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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना

Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana
  • सामयिक संदर्भ
  • 20 मई, 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में अगले 5 वर्षों में मत्स्य उत्पादन को दोगुना करने के उद्देश्य से ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) को स्वीकृति प्रदान की गई।
  • 20,050 करोड़ रुपये की निवेश राशि से प्रारंभ की जाने वाली इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक की 5 वर्ष की अवधि में, संपोषणीय और उत्तरदायी विकास के द्वारा ‘नीली क्रांति’ (Blue Revolution) लाना है।
  • योजना की पृष्ठभूमि
  • मछली पकड़ना (Fisheries) और मत्स्यपालन (Aquaculture) भोजन, पोषण, आय और रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
  • यह क्षेत्र प्राथमिक स्तर पर 25 मिलियन से अधिक (2.5 करोड़) मछुआरों एवं मत्स्य किसानों को आजीविका (Livelihood) प्रदान करता है  तथा मूल्य शृंखला में इसे  दोगुने (5 करोड़) लोगों को आजीविका प्रदान करता है।
  • खाद्य सुरक्षा  के दृष्टिकोण से भी मछली प्रोटीन से भरपूर है, जो कुपोषण और भूख से हमारी रक्षा करती है।
  • मत्स्य क्षेत्र भारत में तेजी से संवृद्धि (Growth) करने वाला क्षेत्रक है।
  • वर्ष 2014-15 से 2018-19 के दौरान मत्स्य क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर 10.88 प्रतिशत रही है।
  • जबकि मछली उत्पादन पिछले 5 वर्षों में 7.53 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर के साथ वर्ष 2018-19 के दौरान अभी तक के सर्वोच्च स्तर 137.58 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया।
  • वर्ष 2018-19 के दौरान समुद्री उत्पादों का निर्यात 13.93 लाख मीट्रिक टन रहा, जिसकी मौद्रिक कीमत 46,589 करोड़ रुपये (6.73 बिलियन डॉलर) रही।
  • राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में मत्स्य संपदा का वर्ष 2018-19 के दौरान कुल सकल मूल्यवर्धन (GVA : Gross Value Added) 2,12,915 करोड़ रुपये (चालू आधार कीमत पर) रहा।
  • यह राशि राष्ट्रीय GVA का 1.24 प्रतिशत तथा कृषि क्षेत्र के GVA का 7.28 प्रतिशत है। अतः
  • इस क्षेत्र के अंदर कृषकों की आय दोगुना करने की अभूतपूर्व क्षमता है।
  • ध्यातव्य है कि मत्स्यपालन क्षेत्र की इसी अपार क्षमता का पूर्वाभास करते हुए तथा इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने के लिए केंद्रीय सरकार ने केंद्रीय बजट 2019-20 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) नामक एक नई योजना की घोषणा की।
  • PMMSY का उद्देश्य
  • PMMSY का उद्देश्य देश की मत्स्यपालन का समतापूर्ण, न्यायसंगत, स्थायी, उत्तरदायित्वपूर्ण एवं समावेशीपूर्ण तरीके से दोहन करना है।
  • जलीय भूमि के विस्तार, गहनता, उत्पादन में विविधता लाकर भूमि और जल का लाभकारी उपयोग करना।
  • उत्पादन के पश्चात प्रबंधन तथा मत्स्य उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के आधुनिक एवं वैश्विक मानकों के अनुरूप स्वीकृत व्यवस्था को अपनाया जाना।
  • उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक विस्तृत मूल्य शृंखला का आधुनिकीकरण करना तथा मजबूत बनाना।
  • मछुआरों एवं मत्स्य किसानों की आय दोगुना करना तथा रोजगार सृजन करना।
  • कृषि क्षेत्र के सकल मूल्यवर्धन तथा निर्यात में वृद्धि करना।
  • सशक्त मत्स्य प्रबंधक एवं नियामक ढांचा तैयार करना।
  • मछुआरों और मत्स्य उत्पादक किसानों को शारीरिक, भौतिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना।
  • PMMSY का कार्यान्वयन ढांचा
  • PMMSY के कार्यान्वयन के दो प्रमुख घटक होंगे –

  (a) केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme)

  (b) केंद्र प्रायोजित योजना (Central Sponsored Scheme)

  • केंद्रीय क्षेत्र की योजना के तहत 1,720 करोड़ रुपये का परिव्यय केंद्र सरकार करेगी।
  • जबकि केंद्र प्रायोजित योजना का परिव्यय 18,330 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
  • केंद्र प्रायोजित योजना को पुनः दो भागों में विभक्त किया गया है-

