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भारत के प्रथम CDS नियुक्त

Appointed India's first CDS
  • वर्तमान संदर्भ
  • 1 जनवरी, 2020 को नई दिल्ली में भारतीय थल सेना के पूर्व जनरल (सेना प्रमुख) बिपिन रावत ने बहुप्रतीक्षित देश के प्रथम ‘‘रक्षा प्रमुख’’ ( Chief of Defence Staff : CDS) का पद ग्रहण किया।
  • गौरतलब है कि 24 दिसंबर, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में देश के रक्षा प्रबंधन में महत्वपूर्ण सुधार का निर्णय लिया गया था।
  • जिसके अंतर्गत संयुक्त भारतीय सेनाओं (थल सेना, नौसेना, वायु सेना) के बीच समन्वय तथा उनकी मारक क्षमता में सुधार के लिए CDS की नियुक्ति का निर्णय लिया गया था।
  • नवनियुक्त CDS रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत गठित एक नए विभाग ‘‘सैन्य मामलों के विभाग’’ (Department of Military Affairs : DMA) के प्रमुख के रूप में कार्य करेगा।
  • वर्तमान निर्णय की पृष्ठभूमि
  • भारत की रक्षा सेनाओं के लिए CDS संस्था की सिफारिश सर्वप्रथम अप्रैल, 2000 में कारगिल पुनरीक्षण समिति (Kargil Review Committee : KRC) द्वारा की गई थी।
  • विदित हो कि KRC का गठन के. सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में वर्ष 1999  में कारगिल युद्ध की समाप्ति के तीन दिन बाद 29 जुलाई, 1999 को किया गया था।
  • KRC की ने अपनी रिपोर्ट 15 दिसंबर, 1999 को भारत सरकार को सौंप दी।
  • KRC की रिपोर्ट की सिफारिशों के क्रियान्वयन के लिए एक मंत्रिसमूह (GoM) का गठन अप्रैल, 2000 में तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में किया गया था।
  • GoM ने 26 फरवरी, 2001 को प्रधानमंत्री को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली के रूपांतरण’  के नाम से संदर्भित रिपोर्ट में CDS संस्था के सृजन की सिफारिश की थी।
  • वर्ष 2019 में नरेंश चंद्र टास्क फोर्स ने थलसेना, नौसेना और वायुसेना प्रमुखों के वरिष्ठतम सदस्य की अध्यक्षता में एक ‘चीफ ऑफ स्टॉक कमेटी (CoSC) के पद के सृजन का सुझाव दिया था।
  • पुनः वर्ष 2016 में दिवंगत पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर परर्िकर ने CDS के पद के सृजन की वकालत की थी।
  • उपर्युक्त संदर्भ में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 15 अगस्त, 2019 को प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था, ‘‘भारत में खंडित दृष्टिकोण नहीं होना चाहिए। हमारी पूरी सैन्यशक्ति को एकजुट होकर काम करना और आगे बढ़ना होगा और इसके लिए एक स्थायी CDS की नियुक्ति अनिवार्य है।’’
  • CDS के पद से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
  • CDS एक चार सितारा (Four Star) जनरल होगा, जिसका वेतन एवं अन्य परिलब्धियां ‘सेवारत प्रमुख’ (Service Chief) के बराबर होगी।
  • विदित हो कि भारतीय सेना प्रमुख (General of Indian Army) भी एक चार सितारा कमीशंड अधिकारी होता है CDS तीनों सेनाओं के प्रमुखों को कमांड (आदेशित) नहीं करेंगे।
  • CDS तीनों सेनाओं से संबंधित मामलों में रक्षा मंत्री का प्रमुख सैन्य सलाहकार (Principal Military Advisor) होगा।
  • लेकिन साथ ही तीनों सेनाओं के सैन्य प्रमुख रक्षा मंत्री को अपनी सेनाओं के संदर्भ में सलाह देना जारी रखेंगे।
  • CDS सैन्य मामलों के विभाग (DMA) का प्रमुख होगा।
  • CDS रक्षा सेवाओं के लिए आवंटित बजट का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करेगा।
