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भारतीय सेना में महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन

Permanent Commission for Women in Indian Army
  • चर्चा में क्यों?
  • 17 फरवरी‚ 2020 को सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय सेना में महिला अधिकारियों के लिए पुरुष अधिकारियों के समान ही स्थायी कमीशन एवं कमान अधिकार के संबंध में निर्णय सुनाया।
  • पृष्ठभूमि
  • लंबे समय तक सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका चिकित्सकीय सेवा जैसे- डॉक्टर एवं नर्स तक ही सीमित थी।
  • वर्ष 1992 से भारतीय सेना में महिला अधिकारियों के कमीशन की शुरुआत हुई।
  • प्रारंभ में महिला अधिकारियों की नियुक्ति विमानन‚ इंजीनियरिंग‚ रसद‚ कानून एवं कार्यकारी पदों पर 5 वर्ष की अवधि के लिए किया जाता था‚ जिसे 5 वर्ष तक बढ़ाया भी जा सकता था।
  • वर्ष 2005 में ‘महिला विशेष योजना’ (WSES) जिसके तहत महिलाओं की सेना में नियुक्ति की जाती थी‚ को ‘शार्ट सर्विस कमीशन’ (SSC) में बदल दिया गया।
  • इस नीतिगत संशोधन के तहत अब महिलाओं को सेना में 10 वर्ष तक सेवा की अनुमति दे दी गई‚ जिसे 4 वर्ष और बढ़ाया जा सकता था।
  • वर्ष 2006 में हुए संशोधनों के अनुसार‚ महिला अधिकारी 10 वर्ष की सेवा के अंत में स्थायी कमीशन का विकल्प नहीं चुन सकती थीं‚ जबकि पुरुष अधिकारी ऐसा कर सकते थे।
  • इस प्रकार‚ महिला अधिकारियों को किसी भी कमान नियुक्ति से बाहर रखा गया था और वे सैन्य अधिकारियों को दी जाने वाली पेंशन के लिए अर्हता भी प्राप्त नहीं कर सकती थीं‚ जो एक अधिकारी के रूप में सेवा के 20 वर्ष बाद शुरू होती है।
  • 72वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला अधिकारियों के लिए सेना में स्थायी कमीशन की घोषणा की।
  • वर्ष 2019 में सरकार ने 10 विभागों में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) में चयनित महिलाओं को स्थायी कमीशन दिए जाने की घोषणा की लेकिन साथ में कमान नियुक्ति न दिए जाने की बात कही।
  • वर्ष 2019 की इस घोषणा का लाभ मार्च‚ 2019 के बाद सेवा में आने वाली महिलाओं को ही देने की बात कही गई।
  • स्थायी कमीशन से संबंधित याचिकाएं
  • वर्ष 2003 में पहली बार बबिता पुनिया द्वारा सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की गई।
  • मेजर लीना गुरव द्वारा 16 अक्टूबर‚ 2006 को एक और याचिका दायर की गई‚ जिसमें वर्ष 2006 में लगाए गए सेवा के नियमों एवं शर्तों को चुनौती देने के साथ ही महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के संबंध में थी।
  • सितंबर‚ 2008 में रक्षा मंत्रालय ने एक आदेश पारित किया‚ जिसमें महिला अधिकारियों को न्यायाधीश‚ महाधिवक्ता और शिक्षा सेवा कोर में स्थायी कमीशन देने की घोषणा की गई।
  • इस घोषणा के संबंध में एक और जनहित याचिका वर्ष 2008 में दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर की गई।
  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 2003‚ 2006 एवं वर्ष 2008 की याचिकाओं को एक साथ सुना तथा वर्ष 2010 में फैसला सुनाया‚ जिसमें ‘शॉर्ट सर्विस कमीशन’ में चयनित वायु सेना एवं सेना की महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की बात कही।
