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मानव पूंजी सूचकांक‚ 2020

Human Capital Index, 2020
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य  
  • हाल ही में ‘मानव पूंजी सूचकांक‚ 2020’ (Human Capital Index, 2020) की सूची जारी की गई।  
  • इस सूचकांक को विश्व बैंक (World Bank) द्वारा जारी किया जाता है। 
  • मानव पूंजी सूचकांक‚ 2020 में विश्व के कुल 174 देशों के स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी आंकड़ों को शामिल किया गया है। ये आंकड़े मार्च‚ 2020 तक के हैं।  
  • इस वर्ष मानव पूंजी सूचकांक का विषय है – ‘कोविड-19 के समय में मानव पूंजी’ (Human Capital in the Time of Covid-19)।
  • पृष्ठभूमि  
  • मूल रूप से मानव पूंजी का विचार लगभग 18वीं सदी में एक स्कॉटिश अर्थशास्त्री और दार्शनिक ‘एडम स्मिथ’ के द्वारा दिया गया।
  • मेसाचुसेट्‌स प्रौद्योगिकी संस्थान (Massachusetts Institute of Technology) के अर्थशास्त्री ‘रॉबर्ट गिब्बन’ के द्वारा वर्ष 2004 में एक नई अवधारणा पेश की गई‚ जिसे ‘कार्य-विशिष्ट मानव पूंजी’ (Task- Specific Human Capital) कहा गया।  
  • यह अवधारणा इस बात पर जोर देती है कि ज्यादातर मामलों में संचित मानव पूंजी कार्य के अनुसार कार्यदायी संस्थानों के लिए मूल्यवान है।  
  • इस सूचकांक को पहली बार वर्ष 2018 में जारी किया गया‚ जिसमें विश्व के 157 देशों को सूचीबद्ध किया गया।
  • मानव पूंजी सूचकांक  
  • इस सूचकांक के अंतर्गत मानव पूंजी से संबद्ध प्रत्येक घटकों का अध्ययन किया जाता है।  
  • यह ‘मानव विकास अभ्यास समूह’ (Human Development Practice Group) एवं विश्व बैंक के ‘विकास अर्थशास्त्र समूह’ (Development Economics Group) के मध्य सहयोग प्रदान करता है।  
  • इस सूचकांक का उद्देश्य वर्तमान स्वास्थ्य और शिक्षा के परिणामों में सुधार लाना है‚ जिससे आने वाली भावी पीढ़ी की उत्पादकता को आकार दिया जा सके।  
  • मानव पूंजी सूचकांक मुख्य रूप से जन्मजात बच्चों से लेकर 18 वर्ष तक की उम्र वाले व्यक्ति को शैक्षिक एवं स्वास्थ्य संबंधी अवसरों को प्रदान कराता है‚ जिससे वह वर्तमान परिस्थितियों का सामना कर सकें।
  • इस सूचकांक के अंतर्गत यह आकलित किया जाता है कि कौन-सा देश अपने प्रत्येक नागरिक की शिक्षा और स्वास्थ्य पर कितनी पूंजी खर्च करता है।
  • वैश्विक परिदृश्य  
  • वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार विश्व के लगभग सभी देश कोविड-19 का दंश झेल रहे हैं‚ जिसके कारण मानव पूंजी विकास‚ शिक्षा एवं स्वास्थ्य आदि कार्यों पर बुरा प्रभाव पड़ा है। è 
  • रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 के कारण विश्व के लगभग 1 बिलियन से अधिक बच्चे विद्यालय जाने से वंचित हैं।  
  • मानव पूंजी सूचकांक‚ 2020 के अंतर्गत विश्व की लगभग 98 प्रतिशत आबादी के आंकड़ों को शामिल किया गया है।  
  • कोविड-19 का प्रभाव मुख्य रूप से विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ा।
  • सूचकांक की सूची
  • इस सूचकांक में सिंगापुर को शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है‚ जबकि सबसे निचले पायदान पर ‘सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक’ (Central African Republic) है।

शीर्ष पांच देश

निचले पांच देश

क्रम

देश

स्कोर

क्रम

देश

स्कोर

1

सिंगापुर

0.88

174

मध्य अफ्रीकी गणराज्य

0.29

2

हांगकांग (एसएआर चीन)

0.81

173

चाड

0.30

3

जापान

0.80

172

दक्षिणी सूडान

0.31

4

कोरिया गणराज्य

0.80

171

नाइजर

0.32

5

कनाडा

0.80

170

माली

0.32

  • सूचकांक जारी करने के मानदंड
  • मानव पूंजी सूचकांक को जारी करने हेतु आवश्यक मानदंडों में मुख्यत: ज्ञान‚ कौशल और स्वास्थ्य शामिल किए जाते हैं।  
  • इस सूचकांक के तीन घटक हैं-

1. उत्तरजीविता – जन्म से लेकर 5 वर्ष की आयु तक जीवित रहने वाले बच्चों की जीवन दर के आंकड़ों को शामिल किया जाता है।

2. स्कूल – इसके तहत शिक्षा की गुणवत्ता और मात्रा के संयोजन को शामिल किया गया है।

3. स्वास्थ्य – इसके तहत वयस्क और बच्चों की जीवन दर और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का मूल्यांकन किया जाता है। 

  • भारत के संदर्भ में  
  • मानव पूंजी सूचकांक‚ 2020 में भारत को 116वां स्थान प्राप्त हुआ है। è 
  • वर्ष 2020 में भारत का स्कोर 0.49 है‚ जबकि वर्ष 2018 में भारत का स्कोर 0.44 था। è 
  • भारत के पड़ोसी देशों में श्रीलंका 71वें‚ नेपाल 109वें‚ भूटान 121वें तथा पाकिस्तान 144वें स्थान पर है।  
  • ब्रिक्स देशों में भारत के अतिरिक्त चीन को 45वां‚ रूस को 41वां‚ ब्राजील को 91वां तथा दक्षिण अफ्रीका को 135वां स्थान प्राप्त हुआ।  
  • हालांकि भारत सरकार ने मानव पूंजी को मजबूती प्रदान करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों को आरंभ किया है‚ जिनमें प्रमुख हैं- आयुष्मान भारत योजना‚ राष्ट्रीय शिक्षा नीति‚ आत्मनिर्भर भारत योजना‚ समग्र शिक्षा आदि।
  • कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य  
  • मानव पूंजी सूचकांक‚ 2020 में 17 अन्य देशों को शामिल किया गया है। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2018 में 157 देशों को सूचीबद्ध किया गया था।  
  • वर्ष 2018 में भारत को 115वां स्थान प्राप्त हुआ था।  
  • ध्यातव्य हो कि विश्व बैंक के द्वारा कुछ अन्य रिपोर्ट भी जारी की जाती हैं‚ जिनमें से प्रमुख हैं-

1. वैश्विक आर्थिक संभावनाएं (Global Economic Prospects)

2. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Bussiness)

3. विश्व विकास रिपोर्ट (World Development Report)  

  सं. अभय पाण्डेय