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मिशन कर्मयोगी

mission karmayogi
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 2 सितंबर, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘‘मिशन कर्मयोगी’’-राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (NPCSCB : National Programme for Civil Services Capacity Building) को मंजूरी प्रदान की।
  • ध्यातव्य है कि ‘मिशन कर्मयोगी’ सिविल सेवा क्षमता विकास के लिए एक नई राष्ट्रीय अवसंरचना है।
  • इसका उद्देश्य पारदर्शिता और प्रौद्योगिकी के माध्यम से भविष्य के लिए सरकारी कर्मचारियों को अधिक सृजनात्मक, रचनात्मक और नवोन्मेषी बनाना है।
  • इसके तहत सिविल सेवक विशिष्ट भूमिका-दक्षताओं से युक्त उच्चतम गुणवत्ता मानकों वाली प्रभावकारी सेवा प्रदान करने में सक्षम होंगे।
  • मिशन के तहत लगभग 46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को कवर करने के लिए वर्ष 2020-21 से लेकर वर्ष 2024-25 तक (5 वर्षों की अवधि के दौरान) कुल 510.86 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय की जाएगी।
  • पृष्ठभूमि
  • सिविल सेवकों की नियुक्ति सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम के आधार पर की जाती है, जो भारत सरकार के केंद्रीय व राज्य प्रशासन में सिविल सेवाओं के अधिकारी जैसे आईएएस, आईपीएस आदि के रूप में चुने जाते हैं।
  • इनकी क्षमता कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू करने और गवर्नेंस से जुड़े मुख्य कार्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • मुख्य विशेषताएं
  • ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम को सिविल सेवकों के क्षमता विकास के लिए आधारशिला रखने हेतु बनाया गया है ताकि वे भारतीय संस्कृति के साथ-साथ विश्वभर की श्रेष्ठ पद्धतियों से सीखते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहें।
  • ‘मिशन कर्मयोगी’ का कार्यान्वयन एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण आईगॉट-कर्मयोगी (Integrated Government Online Training : iGOT-Karmayogi) प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा।
  • मुख्य मार्गदर्शक सिद्धांत
  • इस कार्यक्रम के मुख्य मार्गदर्शक सिद्धांत इस प्रकार होंगे-

(i) ‘नियम आधारित’ मानव संसाधन प्रबंधन से ‘भूमिका आधारित’ प्रबंधन के परिवर्तन को सहयोग प्रदान करना।

(ii) सिविल सेवकों को उनके पद और क्षमताओं के आधार पर कार्य आवंटित करना।

(iii) ‘ऑफ-साइट (off-Site) सीखने की पद्धति’ को बेहतर बनाते हुए ‘ऑन-साइट (On-site) सीखने की पद्धति’ पर बल देना।

(iv) शिक्षण सामग्री, संस्थानों तथा कार्मिकों सहित साझा प्रशिक्षण अवसंरचना परितंत्र का निर्माण करना।

(v) सिविल सेवकों से संबंधित सभी पदों को भूमिकाओं, गतिविधियों तथा दक्षता के ढांचे (FRACs : Framework of Roles, Activities and Competencies) के आधार पर नवीनीकरण करना।

(vi) सार्वजनिक प्रशिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्टार्ट-अप और एकल विशेषज्ञों सहित सीखने की प्रक्रिया को सर्वोत्तम विषय-वस्तु के माध्यम से संचालित करना।

  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • सिविल सेवा क्षमता विकास योजनाओं को अनुमोदन प्रदान करने एवं उसकी निगरानी करने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद (Public Human Resources Council) का भी गठन किया गया है।
  • सिविल सेवकों के प्रशिक्षण मानकों में सामंजस्य बनाने के लिए तथा सभी केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों में पर्यवेक्षी की भूमिका निभाने के लिए क्षमता विकास आयोग (Capacity Building Commission) का गठन किया गया है।
  • डिजिटल परिसंपत्तियों के रख-रखाव और ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म हेतु एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV : Special Purpose Vehicle) बनाया गया है।
  • ध्यातव्य है कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम के लिए पूर्णतः स्वामित्व वाले विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) की स्थापना की जाएगी
  • एसपीवी एक ‘गैर-लाभ अर्जक’ (not-for-profit) कंपनी होगी, जो आईगॉट-कर्मयोगी प्लेटफॉर्म का स्वामित्व व प्रबंधन करेगी।
  • मिशन कर्मयोगी के तहत क्षमता विकास आयोग की भूमिका
  • वार्षिक क्षमता विकास योजनाओं का अनुमोदन करने में पीएम सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद की सहायता करना।
  • आंतरिक एवं बाह्य संकाय और संसाधन केंद्रों सहित साझा शिक्षण संसाधनों को सृजित करना
  • सिविल सेवा क्षमता विकास से जुड़े सभी केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों का कार्यात्मक पर्यवेक्षण करना।
  • हितधारक विभागों के साथ क्षमता विकास योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए समन्वय और पर्यवेक्षण करना।
  • सरकार को मानव संसाधन के प्रबंधन और क्षमता विकास के क्षेत्रों में आवश्यक नीतिगत उपाय सुझाना। प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, शिक्षण शास्त्र और पद्धति के मानकीकरण पर सिफारिशें पेश करना।
  • सभी सिविल सेवाओं में कॅरियर के मध्य में सामान्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए मानदंड निर्धारित करना।
  • निष्कर्ष
  • सिविल सेवा क्षमता के निर्माण के लिए ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाकर इसमें रूपांतरणकारी बदलाव करना भारत सरकार का एक स्वागत-योग्य कदम है
  • यह सरकार में मानव संसाधन प्रबंधन कार्य प्रणाली में मौलिक सुधार करेगा तथा सरकारी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए पैमाने और आधुनिक बुनियादी ढांचे का उपयोग करेगा।

सं. अमित शुक्ला