  • हालांकि इस फैसले को भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई।
  • सरकार के तर्क
  • महिलाओं को सेना में ‘कमांड पोस्ट’ नहीं दी जा सकती क्योंकि अपनी शारीरिक क्षमताओं की सीमाओं और घरेलू दायित्वों की वजह से वह सैन्य चुनौतियों और खतरों का सामना नहीं कर पाएंगी।
  • महिलाएं गर्भावस्था की वजह से लंबे समय तक काम से दूर रहती हैं।
  • महिलाओं को सीधी लड़ाई में नहीं उतारा जाना चाहिए क्योंकि युद्ध बंदी जैसी स्थिति में व्यक्ति‚ संस्था एवं सरकार के लिए शारीरिक एवं मानसिक तौर पर बहुत तनावपूर्ण स्थिति होगी।
  • पुरुष सैन्य अधिकारी महिलाओं को अपने समकक्ष स्वीकार नहीं कर पाएंगे क्योंकि सेना में ज्यादातर पुरुष ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के प्रमुख बिंदु
  • जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ एवं जस्टिस रस्तोगी की खंडपीठ ने वर्ष 2010 के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने सभी सेवारत महिला अधिकारियों को 10 विभागों में स्थायी कमीशन दिए जाने का निर्देश दिया।
  • ये विभाग हैं- न्यायाधीश‚ महाधिवक्ता‚ सेना शिक्षा वाहिनी‚ संकेत‚ इंजीनियर्स‚ सैन्य उड्डयन‚ सेना वायु रक्षा वाहिनी‚ इलेक्ट्रॉनिक एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग‚ सेना सेवा कोर‚ सेना आयुध कोर‚ इंटेलीजेंस।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने महिलाओं द्वारा युद्ध संचालन (Combat Operation) का फैसला नीतिगत बताते हुए सेना पर छोड़ दिया।
  • निर्देश के बाद महिला अधिकारी पुरुष अधिकारियों के समान ही सेवानिवृत्ति तक कार्य कर सकेंगी और पेंशन भी प्राप्त कर सकेंगी।
  • शॉर्ट सर्विस कमीशन
  • इसमें अधिकारी 10 वर्ष तक सेना में रह सकता है‚ जिसे 14 वर्ष तक बढ़ाया भी जा सकता है।
  • स्थायी कमीशन प्राप्त करने का विकल्प (केवल पुरुषों को)।
  • इसमें चयन सीडीएस के द्वारा होता है‚ जिसमें महिला एवं पुरुष दोनों भाग ले सकते हैं।
  • चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में पढ़ाई एवं ट्रेनिंग होती है।
  • स्थायी कमीशन
  • इसमें अधिकारी सेवानिवृत्ति की उम्र तक सेना में रह सकता है।
  • इसमें चयन राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), भारतीय सैन्य अकादमी अथवा ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) के माध्यम से होता है।
  • अभी तक स्थायी कमीशन केवल पुरुषों के लिए था।
  • वायु सेना एवं नौसेना में महिलाओं की स्थिति
  • इसमें महिलाओं को पुरुषों की तरह ही स्थायी कमीशन प्राप्त करने का अधिकार है।
  • वायु सेना में महिलाएं युद्धक भूमिका निभा सकती हैं।
  • वर्ष 2016 में तीन महिलाओं (भावना कंठ‚ अवनि चतुर्वेदी एवं मोहना सिंह) को फाइटर पायलट के रूप में नियुक्त किया गया था।
  • नौसेना में भी महिलाएं रसद‚ कानून‚ हवाई यातायात नियंत्रण‚ पायलट एवं नौसैनिक निरीक्षक के रूप में सेवाएं दे सकती हैं।
  • वर्ष 2019 में लेफ्टिनेंट शिवांगी को पहली नौसेना पायलट नियुक्त किया गया।
  • निष्कर्ष
  • सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह निर्णय समाज में लैंगिक भेद-भाव समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
  • इस निर्णय से महिलाएं भी पुरुषों के समान ही सेना में प्रशिक्षण एवं पदोन्नतियां प्राप्त कर सकेंगी।