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भारत : GPAI के संस्थापक सदस्यों में शामिल

Global Partnership on Artificial Intelligence
  • वर्तमान संदर्भ
  • 15 जून, 2020 को ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर निर्मित वैश्विक साझेदारी’ (GPAI : Global Partnership on Artificial Intelligence) को लांच किया गया।
  • अन्य संस्थापक सदस्य
  • ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वैश्विक साझेदारी’ यानी GPAI के संस्थापक सदस्यों में भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन यूनियन (EU),  ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, इटली, जापान, मेक्सिको, न्यूजीलैंड, सिंगापुर एवं स्लोवेनिया भी शामिल हैं।
  • GPAI
  • GPAI एक अंतरराष्ट्रीय और बहु-हितधारक (Multistakeholder) पहल है।
  • विभिन्न साझीदारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से GPAI उद्योगों, नागरिक समाज, सरकारों और शिक्षाविदों के अग्रणी विशेषज्ञों को एक मंच पर लेकर आएगा, जिससे वो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उत्तरदायित्वपूर्ण विकास को बढ़ावा देने में सहयोग कर सकें।
  • साथ ही ये विशेषज्ञ वर्तमान वैश्विक आपदा (कोविड-19) से बेहतर तरीके से निपटने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता का प्रदर्शन करने हेतु कार्य पद्धति का भी विकास कर सकेंगे।
  • GPAI के सचिवालय की स्थापना पेरिस स्थित ‘आर्थिक सहयोग और विकास संगठन’ (OECD : Organisation of Economic Co-operation and Development) में की गई है।
  • GPAI के दो विशेषज्ञ केंद्र-मॉन्ट्रियल और पेरिस में स्थापित किए गए हैं।
  • GPAI में OECD की भूमिका
  • OECD, अंतरराष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति नेतृत्व (International AI Policy Leadership) तथा GPAI के वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यों के बीच संयोजन हेतु सेतु का कार्य करेगा।
  • OECD के विशेषज्ञ केंद्र (Expertise Centres) AI परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए प्रशासनिक और अनुसंधानीय सहायता प्रदान करेंगे।
  • ये विशेषज्ञ केंद्र एक वार्षिक GPAI बहुहितधारक विशेषज्ञ समूह पूर्णसत्र का आयोजन भी करेंगे।
  • ऐसा प्रथम आयोजन कनाडा में दिसंबर, 2020 में प्रस्तावित है।
  • क्या है कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)?
  • मानवीय बुद्धिमत्ता अनुभूति (Perception), तर्कबुद्धि (Reasoning), सीखना (Learning), संचार स्थापित करने तथा जटिल परिस्थितियों में कार्य करने आदि क्षमताओं से युक्त होती है।
  • जबकि AI का लक्ष्य मानवीय बुद्धि की उपर्युक्त विशेषताओं से युक्त कृत्रिम मशीनों (कंप्यूटरों आदि) का विकास करना है, ताकि ये मशीनें उसी प्रकार या उससे अधिक कुशलता के साथ निर्देशित कार्यों का निष्पादन (Execution) कर सकें, जैसे कि मनुष्य करते हैं।
  • AI के अनुप्रयोग
  • जैसा कि नीति आयोग ने अपने ‘नेशनल स्ट्रेटजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ (NSAI) नामक वार्ता-पत्र (Discussion Paper) में उद्धृत किया है, सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु AI का उपयोग पांच महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाएगा-
  • स्वास्थ्य देखभाल-सस्ती एवं सुगम तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने हेतु,
  • कृषि-कृषकों की आय बढ़ाना, कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाना तथा फसलों की बर्बादी रोकने हेतु,
  • शिक्षा-गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने हेतु,
  • स्मार्ट शहर – शहरों में बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए एक अच्छे आधारभूत ढांचे का विकास तथा
  • स्मार्ट परिवहन एवं यातायात – यातायात के स्मार्ट व सुरक्षित तौर-तरीके मुहैया करना तथा यातायात समस्याओं को समाप्त  करना।
  • इसके अलावा; विनिर्माण, ऊर्जा, खुदरा कारोबार, स्वचालन (Automation) आदि क्षेत्रों में AI के व्यापक उपयोग किए जा सकते हैं।
  • AI पर नीति आयोग का वार्ता-पत्र
  • भारत के वित्त मंत्री ने वर्ष 2018-19 के अपने बजट भाषण में नीति आयोग को कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर राष्ट्रीय कार्यक्रम के गठन का निर्देश दिया था।
  • इसी परिप्रेक्ष्य में जून, 2018 में नीति आयोग द्वारा भारत में AI के विकास व अनुप्रयोग पर ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर राष्ट्रीय रणनीति’’ शीर्षक से एक विस्तृत वार्ता-पत्र प्रकाशित किया गया।
  • नीति आयोग ने इस वार्ता-पत्र को # Al for All नामक ब्रांड नेम दिया।
  • इसका लक्ष्य भारत को विश्व के अग्रणी AI विकासकर्ता देशों की श्रेणी में लाना है।
  • भारत का राष्ट्रीय AI पोर्टल
  • 30 मई, 2020 को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने भारत के राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता पोर्टल www.ai.gov.in को लांच किया।
  • इस पोर्टल को सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के ‘राष्ट्रीय ई-शासन प्रभाग’ (National e-Governance Division) तथा नासकॉम (NASSCOM) द्वारा संयुक्त रूप से इस पोर्टल का संचालन किया जाएगा।
  • भारत में AI संबंधित गतिविधियों के विकास के लिए यह पोर्टल एक डिजिटल मंच के रूप में कार्य करेगा।
  • उपसंहार
  • जिस प्रकार प्रकृति परिवर्तनशील है, उसी प्रकार तकनीकी भी परिवर्तनशील है। मनुष्य की सृजनशीलता (Creativity) तकनीक के आयाम को बदलती रहती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भी मनुष्य की इसी सृजनात्मकता का एक उन्नत पहलू है। यह 5G, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, ऑटोमेशन आदि अन्य के साथ मिलकर चतुर्थ औद्योगिक क्रांति के युग का सूत्रपात करेंगी। चूंकि भारत का लक्ष्य चतुर्थ औद्योगिक क्रांति का नेतृत्वकर्ता बनना है, अतः AI के प्रति समुचित जागरूकता अवश्यंभावी हैं। किंतु जिस प्रकार तकनीकी के स्याह पहलू भी होते हैं, उसी प्रकार AI के भी कुछ स्याह पहलू अवश्य सामने आएंगे। अतः हमें इसके नकारात्मक पहलुओं के प्रति सावधान रहने की भी आवश्यकता है।

सं. अमित त्रिपाठी