  • साथ ही, CDS तीनों सेनाओं के मध्य अधिक समन्वय स्थापित करते हुए ट्रेनिंग, प्रचालन (Operation) व उपकरणों की खरीद (Procurement) की नीतियों में एकीकरण स्थापित करेगा।
  • CDS की अतिमहत्वपूर्ण जिम्मेदारी रक्षा हथियारों एवं उपकरणों में स्वदेशी को अधिकतम सीमा तक सुगम बनाना होगा।
  • उपर्युक्त संदर्भ में CDS तीनों सेनाओं के लिए संपूर्ण रक्षा अधिग्रहण की नीति को निरूपित करने के दौरान अधिकतम सीमा तक स्वदेशीकरण को महत्व देगा।
  • DMA के प्रमुख के रूप में CDS का कार्य विस्तार
  • CDS के नेतृत्व में सैन्य मामलों का विभाग (DMA) निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्य करेगा –
  • संघ की सशस्त्र सेना यानी थलसेना, नौसेना और वायु सेना।
  • रक्षा मंत्रालय के समन्वित मुख्यालय जिनमें सेना मुख्यालय, नौसेना मुख्यालय, वायु सेना मुख्यालय और डिफेंस स्टाफ मुख्यालय शामिल हैं।
  • प्रादेशिक सेना (Territorial Army)।
  • थलसेना, नौसना और वायु सेना से जुड़े कार्य।
  • चालू नियमों (Prevalent rules) और प्रक्रियाओं के अनुसार पूंजीगत प्राप्तियों को छोड़कर, सेवाओं के लिए विशिष्ट खरीद।
  • CoSC के स्थायी अध्यक्ष के रूप में CDS की भूमिका
  • CDS चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (CoSC) का स्थायी अध्यक्ष होगा।
  • गौरतलब है कि CoSC के प्रमुख के रूप में तीनों सेनाओं में सबसे वरिष्ठ सदस्य को नियुक्त किया जाता है।
  • CDS तीनों सैन्य सेवाओं के लिए प्रशासनिक कार्यों की देख-रेख करेंगे। तीनों सेनाओं से जुड़ी एजेंसियों, संगठनों तथा साइबर व स्पेस से संबंधित कार्यों की कमान CDS के हाथों में होगी। 
  • CDS रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) की अध्यक्षता वाली रक्षा नियोजन समिति के सदस्य होंगे।
  • यह परमाणु कमान प्राधिकरण (ACA) के सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे।
  • प्रथम CDS के पदभार संभालने के तीन वर्ष के भीतर तीनों सेनाओं के परिचालन (Operation), सम्भारिकी (Logistics), आवाजाही, प्रशिक्षण, सहायक सेवाओं, संचार, मरम्मत एवं रख-रखाव इत्यादि में संयुक्तता (Jointness)/संबद्धता सुनिश्चित करेगा।
  • आधारभूत ढांचे का अधिकतम उपयोग करते हुए तीनों सेनाओं में तार्किक संयुक्तता/संबद्धता सुनिश्चित करेगा।
  • एकीकृत क्षमता विकास योजना (Integrated Capability Development Plan-ICDP) के लिए पांच वर्षीय ‘रक्षा पूंजीगत अधिग्रहण योजना’ (Defence Capital Aquisition Plan : DCAP) तथा द्विवर्षीय सतत वार्षिक अधिग्रहण योजना (Annual Aquisition Plan : AAP) को कार्यान्वित करेंगे।
  • अनुमानित बजट के आधार पर पूंजीगत सामान खरीद के प्रस्तावों को अंतर-सेवा प्राथमिकता देगा।
  • अपव्यय में कमी करके सशस्त्र सेनाओं की लड़ाकू क्षमताएं बढ़ाने के लिए तीनों सेनाओं में कार्यों की उत्कृष्टता को लागू करेगा।
  • निष्कर्ष
  • उम्मीद की जा रही है कि उच्च रक्षा प्रबंधन में इस सुधार से सशस्त्र बल समन्वित रक्षा सिद्धांतों एवं प्रक्रियाओं को लागू करने में समर्थ हो जाएंगे। इसी के साथ तीनों सेनाओं में एक साझा रणनीति के अनुसार, एकीकृत सैन्य अभियान के संचालन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। प्रशिक्षण, सम्भारिकी एवं परिचालन के साथ-साथ खरीद को प्राथमिकता देने में भी संयुक्त रणनीति अपनाने के लिए समन्वित प्रयास करने से देश लाभान्वित होगा।

सं. अमित त्रिपाठी