        (i)  लाभार्थी उन्मुख; तथा

        (ii) गैर-लाभार्थी उन्मुख

  • लाभार्थी तथा गैर-लाभार्थी घटकों की अग्रलिखित तीन गतिविधियों (Activities) के अंतर्गत हितबद्ध किया गया है- उत्पादकता तथा उत्पादन में वृद्धि, आधारभूत ढांचा और उत्पादित फसल का प्रबंधन तथा प्रबंधन और नियमन के लिए एक तंत्र (Framework) का निर्माण।
  • PMMSY के तहत राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की सक्रिय भागीदारी रहेगी। सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों तथा जिला कार्यक्रम इकाइयों में राज्य योजना इकाई (State Programme Units) का गठन किया जाएगा।
  • ऐसे जिले जहां मत्स्य उत्पादन की संभावना अधिक है, वहां उप-जिला कार्यक्रम इकाइयों का गठन किया जाएगा।
  • अनुकूलतम परिणामों के लिए ‘क्लस्टर या क्षेत्र आधारित दृष्टिकोण’ अपनाया जाएगा।
  • नवीन एवं उभरती हुई तकनीकी प्रोन्नयन जैसे-पुनर्परिसंचरणीय मत्स्यपालन पद्धति (RAS : Recirculatory Aquaculture System) जहां घर में ही मत्स्य उत्पादन किया जाता है, बॉयोफ्लॉक (टैंक में मछली पालना), एक्वापोनिक्स, केज कल्टवेशन आदि का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाना।
  • ठंडे जल में तथा लवणीय जल में मत्स्यपालन के विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
  • रोजगार बढ़ाने में सक्षम कुछ व्यावसायिक एवं सजावटी मत्स्यपालन गतिविधियां जैसे-समुद्री घास की खेती, सजावटी मछलियों तथा समुद्री कृषि को प्रोत्साहन देना।
  • ‘क्षेत्र विशेष विकास योजना’ के माध्यम से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, द्वीपसमूहों, उत्तर-पूर्वी राज्यों तथा नीति आयोग द्वारा घोषित आकांक्षी जिलों में ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।    
  • ब्रूड बैंकों का निर्माण
  • PMMSY सभी उच्च मूल्य प्रजातियों के मछलियों को व्यावसायिक प्रोत्साहन देने के लिए ब्रूड बैंक का एक राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार करेगा।
  • मत्स्य प्रजातियों में अनुवांशिक सुधार करने, झींगा मछली का ब्रूड स्टॉक बनाने, ऑर्गेनिक मत्स्यपालन का संवर्धन करने तथा जलकृषि में आत्मनिर्भरता के लिए ‘नाभिकीय ब्रीडिंग सेंटर’ की स्थापना की जाएगी।
  • आधुनिक तकनीकी जैसे ब्लॉकचेन आदि की मदद से आधुनिक प्रयोगशाला नेटवर्क तैयार किया जाएगा ताकि ‘फॉर्म टू कंज्यूमर’ तक सभी समस्याओं का हल निकाला जा सके।
  • मत्स्य गांवों की संकल्पना
  • PMMSY तटीय मत्स्य पालक समुदायों के विकास के लिए ‘मत्स्य गांवों’ में समन्वित आधुनिक तटीय मत्स्यपालन के लिए ‘आधारभूत ढांचा’ उपलब्ध करवाएगी।
  • बीमा सुरक्षा
  • PMMSY के तहत पहली बार मछली पकड़ने वाले जहाजों को बीमा सुरक्षा प्रदान की गई है।
  • आजीविका सुरक्षा
  • प्रतिबंधित या व्यावसायिक रूप से बुरे दौर में मत्स्य उत्पादकों को PMMSY वार्षिक आजीविका सहायता प्रदान करेगी।
  • सागर मित्रों का निर्माण
  • PMMSY के तहत मत्स्यपालन में सहयोग एवं विस्तार के लिए 3347 युवा सागर मित्रों का सृजन किया जाएगा।
  • PMMSY का समग्र प्रभाव/लक्ष्य
  • मत्स्य उत्पादन को मौजूदा (2018-19) 137.58 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर वर्ष 2024-25 तक 220 लाख मीट्रिक टन करना।
  • लगातार 9 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखना।
  • कृषि GVA में मत्स्य क्षेत्र के 7.28 प्रतिशत (2018-19) के आंकड़ों को बढ़ाकर वर्ष 2024-25 तक 9 प्रतिशत करना।
  • मत्स्य उत्पादों के मौजूदा 46589 करोड़ (2018-19) के निर्यात को वर्ष 2024-25 तक 1 लाख करोड़ तक पहुंचाना।
  • मौजूदा समय में मत्स्य उत्पादकता 3 टन प्रति हेक्टेयर है। इसे वर्ष 2024-25 तक बढ़ाकर 5 टन प्रति हेक्टेयर करना है।
  • उत्पादन के दौरान तथा उसके पश्चात (Post Harvest) 20-25 प्रतिशत के क्षय को कम कर वर्ष 2024-25 तक 10 प्रतिशत के स्तर पर लाना।
  • घरेलू मत्स्य उपभोग को वर्तमान के 5-6 किग्रा. प्रति व्यक्ति से बढ़ाकर वर्ष 2024-25 तक 12 किग्रा. प्रति व्यक्ति करना।
  • 55 लाख प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार मत्स्य क्षेत्र में वर्ष 2024-25 तक सृजित करना।
  • लाभार्थी समूह
  • मछुआरे, मत्स्य पालक किसान, मछली बेचने वाले दुकानदार, SC/ST/महिलाएं/दिव्यांग, मत्स्य सहकारी समितियां/संगठन, मत्स्य विकास कॉर्पोरेशंस, स्वयं सहायता समूह, स्व-उद्यमी, FFPO’s (Fish Farmers Producer Organisations)।
  • निष्कर्ष
  • खाद्य सुरक्षा, रोजगार, पोषण, पर्यावरण आदि सभी दृष्टिकोणों से सरकार द्वारा प्रारंभ की गई PMMSY क्रांतिकारी परिणाम देगी। तथ्यतः सत्य यह है कि इस योजना के क्रियान्वयन में ईमानदारी तथा योजना की लोचशीलता इसके क्रियान्वयन की बाधाओं को दूर करेगी। कोविड-19 के वैश्विक महामारी के युग में मत्स्यपालन और उसका उपभोग शरीर की प्रतिरोधी क्षमता के उन्नयन में भी सहायक होगा।

सं. अमित त्रिपाठी