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भारत-डेनमार्क हरित रणनीतिक साझेदारी

India-Denmark Green Strategic Partnership
  • वर्तमान परिदृश्य  
  • 28 सितंबर‚ 2020 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मैट फ्रेडरिक्सन के मध्य एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया।  
  • वार्तालाप के दौरान‚ दोनों देशों के बीच स्थायी अर्थव्यवस्थाओं और समाजों में प्रगति के लिए समान हितों पर सहमति के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन‚ हरित परिवर्तन सहित कोविड-19 महामारी से निपटने जैसे वैश्विक मामलों पर विचार-विमर्श किया गया।  
  • ध्यातव्य है कि भारत-डेनमार्क का यह संयुक्त वक्तव्य मुख्य रूप से हरित रणनीतिक साझेदारी पर आधारित है। 
  • हरित रणनीतिक साझेदारी पेरिस समझौते और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के एक महत्वाकांक्षी कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ राजनीतिक सहयोग को परस्पर आगे बढ़ाने की दिशा में एक लाभप्रद समझौता है।  
  • महत्वपूर्ण यह है कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने हरित रणनीतिक साझेदारी की स्थापना के महत्व को स्वीकार किया‚ जिसके तहत भारत और डेनमार्क संबंधित मंत्रालयों‚ संस्थानों और हितधारकों के माध्यम से एक-दूसरे का सहयोग करेंगे।
  • भारत-डेनमार्क संयुक्त वक्तव्य के प्रमुख बिंदु  
  • भारत-डेनमार्क का संयुक्त वक्तव्य निम्नलिखित विषयों पर आधारित है- ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में  
  • दोनों देशों ने अपतटीय पवन और नवीकरणीय ऊर्जा पर रणनीतिक क्षेत्रीय सहयोग के साथ-साथ पवन ऊर्जा और प्रौद्योगिकी स्थानांतरण पर भारत-डेनमार्क ऊर्जा सहभागिता (INDEP : India-Denmark Energy Partnership) के लिए साझा प्रतिबद्धता जताई है।  
  • इसके अलावा दोनों देश जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध वैश्विक स्तर पर सहयोग करने हेतु समहत हुए।
  • पर्यावरण‚ जल और चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में  
  • दोनों देश जल प्रौद्योगिकी गठबंधन के माध्यम से जलापूर्ति‚ जल वितरण‚ अपशिष्ट जल प्रबंधन‚ सीवरेज सिस्टम‚ उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग इत्यादि विशिष्ट क्षेत्रों में परस्पर सहयोग करेंगे। 
  • जल क्षमता और गैर-राजस्व जल (Water loss) के संदर्भ में‚ भारतीय जल शक्ति मंत्रालय और डेनमार्क पर्यावरण संरक्षण एजेंसी व खाद्य मंत्रालय के बीच 3 वर्ष (2021-23) की अवधि के लिए अनुबंध किए जाने हैं।
  • स्मार्ट शहरों सहित सतत शहरी विकास के क्षेत्र में  
  • भारत-डेनमार्क ने गोवा में शहरी लिविंग लैब (Urban Living Lab) के माध्यम से स्मार्ट शहरों सहित सतत शहरी विकास के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग पर प्रतिबद्धता जताई है।  
  • ध्यातव्य है कि सतत शहरी विकास पर भारत-डेनमार्क के दूसरे संयुक्त कार्यकारी समूह की वर्चुअल बैठक का आयोजन 26 जून‚ 2020 को हुई थी।  
  • मिशन के तहत उदयपुर और आरहूस‚ तुमकुरू और अलबोर्ग के बीच मौजूदा नगर-से-नगर सहयोग को मजबूत किए जाएंगे।
  • विज्ञान प्रौद्योगिकी‚ नवाचार और डिजिटलीकरण के क्षेत्र में  
  • भारत और डेनमार्क सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP: Public-Private Partnerships) के तहत विज्ञान‚ प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI : Science, Technology and Innovation) में निवेश को बढ़ाने पर भी सहमत हुए हैं।  
  • ध्यातव्य है कि एसटीआई में सहयोग से दोनों देशों के बीच हरित रणनीतिक साझेदारी को समर्थन मिलेगा।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य  
  • भारत और डेनमार्क व्यापार‚ कारोबार और नौवहन के क्षेत्र में सहयोग करते हुए पोत निर्माण और समुद्री सेवाओं का एक साथ विस्तार करेंगे।  
  • इसके अलावा दोनों देश खाद्य‚ कृषि‚ स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान (Life Science) के क्षेत्रों में सहयोग के साथ-साथ सांस्कृतिक सहयोग और श्रम गतिशीलता में आपसी समझ को बढ़ावा देने पर भी अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है।  
  • जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में दोनों देशों ने आर्कटिक परिषद के ढांचे के भीतर परस्पर सहयोग की अपनी इच्छा व्यक्त की है‚ जो पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • निष्कर्ष 
  • डेनमार्क और भारत के बीच हरित रणनीतिक साझेदारी को स्थापित करने का निर्णय दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
  • बेहतर यह होगा कि दोनों देश एक कार्ययोजना को तैयार करते हुए शीघ्रता से इसके कार्यान्वयन को पूर्ण करें।  

सं.  अमित शुक्ला