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मासिक पत्रिका जनवरी,2020 पी.डी.एफ. डाउनलोड

ईश्वर का एक प्रेमी अनेक वर्षों से साधनारत था। एक रात्रि उसने स्वप्न में किसी को यह कहते सुना कि प्रभु तेरे भाग्य में नहीं, व्यर्थ प्रतीक्षा मत कर। उसने इस स्वप्न की बात अपने मित्रों से कही। उसके मित्रों ने उससे कहा जब तूने सुन लिया कि प्रभु तेरे भाग्य में नहीं, तो अब क्यों व्यर्थ प्रार्थनाओं में लगा हुआ है। उस ईश्वर प्रेमी ने कहा; व्यर्थ प्रार्थनाएं? पागलों! प्रार्थना तो स्वयं में आनंद है। कुछ या किसी के मिलने या न मिलने से उसका क्या संबंध है? उस रात्रि उसने देखा प्रभु उसे आलिंगन में लिए हुए हैं। प्रभु के अतिरिक्त जिनकी कोई चाह नहीं है, असंभव है कि वे उसे न पा लें। इसके लिए किसी मंदिर या मस्जिद का होना या न होना गौड़ बात है। सर्वोच्च न्यायालय ने 9नवंबर, 2019 को अयोध्या विवाद पर भले ही विवादित भूमि एक पक्ष को देने का निर्णय दिया और दूसरे पक्ष को अन्यत्र भूमि देने का फैसला किया, इससे किसी की अपने इष्ट के प्रति आस्था में कमी या वृद्धि नहीं होने वाली है और यदि ऐसा होता है, तो वह वास्तविक आस्था नहीं है। अयोध्या पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को इसी दृष्टिकोण से देखे जाने की जरूरत है। आस्था का आकांक्षा से कोई मेल नहीं है। एक ईश्वर प्रेमी ने प्रभु से ढेर सारी अशर्फियां पाने की आकांक्षा व्यक्त की। प्रभु हंसे और उसे ढेर सारी अशर्फियां प्राप्त कर लेने का यत्न कर दिया। उस व्यक्ति ने जब अशर्फियों पर निगाह डाली, तो उसकी आँखें अलौकिक चमक से भर गईं और उसने आकाश की ओर देखा। उन अशर्फियों पर कुछ लिखा था। उसने अशर्फियां फेंक दी और नाचने लगा। उन अशर्फियों को पढ़कर उसमें न मालूम कैसी क्रांति हो गई थी।

ईश्वर की माया, अशर्फियां गायब हो गईं। वर्षों बाद किसी ने पूछा कि उन अशर्फियों पर ऐसा क्या लिखा था? वह बोला : उन पर लिखा था ‘ईश्वर ही काफी है’। सच है कि ईश्वर ही काफी है। जो जानते हैं वे इसकी पुष्टि करते हैं। सूत्र यही है जिन्हें सब पाना है, उन्हें सब छोड़ देना होगा। आस्था सदा आकांक्षा पर भारी पड़ेगी। अयोध्या विवाद पर अंतिम निर्णय आ चुका है जिसको कुछ मिला हो या जिसको कुछ न मिला हो, क्या इससे उनकी आस्था पर कोई फर्क पड़ेगा? शायद नहीं। इस अंक में अयोध्या विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को आवरण आलेख बनाया गया है।

भारत, संभवतः विश्व में; ‘गांधी’ नाम इस मायने में खास है कि सभी राजनीतिक पंथ इसके प्रति श्रद्धाभाव रखते हैं। सभी राजनीतिक दलों के बीच इतनी प्रतिष्ठा शायद ही किसी अन्य नेता को प्राप्त हो। यही वजह है कि भारत में किसी दल की सरकार हो, गांधी जयंती उत्साह के साथ मनाई जाती है। जब 150वीं गांधी जयंती मनाना हो, तो यह उत्साह चरम पर पहुंचना स्वाभाविक है। गांधीजी की सबसे खास बात सत्य के प्रति उनकी निष्ठा है। उनकी आत्मकथा इसका प्रमाण है। एक भी व्यक्ति ने अपनी जीवनी इतनी ईमानदारी से, इतनी प्रामाणिकता से न लिखी होगी। जीवनी में वे ऐसी सभी बातों को लिखते हैं, जिन्हें आदमी दूसरों से छिपाना चाहता है। ‘गांधीजी की 150वीं जयंती’ पर सामयिक आलेख में उनके जीवन घटनाक्रम और विचारों की संक्षिप्त प्रस्तुति है।

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आसियान सभी के लिए अवसरों वाला समूह है। इस समूह का 35वां शिखर सम्मेलन थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में संपन्न हुआ। इस अंक में आसियान शिखर सम्मेलन पर सामयिक आलेख प्रस्तुत है। 2001 में ब्रिक्स के विचार की स्थापना और 2002 में इसके प्रथम शिखर बैठक से ही दुनिया ने ब्रिक्स देशों को विशिष्ट संरचनात्मक समस्याओं तथा अवसरों वाले देशों के रूप में देखा है। ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाओं ने वैश्विक औसत विकास दर (GDP दर के संदर्भ में) को बढ़ा दिया है। न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और बहुपक्षीय व्यापार सुविधा समझौतों जैसी नई पहलों ने इस व्यापार समूह की प्रासंगिकता को बढ़ा दिया है। इस अंक में ब्रिक्स शिखर बैठक पर सामयिक आलेख प्रस्तुत किया गया है।

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राजनीति में वह दौर भी आ गया है कि जब सुबह उठें तो पूछें शाम वाली सरकार ही है या कोई और। हरियाणा में तो दो दलों ने सरकार का गठन करके कुछ स्थायित्व पा लिया, किंतु महाराष्ट्र में ऐसी सरकारों यानी सुबह कुछ और शाम को कुछ की बानगी देखने को मिली है। इस अंक में हरियाणा एवं महाराष्ट्र में नई सरकारों के गठन पर सामयिक आलेख प्रस्तुत है। पत्रिका के इस अंक में UPPCS 2019 प्रारंभिक परीक्षा का सामान्य अध्ययन का हल प्रश्न-पत्र और इसके साथ अर्पण अतिरिक्तांक पाठकों को दिया जा रहा है। आशा है कि यह अंक पाठकों की उम्मीदों पर खरा उतरेगा।