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बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक‚ 2020

  • वर्तमान परिपे्रक्ष्य
  • हाल ही में संसद के द्वारा बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक‚ 2020 (Banking Regulation Amendment Bill, 2020) को पारित किया गया।  
  • इस विधेयक के पारित होने के बाद सभी सहकारी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) की निगरानी के अंतर्गत आ जाएंगे‚ जिससे जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा उचित रूप से की जा सकेगी।
  • पृष्ठभूमि
  • भारत में सर्वप्रथम वर्ष 1949 में बैंकों के विनियमन हेतु ‘बैंकिंग विनियमन अधिनियम‚ 1949’ (Banking Regulation Act, 1949) को संसद के द्वारा पारित किया गया था।  
  • यह कानून 16 मार्च‚ 1949 से लागू हुआ था।  
  • हालांकि बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक‚ 2020 वर्ष 1949 के अधिनियम को संशोधित करता है।  
  • बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक‚ 2020 को 26 जून‚ 2020 को प्रख्यापित किया गया। è 
  • इस विधेयक को 16 सितंबर‚ 2020 को लोक सभा से तथा 22 सितंबर‚ 2020 को इसे राज्य सभा से मंजूरी प्राप्त हुई।
  • बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक‚ 2020
  • इस विधेयक के माध्यम से सभी सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक के नियंत्रण में किया गया है।  
  • यह विधेयक बैंकिंग अधिनियम‚ 1949 की धारा-3‚ धारा-45 और धारा-56 को संशोधित करता है।  
  • विधेयक के तहत रिजर्व बैंक को ऋण स्थगन (Moratorium) के बिना पुनर्गठन या एकीकरण की योजना शुरू करने की अनुमति दी गई है।  
  • रिजर्व बैंक सहकारी बैंकों के अध्यक्षों की रोजगार शर्तों को निर्दिष्ट कर सकता है।  
  • रिजर्व बैंक ऐसे अध्यक्षों को हटा सकता है‚ जो कि उचित मानदंडों पर खरा न उतरे हों। 
  • प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को इस विधेयक से बाहर रखा गया है।  
  • जो सहकारी समितियां अपने नाम के साथ ‘बैंक’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करती हैं और चेकों का समाशोधन नहीं करती हैं‚ उन्हें इस विधेयक से बाहर रखा गया है।
  • विधेयक की विशेषताएं  
  • यह संशोधन केवल बहु-राज्य सहकारी बैंकों और शहरी सहकारी बैंकों के लिए किया गया है
  • सहकारी बैंक वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक और सहकारी समितियों के पंजीयक के दोहरे नियंत्रण में हैं।  
  • इस संशोधन के बाद यह विधेयक रिजर्व बैंक को पूंजी पर्याप्तता और कैश रिजर्व जैसे नियामक कार्यों के अलावा अतिरिक्त शक्तियां प्रदान करेगा।  
  • हालांकि‚ बैंक की प्रशासनिक भूमिका ‘रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज’ (Registrar of Societies) के पास ही रहेगी।
  • विधेयक का उद्देश्य  
  • इस विधेयक का उद्देश्य 1540 सहकारी बैंकों को 5 लाख करोड़ रुपये की बचत के साथ विनियमित करना है।  
  • इसका उद्देश्य छोटे जमाकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।  
  • इस विधेयक के द्वारा बैंकिंग धोखाधड़ी जैसी घटनाओं पर रोक लगाना है। इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी?  
  • ध्यातव्य हो कि भारतीय रिजर्व बैंक सिर्फ एक नियामक संस्था मात्र नहीं है‚ बल्कि यह सार्वजनिक ऋण प्रबंधन जैसे अन्य कार्य भी करती है।  
  • भारत के कुछ बड़े बैंक‚ डिफाल्टरों एवं गैर-निष्पादित संपत्तियों (Non-Performing Asset) की समस्या से जूझ रहे हैं। अत: सरकार बैंकों को उनके प्रमुख डिफाल्टरों के खिलाफ ऋण वसूली के लिए उचित कार्रवाई करने की क्षमता प्रदान करना चाहती है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य  
  • देश के सहकारी बैंकों की ‘गैर-निष्पादित संपत्तियां मार्च‚ 2019 में 7.27 प्रतिशत थीं‚ जो मार्च‚ 2020 में बढ़कर 10 प्रतिशत से ऊपर चली गई।  
  • वित्त वर्ष 2019-20 में 277 शहरी सहकारी बैंक घाटे में रहे थे।  
  • वर्ष 2019 के अंत में 100 से अधिक शहरी सहकारी बैंक न्यूनतम पूंजी की नियामकीय शर्त भी पूरी करने में सक्षम नहीं रह गए थे।   

सं.  अभय पाण्डेय