारत का निर्माण करना है।

सं. वृषकेतुराय