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मासिक पत्रिका अक्टूबर-नवंबर,2020 पी.डी.एफ. डाउनलोड

Magazine October November 2020

चीन से उद्भूत दक्षिण-पूर्व एशिया में लोकप्रिय एक खेल है ‘गो’ (GO)। शतरंज के खेल की भांति एक बोर्ड पर बने चौकोर खानों में काली-सफेद गोटियों से यह खेल खेला जाता है। इस खेल में प्रतिपक्षी के ज्यादा क्षेत्र को कब्जाने वाला विजेता होता है। कभी-कभी ज्यादा क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए उस समय का इंतजार किया जाता है जब प्रतिपक्षी चारों तरफ से घिर जाए और आक्रमण करने में कमजोर हो जाए। ‘गो’ एक इनडोर खेल है और चीनी घरों में खासा लोकप्रिय है, लेकिन चीन ‘गो’ सदृश खेल बाहर अपने पड़ोसी देशों की सीमाओं पर अपनी विस्तारवादी आकांक्षाओं के पूरण हेतु पूरी शिद्दत से खेलता है। भारत, भूटान, ताइवान, जापान, द. कोरिया, वियतनाम की स्थलीय एवं समुद्री सीमा पर चीन ‘गो’ खेल की ही भांति कभी पीछे हटने तो कभी आक्रामक हो जाने की चालें चलता है। भारत में डोकलाम के बाद गलवान घाटी में गत जून माह में चीन ने अपने कुत्सित इरादों को अंजाम दिया। दोनों देशों के बीच शारीरिक संघर्ष में हमारे 20 जवान शहीद हो गए। इस संघर्ष में चीनी सैनिक भी मारे गए हैं किंतु संख्या के संदर्भ में चीन की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं आई है। केवल पड़ोसी देश ही नहीं, बल्कि देश के अंदर अपने ही नागरिकों की बाहें मरोड़ने से चीन नहीं चूकता है। हांगकांग, तिब्बत, झिनझियांग इसके उदाहरण हैं। दरअसल उसे भय है कि आज का हांगकांग कल ताइवान बनेगा और आज का तिब्बत कल हांगकांग बनेगा।

15 जून, 2020 की खूनी झड़प को भी सैन्य विश्लेषक उसी ‘गो’ खेल की भांति देख रहे हैं, जो चीनी रणनीति का हिस्सा बना हुआ है। दोषदर्शियों के अनुसार, जब भारत कोरोना महामारी में उलझा हुआ था और उसकी अर्थव्यवस्था तीव्र गिरावट के दौर में थी, तभी चीन ने उस पर रणनीतिक प्रहार कर मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने की कोशिश की है। इसके उलट दूसरे समालोचकों के अनुसार, भारत ने यथास्थिति को तोड़कर चीन को प्रतिक्रिया के लिए मजबूर किया है। भारत ने सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण किया है, सेना को मजबूती प्रदान की है और धारा 370 हटाकर यह संदेश संप्रेषित किया है कि वह कश्मीर का शेष भू-भाग वापस लेने की ओर कदम बढ़ाएगा जिसका एक हिस्सा पाकिस्तान ने चीन को भी दिया है। अमेरिका के साथ भारत के बढ़ते नजदीकी संबंधों से भी चीन की त्योरियां चढ़ी हुई थीं। चीन खुद को ‘गो’ खेल में महारत प्राप्त खिलाड़ी मानकर अपनी विस्तारवादी आकांक्षाओं को परवान चढ़ाने में संलग्न है लेकिन उसे समझ लेना होगा कि यह खेल है, वह भी शतरंज सरीखा। भारत को इसमें महारत हासिल करने में देर नहीं लगेगी और वह दर्द देने वालों पर पलटवार अवश्य करेगा। इस अंक के आवरण आलेख में चीनी विस्तारवाद पर विस्तृत विमर्श प्रस्तुत किया गया है।

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शिक्षा पूर्ण मानव क्षमता को प्राप्त करने, एक न्याय संगत और न्यायपूर्ण समाज के विकास और राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए एक मूलभूत आवश्यकता है। शिक्षा वह उचित माध्यम है, जिससे देश की समृद्ध प्रतिभा और संसाधनों का सर्वोत्तम विकास एवं संवर्द्धन व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और विश्व की भलाई के लिए किया जा सकता है। इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किसी भी राष्ट्र की एक शिक्षा नीति तथा इसमें समय-समय पर बदलावों की आवश्यकता होती है। देश की बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लाई गई है। यह 21वीं शताब्दी की पहली शिक्षा नीति है। इस अंक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के महत्वपूर्ण पहलुओं को समेटते हुए सामयिक आलेख प्रस्तुत किया गया है।

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राफेल राजनीतिक रण के पार अब राष्ट्रीय अभिमान का प्रतीक बन चुका है। राफेल की पहली खेप भारतीय वायुसेना को प्राप्त हो चुकी है। आगे और प्राप्ति के पश्चात 36 राफेल लड़ाकू विमानों के सम्मिलन से निश्चित ही वायुसेना के आधुनिकीकरण को गति मिलेगी। इसी संदर्भ में राफेल विमान पर सामयिक आलेख इस अंक में प्रस्तुत है। आलेखों की दृष्टि से यह एक समृद्ध अंक है। उपर्युक्त आलेखों के अतिरिक्त इस अंक में 5 अन्य सामयिक आलेख भी प्रस्तुत हैं, जो निश्चित रूप से पाठकों का ज्ञानवर्धन करेंगे। पाठकों की विशेष मांग पर इस अंक में उ.प्र.पी.सी.एस. प्रारंभिक परीक्षा-2020 सामान्य अध्ययन का व्याख्यात्मक हल भी प्रस्तुत किया गया है। पाठकों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना के साथ यह अंक उनके समक्ष प्रस्तुत है।

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